चिन्मयानंद स्वामी ने सामने आकर खुद माफी मांगी और अपनी गलती भी स्वीकार की, क्यों ?

देश में सेकुलरिज्म का यह हाल है कि इन दिनों खुद को संत महात्मा कह कर चलने वाले बहुत से लोग राम कथा भागवत कथा के मंच से अली मौला अल्लाह सुभान अल्लाह गा रहे हैं! हमारा समाज भी इनको कुछ हद तक ही सहन करता है! जिसके चलते सोशल मीडिया पर अब लगातार इनकी आलोचना की जा रही है इन कथित संतों के वीडियो वायरल किए जा रहे हैं! इन्हीं में से एक है चिन्मयानंद स्वामी जोकि कथा वाचक है जो भागवत कथा के मंच से अल्लाह मोला गा रहे थे जिनकी लोगों ने आलोचना की है! जैसे ही सोशल मीडिया पर आलोचना होने लगी तो उन्होंने सामने आकर खुद माफी मांगी और अपनी गलती भी स्वीकार की! [embed]https://twitter.com/SureshChavhanke/status/1264243518148620293[/embed] इससे पहले भारतीय अखिल अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी का कहना है कि सनातन धर्म में व्यासपीठ को पूजनीय माना गया है! न्होंने यह भी कहा है कि कथा के मंचों से अल्लाह और मोला का नाम नहीं ले जाने की परंपरा हमेशा रही है इसलिए जो कथावाचक ऐसा करते हैं वह सरासर गलत कर रहे हैं! ऐसे करने से सनातन धर्म को हानि हो रही है इसलिए अखाड़ा परिषद ऐसे कृतियों का समर्थन नहीं करता है!
 

चिन्मयानंद स्वामी ने सामने आकर खुद माफी मांगी और अपनी गलती भी स्वीकार की, क्यों ?

देश में सेकुलरिज्म का यह हाल है कि इन दिनों खुद को संत महात्मा कह कर चलने वाले बहुत से लोग राम कथा भागवत कथा के मंच से अली मौला अल्लाह सुभान अल्लाह गा रहे हैं! हमारा समाज भी इनको कुछ हद तक ही सहन करता है! जिसके चलते सोशल मीडिया पर अब लगातार इनकी आलोचना की जा रही है इन कथित संतों के वीडियो वायरल किए जा रहे हैं! इन्हीं में से एक है चिन्मयानंद स्वामी जोकि कथा वाचक है जो भागवत कथा के मंच से अल्लाह मोला गा रहे थे जिनकी लोगों ने आलोचना की है! जैसे ही सोशल मीडिया पर आलोचना होने लगी तो उन्होंने सामने आकर खुद माफी मांगी और अपनी गलती भी स्वीकार की! [embed]https://twitter.com/SureshChavhanke/status/1264243518148620293[/embed] इससे पहले भारतीय अखिल अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी का कहना है कि सनातन धर्म में व्यासपीठ को पूजनीय माना गया है! न्होंने यह भी कहा है कि कथा के मंचों से अल्लाह और मोला का नाम नहीं ले जाने की परंपरा हमेशा रही है इसलिए जो कथावाचक ऐसा करते हैं वह सरासर गलत कर रहे हैं! ऐसे करने से सनातन धर्म को हानि हो रही है इसलिए अखाड़ा परिषद ऐसे कृतियों का समर्थन नहीं करता है!