ए आर रहमान की मम्मी ने हिंदू गीतकार से कहा: मेरे घर आना है तो माथे से टीका हटा कर आओ

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If you want to come to my house then remove the tika from your forehead: संगीतकार ए आर रहमान (A R Rahman) को आज के युग में कौन नहीं जानता है. वह भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री के उन कलाकारों में से एक है, जिन्होंने अपने दम पर देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मुकाम हासिल किया है. ए आर रहमान को फिल्म स्लमडॉग मिलेनियर में गाए हुए गीत ‘जय हो’ के लिए ऑस्कर (Oscar) अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है.

उनके परिवार को लेकर तमिल गीतकार पिरईसूदन ने एक हैरान करने वाला खुलासा किया इससे पता चलता है कि रहमान का परिवार हिंदू चिन्हों एवं सभ्यताओं को लेकर कितना असहिष्णु है।

अपने साथ हुई घटना को याद करते हुए गीतकार एवं कवि पिरईसूद ने बताया कि वह एक सरकारी कार्यक्रम में रहमान से मिले थे. वहां रहमान को देखकर याद आया कि कैसे उन लोगों ने बीते समय में एक साथ काम किया था. गीतकार के अनुसार इसी कार्यक्रम में रहमान ने पुरानी यादें और साथ को तरोताजा करने के लिए अपने घर पर आकर गाना लिखने को आमंत्रित किया था.

लेकिन जब पिरईसूदन रहमान के घर गए तो उनकी अम्मी ने उन्हें अपने घर में विभूति और कुमकुम तिलक ना लगा कर आने को कहा. इसे सुनते ही पिरईसूदन ने अपने माथे से धार्मिक चिन्हों को हटाने से मना कर दिया.

गौरतलब है कि हिंदू धर्म में विभूति और कुमकुम माथे पर लगाया जाता है. दक्षिण भारत में तो हर हिंदू धर्म को मानने वाले के माथे पर यह चिन्ह देखने को मिलेंगे. ऐसे में रामायण की अपनी द्वारा कहे गए शब्द उन्हें किसी धक्के से कम नहीं लगे.

यहां हम आपको बताते चलें कि ए आर रहमान का परिवार और खुद ए आर रहमान जन्मजात इस्लामी नहीं है .उनके परिवार ने कुछ समय पहले इस्लाम तब कबूला था जब उनके पिता और उनकी बहन बहुत बीमार पड़ गए. तब एक सूफी ने उनकी तबीयत ठीक करने के नाम पर उन्हें इस्लाम का कबूलने को कहा. तभी से दिलीप कुमार से उनका नाम ए आर रहमान हो गया.

इसके बाद भी ए आर रहमान कई बार विवादों से जुड़े रहे हैं, उन्होंने अपने पिता की मौत का जिम्मेदार हिंदू देवी देवताओं को ठहराया था. उन्होंने कहा कि उनके पिता जिसे पूजते थे उसी ने उनकी जान ले ली. उनकी बहन ने भी मुस्लिम धर्म में बुर्का का समर्थन किया था और बोला था कि इससे लड़कियां सशक्त होती हैं.

एक बेहद पढ़ी-लिखी हस्ती के परिवार का किसी एक धर्म विशेष को लेकर ऐसी सोच चिंतनीय है.

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