स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से हटेंगे “मोपला विद्रोह” के 387 नाम, लड़ाई नहीं थी, था हिंदुओं का प्रचंड नरसंहार

387 names of "Moplah rebellion" will be removed from the name of freedom fighters: अभी हाल ही में भारत सरकार ने इतिहास को बदलने की तैयारी कर देखें. इसी कड़ी में भारत सरकार ने ‘मालाबार विद्रोह’ में शामिल लोगों के नाम ‘भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों’ की सूची से हटाने का फैसला लिया है. बता दें कि जिसे ‘मालाबार विद्रोह’ कहा जाता है, वो असल में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई न होकर एक हिन्दू नरसंहार था, जिसमें मप्पिला मुस्लिमों व उनके नेताओं ने मिल कर 10,000 से भी अधिक हिन्दुओं (Hindu) का नरसंहार किया था. 1921 में लगभग 6 महीनों तक ये कत्लेआम चलता रहा था. गौरतलब है कि अब ये लोग स्वतंत्रता सेनानी नहीं कहलाएँगे. मोपला नरसंहार के ऐसे 387 लोगों के नाम भारत सरकार भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों की सूची से भारत सरकार हटाएगी। इसमें कुन अहमद हाजी और अली मुस्लीयर के नाम प्रमुख हैं. भारत सरकार की डिक्शनरी के पाँचवें वॉल्यूम की तीन सदस्यीय समिति ने समीक्षा की थी. ‘इंडियन काउंसिल फॉर हिस्टॉरिकल रिसर्च (ICHR)’ ने इन लोगों के नाम हटाने की सिफारिश की थी. https://twitter.com/ippatel/status/1429694829294866435 इस समिति का मानना है कि ‘मालाबार विद्रोह’ कभी अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध था ही नहीं, बल्कि ये एक कट्टरवादी आंदोलन था जिसका मुख्य उद्देश्य इस्लामी धर्मांतरण था. समिति ने नोट किया कि इस पूरे ‘विद्रोह’ के दौरान ऐसे कोई भी नारे नहीं लगाए गए, जो राष्ट्रवादी हों या फिर अंग्रेज विरोधी हों. हाल ही में RSS नेता राम माधव ने भी कहा था कि ये भारत में तालिबानी मानसिकता का पहला आंदोलन था. बता दें कि इससे पहले सितंबर 2020 में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने इस डिक्शनरी को वापस ले लिया था. लोगों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के बीच मोपला नरसंहार के दोषियों का नाम जोड़े जाने का विरोध किया था. इसे वेबसाइट से हटा लिया गया था. पूरे पाँचवें वॉल्यूम को सरकारी वेबसाइट से हटा लिया था. साल 1921 में केरल में हुए हिंदुओं के नरसंहार के लिए जिम्मेदार वरियमकुन्नथु कुंजाहम्मद हाजी की जिंदगी पर आधारित फिल्म भी बनने वाली है. गौरतलब है की वरियमकुन्नथु या चक्कीपरांबन वरियामकुन्नथु कुंजाहम्मद हाजी, वही शख्स है जो खुद को ‘अरनद का सुल्तान’ कहता था. उस समय उसी क्षेत्र का सुल्तान जहाँ सैंकड़ों मोपला हिंदुओं का नरसंहार हुआ. जहाँ इस्लामिक ताकतों ने मिलकर लूटपाट की और अंग्रेजों के ख़िलाफ़ विद्रोह की आड़ में हिंदुओं का रक्तपात किया। मगर, फिर भी, उन आतताइयों के उस चेहरे को छिपाने के लिए इतिहास के पन्नों में उन्हें मोपला के विद्रोहियों का नाम दिया गया.
 

स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से हटेंगे “मोपला विद्रोह” के 387 नाम, लड़ाई नहीं थी, था हिंदुओं का प्रचंड नरसंहार

387 names of "Moplah rebellion" will be removed from the name of freedom fighters: अभी हाल ही में भारत सरकार ने इतिहास को बदलने की तैयारी कर देखें. इसी कड़ी में भारत सरकार ने ‘मालाबार विद्रोह’ में शामिल लोगों के नाम ‘भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों’ की सूची से हटाने का फैसला लिया है. बता दें कि जिसे ‘मालाबार विद्रोह’ कहा जाता है, वो असल में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई न होकर एक हिन्दू नरसंहार था, जिसमें मप्पिला मुस्लिमों व उनके नेताओं ने मिल कर 10,000 से भी अधिक हिन्दुओं ( Hindu) का नरसंहार किया था. 1921 में लगभग 6 महीनों तक ये कत्लेआम चलता रहा था. गौरतलब है कि अब ये लोग स्वतंत्रता सेनानी नहीं कहलाएँगे. मोपला नरसंहार के ऐसे 387 लोगों के नाम भारत सरकार भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों की सूची से भारत सरकार हटाएगी। इसमें कुन अहमद हाजी और अली मुस्लीयर के नाम प्रमुख हैं. भारत सरकार की डिक्शनरी के पाँचवें वॉल्यूम की तीन सदस्यीय समिति ने समीक्षा की थी. ‘इंडियन काउंसिल फॉर हिस्टॉरिकल रिसर्च ( ICHR)’ ने इन लोगों के नाम हटाने की सिफारिश की थी. https://twitter.com/ippatel/status/1429694829294866435 इस समिति का मानना है कि ‘मालाबार विद्रोह’ कभी अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध था ही नहीं, बल्कि ये एक कट्टरवादी आंदोलन था जिसका मुख्य उद्देश्य इस्लामी धर्मांतरण था. समिति ने नोट किया कि इस पूरे ‘विद्रोह’ के दौरान ऐसे कोई भी नारे नहीं लगाए गए, जो राष्ट्रवादी हों या फिर अंग्रेज विरोधी हों. हाल ही में RSS नेता राम माधव ने भी कहा था कि ये भारत में तालिबानी मानसिकता का पहला आंदोलन था. बता दें कि इससे पहले सितंबर 2020 में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने इस डिक्शनरी को वापस ले लिया था. लोगों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के बीच मोपला नरसंहार के दोषियों का नाम जोड़े जाने का विरोध किया था. इसे वेबसाइट से हटा लिया गया था. पूरे पाँचवें वॉल्यूम को सरकारी वेबसाइट से हटा लिया था. साल 1921 में केरल में हुए हिंदुओं के नरसंहार के लिए जिम्मेदार वरियमकुन्नथु कुंजाहम्मद हाजी की जिंदगी पर आधारित फिल्म भी बनने वाली है. गौरतलब है की वरियमकुन्नथु या चक्कीपरांबन वरियामकुन्नथु कुंजाहम्मद हाजी, वही शख्स है जो खुद को ‘अरनद का सुल्तान’ कहता था. उस समय उसी क्षेत्र का सुल्तान जहाँ सैंकड़ों मोपला हिंदुओं का नरसंहार हुआ. जहाँ इस्लामिक ताकतों ने मिलकर लूटपाट की और अंग्रेजों के ख़िलाफ़ विद्रोह की आड़ में हिंदुओं का रक्तपात किया। मगर, फिर भी, उन आतताइयों के उस चेहरे को छिपाने के लिए इतिहास के पन्नों में उन्हें मोपला के विद्रोहियों का नाम दिया गया.