Ban होने चाहिए शादियों से ये 13 Sexist रिवाज !

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13 sexists Indian marriage traditions should be banned : शादियों के नाम पर तो भारत एक अलग ही मौज में होता है. दुनियां बाकी देशों में जहां शादी मतलब बस एक दिन का function टाइप होता हैं वहीं भारत में शादी का मतलब कम से कम 1-2 महीने भर की जबरदस्त त्यौहार होता हैं. शादियों में कई ऐसे ऐसे अजीब रिवाज सामने आते रहते हैं जो असल में बेमतलब लगते हैं.

13 sexists Indian marriage traditions should be banned

लेकिन क्या कभी आपने ये सोचने की कोशिश की है कि इन रिवाजों का असली काम आखिर क्या है? शादी तो चलो दो लोगों के मिलन को बताती है, लेकिन शादी में कई रिवाज बिना मतलब के और sexist यानि लिंग भेद करते समझ आते हैं.

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1. दूल्हे और उसके परिवार के पैर धोना.

लड़की वाले लड़के के पैर धोते हैं. कुछ जगहों पर तो ये भी देखा जाता है कि लड़के के पूरे घरवालों के पैर धोए जाते हैं. पहले जमाने में ये रीती रिवाज शायद इसलिए था क्योंकि लोग एक गांव से दूसरे गांव चलकर आते थे, लेकिन अब इसकी कोई जरूरत नहीं. न ही ऐसा कोई रिवाज है कि दुल्हन के पैर उसकी सास धोए. ऐसे में इस घिसे पिटे रिवाज की भला क्या जरूरत है?

2. सिर्फ पिता करे कन्यादान.

बस बाप को ही ये हक़ दिया गया है कि वो कन्या का कन्यादान करे. अगर लड़की के पिता नहीं हैं तो घर का कोई और दूसरा मर्द ये रिवाज करे. पर मां को इस रस्म से दूर रखा जाता है.

3. मां नहीं देखेगी बारात.

फिर एक रिवाज ये भी आता हैं की लड़की की मां लड़की के लिए आई बारात कभी नहीं देखती ऐसा रिवाज भारत के कई हिस्सों में मिलता है. इसके बारे में कुछ बूढ़ों को सुना है कि ये इसलिए हैं लड़की की खुशियों को कहीं मां की नजर ना लग जाए. अजीब है, मां बेटी को नज़र लगाने लगी.

4. नाम और सरनेम बदलना.

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सिंधी शादियों में लड़कियों का नाम शादी के टाइम पर बदल दिया जाता है. और ऐसा लड़के के नाम के हिसाब से किया जाता है और ये माना जाता है कि शादी के बाद दोनों की खुब जमेगी. बाकी सरनेम बदलना तो आम बात है. पर ये सब सिर्फ लड़कियों के साथ किया जाता है. शादी के बाद लड़की पूरी पहचान खो देती है, नए सिरे से सब शुरू करती हैं.

5. लड़कियां करें किसी पेड़, कुत्ते, मैंढक, मटके से शादी.

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एक फिल्म फिलौरी में पहली बार किसी लड़के की पीपल के पेड़ से शादी करवाने की रस्म दिखाई गई थी, इसके बाद फिल्म “टॉयलेट एक प्रेम कथा” में भी अक्षय कुमार भैंस से शादी करते हैं. लेकिन अक्सर ऐसा देखा जाता है कि लड़कियों की शादियां पेड़, कुत्ते, मैंढक, मटके आदि से करवा दी जाती है.

6. सिर पर मटकी रखना.

एक अजीब सी रस्म है बिहार में. इस रिवाज में लड़की जब अपने पति के घर जाती है तो लड़की की सास एक मटकी उसके सिर पर रख देती है. लड़की को सारे काम मटकी सिर पर रख कर करने होते हैं. सभी घर वालों के पैर छूने होते हैं. मटकी की संख्या हर थोड़ी देर में बढ़ा दी जाती है. लड़की घर को कैसे संभालेगी इसकी परीक्षा हो पाए ये रस्म इसलिए रखी गई है.

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7. सिर्फ पुरुषों के लिए खाना.

असम में एक राभा नाम का समाज हैं. राभा में कुछ ऐसी मान्यता है कि पहली बार शादी के बाद जब लड़की घर आए. तो पूरे घर के लिए सिर्फ मीठा नहीं बल्कि पूरा खाना बनाए. और इस खाने को केवल आदमियों को खिलाये. दुल्हन खुद भी वो खाना नहीं खा सकती.

8. कन्यादान.

हालांकि, ये सिर्फ एक दिमागी ख्याल है. कन्यादान को बड़े पुण्य का काम माना जाता है. माता-पिता को उनके कर्तव्यों और पापों से मुक्ति केवल लड़की ही दे सकती है. लेकिन एक तरह से देखा जाए तो ये रिवाज कुछ sexist है.

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9. दहेज देना.

चाहे कुछ मांगा न जाए. लेकिन लड़की के परिवार वाले तो फिर भी लड़के के परिवार को और लड़के के लिए कुछ न कुछ जरूर देते ही हैं और लगभग सारी बाटे पूरी करते हैं. शायद इससे ज्यादा sexist रिवाज दुनिया में कोई दूसरा नहीं.

10. मंगलसूत्र और सिंदूर.

मंगलसूत्र, सिंदूर, बिछुए आदि बस महिलाओं को ही पहनने होते हैं, मर्द इसमें से कुछ नहीं पहनते. इससे सुंदरता बढ़ जाती है इसमें कोई शक नहीं. लेकिन फिर भी जिन्हें ये नहीं पसंद उनका क्या .

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