Banking in India Effect Economy | अर्थव्यवस्था से बैंको को हटा दिया गया तो क्या होगा?

0
301
Banking in India Effect Economy, Banking in India , indian Economy, india bank, सहकारी बैंक, राष्ट्रकृत बैंक, विदेशी बैंक, निजी बैंक, hdfc, icici, citibank, hsbc, sbi

दिल्ली, इंडियावायरलस: Banking in India Effect Economy | बैंक क्या होता है! सामान्य: पैसा जमा करना, पैसे को निकालना या फिर किसी भी वस्तु (जैसे: मकान, व्हीकल, पर्सनल आदि) पर लोन लेना यही बैंक है! इन बैंको को RBI द्वारा चलाया जाता है! अर्थात: जो नियम RBI ने बनाये वो इन बैंको में मान्य होंगे! तभी RBI को बैंको का बैंक भी कहा जाता है!

Banking in India Effect Economy | बैंक कितने प्रकार के होते है –

सामान्यता: बैंको को दो भागो में बांटा गया है- अनुसूचित और गैर-अनुसूचित!

अनुसूचित बैंक: 

ये वे बैंक होते है जोकि RBI से ऋण ले सकते है किसी भी पर्पज से! आर्थिक संकट या कोई पर्सनल काम के लिए! यानी साफ़ लफ्जो में कहे तो एक बैंक जिसकी की पूँजी 5 लाख और उससे ऊपर की अनुसूचित बैंक श्रेणी में आता है! अनुसूचित बैंको को भी दो क्षेत्रों में बांटा गया है- वाणिज्यिक और सहकारी बैंक! वाणिज्यिक बैंको को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको, निजी क्षेत्र के बैको, विदेशी बैंको और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंको में बांटा गया है! वही सहकारी बैंको को शहरी और ग्रामीण में बांटा गया है!

1 वाणिज्यिक बैंक

बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत रगुलेट किया जाता है! इस बैंक के बिजनेस मौडल को लाभ कमाने के लिए डिजाइन किया गया है! उनका प्राथमिक कार्य जमा को लेना और आम जनता, कोरर्पोरेट्स और सरकार को ऋण देना है!

राष्ट्रकृत बैंक ये वे बैंक है जो देश के कुल बैंकिंग कारोबार का 75% हिस्सा कवर करते है! राष्ट्रकृत बैंको के शेयर ज्यादातर सरकार के पास होते है! जैसे SBI, PNB आदि ये राष्ट्रकृत बैंको में आते है!

निजी बैंक ये वे बैंक जिनके शेयर सरकार नहीं बल्कि निजी शेयर धारको के पास होते है! लेकिन निजी बैंको पर भी RBI के नियम ही लागू होते है! जैसे की ICICI, AXIX, HDFC आदि ये निजी बैंक है!

विदेशी बैंक ये वे बैंक होते है जिनका मुखयालय विदेश में होता है और किसी में देश में इनकी ब्रांच होती है! लेकिन जिस भी देश में इनकी ब्रांच होगी उस ब्रांच में उसी देश का नियम लागू होगा! जैसे कि CITIBANK, HSBC की ब्रांच भारत में है तो RBI के नियम ही लागू होंगे!

2 सहकारी बैंक 

सहकारी समिति अधिनियम, 1912 के तहत इन बैंको को पंजीकृत किया गया! ये बैंक नो-प्रॉफिट नो-लॉस के बेसिस पर काम करते हैं और मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों में उद्यमियों, छोटे व्यवसायों, उद्योगों और स्वरोजगार की सेवा करते हैं! ग्रामीण क्षेत्रों में, वे मुख्य रूप से कृषि आधारित गतिविधियों जैसे खेती, पशुपालन में वितिय प्रबन्धन करते हैं!

गैर अनुसूचित बैंक:

जिस तरह अनुसूचित बैंक RBI से मदद ले सकता है! ये बिलकुल उसका उल्टा है! गैर अनुसूचित बैंक आपातकालीन या “असामान्य परिस्थितियों” को छोड़कर, सामान्य बैंकिंग उद्देश्यों के लिए RBI से उधार नहीं ले सकते हैं!

Banking in India Effect Economy | अर्थव्यवस्था से बैंको को हटा दिया गया तो 

ये बड़ा ही सरल सा मेथड है! बैंक क्या करता है आपको आपकी जरूरत के हिसाब से ऋण देगा! तो पैसे की खपत होगी कही पर निवेश होगा जिससे मनी सर्कुलेशन चलता रहेगा! बैंको के द्वारा ऋण देना अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है! अगर किसी को कोई व्यवसाय शुरू करना है तो सीधा बैंक जाता है कि उसे लोन मिल सके!

अगर ऐसे में बैंक उसे लोन नहीं देता तो इससे अर्थव्यवस्था को नुक्सान होगा! क्योकि उधार नहीं दिया तो वो जो रिटर्न में ब्याज आता वो नहीं आएगा! दूसरा, उधार न देने की वजह से एक नया व्यवसाय नहीं शुरू हो पाया जिससे सरकार को टैक्स मिलता! तो इसलिए बैंक का अर्थव्यवस्था में होना बहुत जरूरी है!

उम्मीद करते है आपको जानकारी पसंद आयी हो!