कैसे इटली पहुँच गयी देश के कीमती पुरातन मूर्ती और कलाकृतियाँ ? कौन हो गया मालामाल..

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Italy access country: भारत के अनन्य और बेहद कीमती पुरातन कलाकृतियाँ, देवी-देवताओं की मूर्तियाँ, हीरे जवाहरात और अनेक वस्तु हमारे नाक के नीचे से इटली ले जाया गया यह हम में से कितने लॊग जानते हैं? बहुत कम। इन्दिरा गांधी और राजीव गाँधी के प्रधानमंत्री हॊने के समय से ही यह तस्करी की जा रही थी। कौन कर रहा था? और कौन हो सकता है इटली की बेटी और भारत की बहुरानी काँग्रेस की एक मेव राजमाता सॊनिया मेडम जी.

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सास और पती के कार्यकाल में दिल्ली और चेन्नई

सी.बी.आई के दस्तावेज़ तो यही बताते हैं कि मेडम जी ने भारत के अनगिनत बेश कीमती वस्तुओं की तस्करी करवाई। अपने सास और पती के कार्यकाल में दिल्ली और चेन्नई के हवाई अड्डॊं से बिना किसी सुरक्षा जाँच के भर भर के कीमती कलाकृतियाँ इटली भेजा करती थी। एयर इंडिया एवं अलितालिया हवाई जहाज़ का तो यह रॊज़ का काम हुआ करता था। सरकार में सांस्क्रतिक मंत्री रहनेवाले अर्जुन सिंह इस काम में मेडम जी को पूरा सहयॊग दे रहे थे।

जॊ भी पैसा आता उसे सीधे राहुल गांधी के बेंक में डाला जाता

यह सारी कीमती कलाकृतियाँ इटली में मेडम जी की बहन अलेस्सान्ड्रा मैईनॊ विन्सी के पास भॆजा जाता था। इटली के रिवॊल्टा शहर के दुकान एथेनिका और ओर्बासानॊ शेहर का गनपती नाम के दो दुकानॊं मे रखा जाता था। किन्तु इटली में इन्हे बेचा नहीं जाता था अपितु झूटी रसीतें बनाकर लंडन के सोथब्येस आंड क्रिस्टीस को बेचा जाता था। नीलामी से जॊ भी पैसा आता उसे सीधे राहुल गांधी के लंडन में स्तिथ नेशनल वेस्तमिनिस्टर बेंक, हाँकॊंग और शांघाई बेंक में डाला जाता था। सबसे ज्यादा पैसा सैमन ऐसलांड के बेंक ऒफ अमरीका में जमा कराया गया था। राहुल की हरवर्ड विशविद्यालय की एक साल का शुल्क इसी बेंक से चुकाया गया था.

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रूपिका चावला का सहयॊग

मेडम जी जो की एक गरीब परिवार से आती है और अनपड है उनके पास कॊई भी विशेष प्रतिभा नहीं थी। इसलिये उसने स्वयं को वास्तुकला निपुण बताया और भारत के कीमती कलाकृतियॊं कॊ प्रामाणित करने का ज़िम्मा ले लिया। चुनाव आयॊग के अध्यक्ष नवीन चावला की पत्नी रूपिका चावला इस काम में मेडम जी को सहयॊग देती थी। इसी दौरान कलाकृतियॊं की तस्करी भी किया करती थी। इटली सरकार में सांस्क्रितिक पद की देख रेख करनेवाले व्यक्ती से सॊनिया की गहरी दॊस्ती थी। जिसे बाद में सरकार से बर्खास्त किया गया था। इस काम के लिये मेडम जी ने १९८४ के दौरान एल.टी.टी.ई की सहायता भी ली थी.

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