सभी इस्लामिक देश आए थे इसराइल पर एक्शन लेने के लिए, लेकिन अब उड़ रहा है दुनिया भर में मजाक, जाने आखिर क्यों?

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इजरायल और फिलिस्तीन का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है ऐसे में अब तो रविवार को एक बैठक की गई है जो कि OIC ने की है! इसमें कुल 57 देश शामिल हुए हैं! इस बैठक के अंदर इसराइल की कड़ी आलोचना की गई है और राजा में जो भी कुछ हो रहा है उसको रोकने की मांग की गई है हालांकि लाइव को लेकर सभी देशों की प्रतिक्रिया अलग-अलग इसीलिए बीच के मतभेद बैठक में भी खुलकर सामने आ गए!

वहीं पिछले साल संयुक्त अरब अमीरात ने लाइन के साथ रिश्ते सामान्य किए थे और उसके बाद बहरीन, मोरक्को और सूडान ने भी UAE का अनुसरण किया था वही मिस्र और जॉर्डन ने भी इजराइल के साथ शांति समझौते किए हुए थे! ऐसे में इस बैठक में कई देशों के प्रतिनिधियों ने इजरायल से दोस्ती करने के कदम को गलत ठहराया है!

ओआईसी में, फिलिस्तीनियों से एक अलग राष्ट्र बनाने और पूर्वी यरुशलम को अपनी राजधानी बनाने की मांग एक बार फिर दोहराई गई! इससे पहले सऊदी अरब ने अल अक्सा मस्जिद में इसराइल के द्वारा फिलिस्तीन के लोगों को उनके घरों से बेदखल करने की योजना की कड़ी निंदा की थी सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैजल बिन फरहान फरहन अल सऊद ने बैठक में कहा है कि वैश्विक समुदाय में दो राष्ट्र के सिद्धांत के आधार पर शांति समझौता करने और हिं सा रोकने के प्रयास करने चाहिए!

इस्राइल के खिलाफ पाकिस्तान और तुर्की सबसे आक्रामक रुख अपना रहे हैं! मलेशिया, इंडोनेशिया और ब्रुनेई ने भी रविवार को अलग-अलग बयान जारी कर संयुक्त राष्ट्र महासभा की आपात बैठक बुलाने की मांग की. हालांकि, इजरायल के साथ संबंध बहाल करने वाले यूएई का रुख उतना सख्त नहीं था! यूएई ने अपने बयान में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अब्राहम समझौते का हवाला देते हुए पिछले साल इजरायल से शांति और विराम की अपील की थी!

सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने ओआईसी की बैठक में भाग लिया लेकिन संयुक्त अरब अमीरात की ओर से विदेश मंत्री के स्थान पर एक कनिष्ठ मंत्री को भेजा गया! यूएई के अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्री, राइम अल-हाशिमी ने कहा कि मध्य पूर्व को अस्थिरता से बचाने के लिए तनाव को कम करने और संयम बरतने की तत्काल आवश्यकता है!

इस्राइल के खिलाफ बुलाई गई इस बैठक में सदस्य देश एक दूसरे पर उंगलियां उठाते नजर आए! ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने कहा, “आज फ़िलिस्तीनी बच्चों का नर सं हार इसराइल के साथ संबंधों को सामान्य करने का ही परिणाम है!”

तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत कावुस्गोलु ने भी ईरान के साथ उन देशों की आलोचना की जिन्होंने इज़राइल के साथ संबंध बहाल किए! हालाँकि, इज़राइल तुर्की के साथ राजनयिक संबंध बनाए रखता है! तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा, ‘यहां कुछ लोग हैं जिन्होंने अपनी नैतिकता खो दी है और इस्राइल के लिए अपना समर्थन दिया है! अगर हमारे ही परिवार में आधे-अधूरे बयान दिए जा रहे हैं, तो हम दूसरों की आलोचना कैसे कर सकते हैं? हमारी बातों को फिर से कौन गंभीरता से लेगा?

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