जो सुशांत के निधन के बाद सदमे में चली गई थी एक्ट्रेस, उसने किया खुलासा , कहा – हमेशा मन होता था…

सुशांत सिंह राजपूत बॉलीवुड अभिनेता निधन से चकाचोंध से भरी मायानगरी पर बहुत सारे सवाल उठ रहे है क्योकि महज 34 साल की उम्र में सुशांत सिंह राजपूत का खुद को मार देना कोई आसान बात नहीं है 34 साल की उम्र में ही एक्टर ने 14 जून को मुंबई के बांद्रा में जो उनका घर है उन्होंने उसी अपार्टमेंट में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। सुशांत सिंह राजपूत काफी टाइम से डिप्रेशन में थे करीब 6 महीनो से और मुंबई के एक डॉक्टर है वो ही उनका इलाज कर रहे थे। उनकी मौत के बाद से ही बॉलीवुड स्टार्स सारे फेन्स लगातार उन सब की प्रितिक्रिया सामने आ रही है। वही अब इसी बीच 90 दशक बॉलीवुड एक्ट्रेस दीप्ती नवल ने भी खुद को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद दीप्ती नवल ने भी 90 दशक की स्टार्टिंग में अवसाद से अपनी लड़ाई और आत्महत्या जैसे ख्यालो को लेकर फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर किया। उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत को श्रद्धांजलि दी और एक कविता भी शेयर की। वो कविता उन्होंने अवसाद से उबरने की लड़ाई के टाइम ही लिखी थी। दीप्ती नवल की कविता का शीर्षक ''ब्लैक विंड'' है। दीप्ती नवल ने उस कविता में ये लिखा, कि इन अँधेरे भरे हुए दिनों में काफी कुछ हो रहा है. दिल-दिमाग एक बिंदु पर जाकर ठहर गया है. या सुननन सा हो गया है. आज मुझे ऐसा है कि मैं उस कविता को शेयर करू सबसे जिसको मैंने उन अवसाद, व्यग्रता और आत्महत्या के ख्यालो के साथ अपनी लड़ाई के टाइम लिखी थी. और हां अभी भी वो लड़ाई जारी हैं.'' उन्होंने लिखा : व्यग्रता और बेचैनी ने, दोनों हाथों से पकड़ ली है मेरी गर्दन. मेरी आत्मा में बहुत गहरे तक धंसे जा रहे हैं, इसके नुकीले पंजे. सांस लेने को छटपटा रही हूं मैं, अपने बिस्तर के तीखे चारपायों से लिपट कर. टेलिफोन बजता है… नहीं, बंद हो गया… ओह! कोई बोल क्यों नहीं रहा है? एक इंसानी आवाज, इस शर्मनाक, निष्ठुर रात की खाई में… ये रात जो गहरे अंधकार में डूब गयी है, और इसने ओढ़ ली है एक बैंगनी नीली सी चादर. अपने भीतर महसूस कर रही हूं एक गहरा अंधकार।’ हम आपको बता दे, कि ये कविता उन्होंने 28 जुलाई, 1991 में लिखा था। पीटीआई भाषा के साथ वो ये सब पिछले साल ही एक साक्षात्कार में कह चुकी हैं, कि जो आखिरी दशक था उनका 90 में उन्होंने उस काम को बेहद काम कर दिया था। दीप्ती नवल ने 1978 में श्याम बेनेगल की आई फिल्म ''जुनून'' के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। इन सबके बाद उन्होंने ‘चश्मे बद्दूर’, ‘अनकही’ मिर्च मसाला’, ‘साथ-साथ’ जैसी फिल्मों में काम किया।
 

जो सुशांत के निधन के बाद सदमे में चली गई थी एक्ट्रेस, उसने किया खुलासा , कहा – हमेशा मन होता था…

सुशांत सिंह राजपूत बॉलीवुड अभिनेता निधन से चकाचोंध से भरी मायानगरी पर बहुत सारे सवाल उठ रहे है क्योकि महज 34 साल की उम्र में सुशांत सिंह राजपूत का खुद को मार देना कोई आसान बात नहीं है 34 साल की उम्र में ही एक्टर ने 14 जून को मुंबई के बांद्रा में जो उनका घर है उन्होंने उसी अपार्टमेंट में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। सुशांत सिंह राजपूत काफी टाइम से डिप्रेशन में थे करीब 6 महीनो से और मुंबई के एक डॉक्टर है वो ही उनका इलाज कर रहे थे। उनकी मौत के बाद से ही बॉलीवुड स्टार्स सारे फेन्स लगातार उन सब की प्रितिक्रिया सामने आ रही है। वही अब इसी बीच 90 दशक बॉलीवुड एक्ट्रेस दीप्ती नवल ने भी खुद को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद दीप्ती नवल ने भी 90 दशक की स्टार्टिंग में अवसाद से अपनी लड़ाई और आत्महत्या जैसे ख्यालो को लेकर फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर किया। उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत को श्रद्धांजलि दी और एक कविता भी शेयर की। वो कविता उन्होंने अवसाद से उबरने की लड़ाई के टाइम ही लिखी थी। दीप्ती नवल की कविता का शीर्षक ''ब्लैक विंड'' है। दीप्ती नवल ने उस कविता में ये लिखा, कि इन अँधेरे भरे हुए दिनों में काफी कुछ हो रहा है. दिल-दिमाग एक बिंदु पर जाकर ठहर गया है. या सुननन सा हो गया है. आज मुझे ऐसा है कि मैं उस कविता को शेयर करू सबसे जिसको मैंने उन अवसाद, व्यग्रता और आत्महत्या के ख्यालो के साथ अपनी लड़ाई के टाइम लिखी थी. और हां अभी भी वो लड़ाई जारी हैं.'' उन्होंने लिखा : व्यग्रता और बेचैनी ने, दोनों हाथों से पकड़ ली है मेरी गर्दन. मेरी आत्मा में बहुत गहरे तक धंसे जा रहे हैं, इसके नुकीले पंजे. सांस लेने को छटपटा रही हूं मैं, अपने बिस्तर के तीखे चारपायों से लिपट कर. टेलिफोन बजता है… नहीं, बंद हो गया… ओह! कोई बोल क्यों नहीं रहा है? एक इंसानी आवाज, इस शर्मनाक, निष्ठुर रात की खाई में… ये रात जो गहरे अंधकार में डूब गयी है, और इसने ओढ़ ली है एक बैंगनी नीली सी चादर. अपने भीतर महसूस कर रही हूं एक गहरा अंधकार।’ हम आपको बता दे, कि ये कविता उन्होंने 28 जुलाई, 1991 में लिखा था। पीटीआई भाषा के साथ वो ये सब पिछले साल ही एक साक्षात्कार में कह चुकी हैं, कि जो आखिरी दशक था उनका 90 में उन्होंने उस काम को बेहद काम कर दिया था। दीप्ती नवल ने 1978 में श्याम बेनेगल की आई फिल्म '' जुनून'' के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। इन सबके बाद उन्होंने ‘ चश्मे बद्दूर’, ‘अनकही’ मिर्च मसाला’, ‘साथ-साथ’ जैसी फिल्मों में काम किया।