शाहजहां को 75% हिंदू और बराक ओबामा के बराबर समझने वाले जावेद अख्तर ने यह कभी नहीं बताया कि काशी के क्षेत्र में मंदिरों को किसने तोड़ा

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हम बात कर रहे हैं उनकी जो पहले फिल्मों की कहानियां और पटकथा लिखते थे, जिसमें ब्राह्मणों को मजाकिया ढंग से दिखाया जाता था और मौलवियों के लिए इज्जत बढ़ाने वाले किरदार गड़े जाते थे फिर वह गीतकार बने हुए थे.अकबर (Akbar) की तारीफ़ में ‘अजीमो-शाह-शहंशाह’ जैसे गाने लिखे. अब वो ट्विटर ट्रोल हो गए हैं. नाम है – जावेद अख्तर (Javed Akhtar). खुद को नास्तिक कहते हैं, और नास्तिकों वाला अवॉर्ड भी ले लेते हैं. लेकिन, इस्लामी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए शाहजहाँ और बराक ओबामा की तुलना करते हैं.

एक बार जावेद अख्तर ने अपने ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने लिखा था, “अमेरिकी राष्ट्रपति रहे बराक ओबामा केन्या से ताल्लुक रखते थे. उनकी चाचियाँ अब भी केन्या में रहती हैं. लेकिन, चूँकि ओबामा का जन्म अमेरिका में हुआ था, इसीलिए उन्हें वहाँ का राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का अधिकार मिला. वहीं शाहजहाँ भारत में मुगलों की पाँचवीं पीढ़ी का था. उसकी माँ और दादी राजपूत समुदाय से थीं। लेकिन, वो शाहजहाँ को विदेशी कहते हैं.”

हम यह सवाल पूछते हैं कि क्या शाहजहां ने कभी खुद को हिंदू धर्म का बताया है या खुद को हिंदू होने पर गर्व किया है? बिल्कुल नहीं. जावेद अख्तर ने अपनी ट्वीट में लिखा है कि माँ और दादी के हिन्दू होने के कारण शाहजहाँ का खून 75% हिन्दू था. अगर शाहजहाँ 75% हिन्दू था तो फिर जावेद अख्तर उसे हिन्दू ही क्यों नहीं कहते? क्या 25% मुस्लिम भी मुस्लिम होता है? बराक ओबामा की तरह कभी शाहजहाँ ने कहा या लिखा है कि उसे अपनी माँ के हिन्दू होने पर गर्व है?

हम बात उस समय की कर रहे हैं जब शाहजहां (Shahjhan) का शासनकाल शुरुआती दौर में था, ऐसे में उसने इस विद्रोह से सख्ती से निपटने का फैसला किया और फ़ौज की तीन बड़ी टुकड़ियों को ओरछा भेजा. खुद आगरा से ग्वालियर में बैठ कर वो युद्ध का निरीक्षण करने लगा. ओरछा के सिंहासन पर बिठाने के लिए एक दूसरा दावेदार ले आया. जुझार सिंह को बातचीत की मेज पर आना पड़ा. कुछ दिनों बाद फिर विद्रोह हुआ. अबकी शाहजहाँ ने बेटे औरंगजेब को वहाँ स्थिति सुलझाने के लिए भेजा.

वहीं दूसरी ओर जुझार सिंह को जंगलों में शरण लेनी पड़ी, जहाँ गोंड एवं भील विरोधियों ने उसे मार डाला. मुग़ल सैनिकों ने जुझार सिंह का सिर काट कर और उसके खजाने से 1 करोड़ रुपए शाहजहाँ को उपहार के रूप में भेजे. इसके बाद उसने इसका ‘दंड’ हिन्दुओं को देने का निश्चय कर लिया. ओरछा में राजा राम के प्रमुख मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया. लोगों पर अत्याचार हुए. वही जुझार सिंह के पोते को जबरन इस्लाम कबूलवाने को मजबूर किया गया.

गौरतलब है कि माइकल फिशर ने अपनी पुस्तक ‘A Short History of the Mughal Empire‘ मैं इस बात का जिक्र किया है. इसके साथ साथ क्या है क्या शाहजहां ने ओरछा के चतुर्भुज मंदिर का खजाना भी लूट लिया गया. इतना ही नहीं, ‘बादशाहनामा’ में इसका जिक्र है कि शाहजहाँ ने काशी में निर्माणाधीन या बन कर तैयार हो चुके 76 मंदिरों को ध्वस्त करवा दिया था. उसके राज में मंदिर के निर्माण पर पूरी तरह पाबंदी लगी हुई थी.

सूत्रों के अनुसार शाहजहाँ के हरम में 8000 रखैलें थीं जो उसे उसके अब्बू जहाँगीर से विरासत में मिली थी. उसने हरम की महिलाओं की व्यापक छँटनी की तथा बुजुर्ग महिलाओं को भगा कर अन्य हिन्दू परिवारों से जबरन महिलाएँ लाकर हरम को बढ़ाता ही रहा. कहते हैं कि उन्हीं भगाई गई महिलाओं से दिल्ली का रेडलाइट एरिया जीबी रोड गुलजार हुआ था और वहाँ इस धंधे की शुरूआत हुई थी. वो हिन्दू महिलाओं का मीनाबाजार लगाया करता था.

 

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