भारत के इन गांवों में राष्ट्रपति की एंट्री भी “बैन” है, पत्थरों पर लिखा है अपना संविधान …

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Community Ban: भारत के इन गांवों में राष्ट्रपति की एंट्री भी “बैन” है, पत्थरों पर लिखा है अपना संविधान … वैसे तो किसी देश का कानून उस देश की सीमा क्षेत्र के अंदर मौजूद हर राज्य, जिला और गांव में लागू होता है! पर हमारे देश में कुछ गांव ऐसे भी हैं! जहां भारत का संविधान का नहीं! बल्कि वहां के ग्रामसभा (Gram Sabha) का कानून विशेष चलता है! जी हां, आपको ये सुनने में अजीब लग सकता है पर ये सच है! दरअसल ऐसा झारखंड में चार जिलों के 34 गांवों में हो रहा है! हाल कुछ ऐसा है कि गांवों की अनुमति के बिना गांवों में कोई गांव में नहीं जा सकता! यहां तक कि ये फरमान PM, CM, राज्यपाल और राष्ट्रपति के लिए भी है!

Community Ban-

पत्थरों से बनी गांव की सीमा-

दरअसल मीडिया में आई रिपोर्ट के अनुसार इन गांवों की ग्राम सभाओं ने अपनी-अपनी सीमा पर बैरेकेडिंग (Barricading) कर रखी है! जिसे वहां की स्थानीय भाषा में पत्थलगड़ी कहते हैं! जिसका मतलब है पत्थर गाड़कर गांव की सीमा रेखा बनाना! वैसे ये है तो आदिवासी समाज की परंपरा है!लेकिन इन गांवों में अनौपचारिक कार्य किया जा रहा है! यहां तक कि इन गांवों में, देश के संविधान पत्थर पर लिखा गया है! लेकिन भारत के मूल संविधान के उलट! उसमें लिखे तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है!

गौरतरलब है कि ये झारखण्ड (Jharkhand) की राजधानी रांची के साथ 4 जिलों खूंटी, गुमला, सिमडेगा में पत्थलगड़ी का खेल जारी है! साथ ही ये पड़ोसी जिलों गोड्डा, पाकुड़, लोहरदगा और पलामू में भी फैल रहा है! मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इन सभी गांवों में गैरकानूनी ढ़ंग से अफीम (Opium) की खेती भी की जाती है!

स्थानीय प्रशासन नहीं चाहिए-

इन गांवो के लोग अपने गांव के प्रवेश द्वार पर सड़क में ही मचान बनाकर हर समय आने-जाने वाले लोगों की निगरानी रखते हैं! बताया जा रहा है कि जिन गांवों में पत्थलगड़ी हो चुकी है! वहां के ग्रामप्रधानों ने CM, PM और राष्ट्रपति को पत्र लिखकर स्थानीय स्तर से जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को हटाने अनुरोध किया है! साथ ही इन लोगों ने नक्सलियों से निपटने के लिए बनाए गए CRPF कैम्पों को भी हटाने के लिए अनुरोध पत्र लिखा है!

बाहरी आदमी को घुसने पर मिलती है सजा-

मीडिया के अनुसार इन गांवों में अगर कोई बाहरी व्यक्ति जबरन घुस भी जाता है! तो ग्राम सभा उसे दंड देती है! यहां गांव में प्रवेश करने से पहले ग्रामसभा से इसकी इजाजत लेनी पड़ती है! जिसेक लिए उसका नाम, काम-व्यवसाय, पहचान पत्र, किस काम से आप गांव में प्रवेश कर रहे हैं! इस सबका जवाब देना पड़ता है! ऐसे सवालों के जवाब से वहां के लोग संतुष्ट होने पर ही गांव में प्रवेश की इजाजत देते हैं!

इसके साथ ही जब तक आपके साथ उस गांव कोई गांव का जान-पहचान का व्यक्ति नहीं होता है! तब तक आपको प्रवेश मिलना नामुमकिन है! गांवो के लोगों का खौफ इतना है कि हथियारबंद Police कर्मी भी वहां नहीं जाना चाहते हैं! ऐसे में वहां के लोग अपनी मनमानी करते हैं! और ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं लेने देते! यहां तक कि बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ने भी नहीं दिया जाता है! बल्कि यहां के गांवो में लोगों ने अपने स्तर से स्कूल खोल रखा है! जहां बच्चों को गैर कानूनी शिक्षा दी जाती है! और ग्रामीणों को आंदोलन के लिए उकसाया जाता है!