ओवैसी ने बदला UP विधानसभा चुनाव के लिए अपना प्लान, अब इन पर ग़ढ़ाई नजर

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Asaduddin Owaisi changed plan for UP assembly elections 2022 know which seats are on AIMIM target: उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बाद अगर किसी पार्टी की चर्चा हो रही है तो वह है असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन की! लेकिन आखिरकार किस पार्टी के अंदर ऐसा किया है जिससे उत्तर प्रदेश का राजनीतिक माहौल धीरे-धीरे से गर्म होता जा रहा है! आइए पूरे मामले के ऊपर विस्तार से नजर डालते हैं!

2017 विधानसभा चुनाव-

उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनाव में कुल 323 पार्टियां उतरी थी जिनमें से एक असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी भी थी! जिसने अपने इस चुनाव में 38 उम्मीदवार उतारे थे जिनमें से 37 की चुनाव में जमानत जप्त हो गई थी! उसके बावजूद भी एआईएमआईएम धीरे-धीरे से उत्तर प्रदेश के अंदर अपनी पहचान बनाती जा रही हैं!

इसका कारण यह भी है कि साल 2017 के चुनाव में एआईएमआईएम को प्रदेश की बहुत पुरानी पार्टी राष्ट्रीय लोक दल के बराबर वोट मिली थी! यानी उसने अपने 38 उम्मीदवार उतारे जिनमें से 13 सीटों पर चौथे पोजीशन पर बरकरार रहे इसलिए भी क्योंकि संभल में उसने सेकंड फोन किया था और इसलिए भी क्योंकि फिरोजाबाद मेयर के चुनाव में वह समाजवादी पार्टी को पीछे छोड़कर भारतीय जनता पार्टी के बाद दूसरे नंबर पर रही थी!

बिहार की सफलता के बाद हौसले बुलंद

AIMIM चर्चा में है क्योंकि 2022 की परिस्थितियां 2017 से अलग होंगी। CAA-NRC और लव जिहाद एक्ट के बाद यूपी में यह पहला चुनाव होगा। अन्य दल अखिलेश यादव पर मुस्लिम तबके से वोट लेने का आरोप लगाते रहे हैं लेकिन सीएए-एनआरसी के खिलाफ चुप्पी साधे हुए हैं। ऐसी स्थिति में मुस्लिम समाज किसी अन्य नेतृत्व की ओर देख सकता है। ओवैसी इस खालीपन को भरना चाहते हैं। बिहार चुनाव में सीमांचल की 5 सीटों की जीत इसका ताजा उदाहरण है।

वहां ओवैसी कैडर ने सीएए-एनआरसी मुद्दे पर आंदोलनकारियों के साथ लड़ाई लड़ी। इस सफलता के कारण, ओवैसी की आत्माएं आसमान छू गई हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि यूपी में उड़ान भरने के लिए एक रणनीतिक बदलाव आवश्यक होगा। यह बदलाव किया गया है। 2017 की तुलना में ओवैसी ने 2022 की रणनीति बदल दी है। आइए जानते हैं कैसे?

नया लक्ष्य पूर्वांचल

2017 में, AIMIM ने 403 यूपी सीटों में से 38 सीटों पर चुनाव लड़ा। इनमें पश्चिमी यूपी, अवध और तराई बेल्ट की सीटें शामिल थीं। पश्चिमी यूपी की कुछ सीटों पर उन्हें अच्छे वोट मिले, लेकिन अन्य जगहों पर मामला उत्साहजनक नहीं था। पूर्वांचल में ओवैसी ने एक भी सीट पर चुनाव नहीं लड़ा था। ओवैसी ने गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, जौनपुर और वाराणसी में एक भी उम्मीदवार नहीं उतारा।

लेकिन इस बार असदुद्दीन ओवैसी ने अब पूर्वांचल पर फोकस बढ़ा दिया है। उनकी हालिया यात्रा पूर्वांचल की थी। हालाँकि, वे जानते हैं कि चुनावी स्तर को बिना किसी समर्थन के पार नहीं किया जा सकता है। यही कारण है कि उन्होंने अभी से साथियों की तलाश शुरू कर दी है।

इन जिलों पर नजर

उनका ध्यान सिर्फ पूर्वांचल पर नहीं है। यह राज्य का वह क्षेत्र है जहां 2017 में भाजपा कमजोर दिखी थी। सपा और बसपा का वर्चस्व था। आजमगढ़, जौनपुर, गाजीपुर, मऊ, बलिया, संतकबीरनगर, चंदौली, अंबेडकरनगर और प्रतापगढ़ ऐसे जिले हैं जहाँ ओवैसी के पनपने की संभावना है। यही कारण है कि ओवैसी इन क्षेत्रों में सक्रिय छोटे दलों के साथ सहयोग करते नजर आते हैं।

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