NHM के नाम पर महाराष्ट्र में 400 करोड़ रुपये का हुआ भ्रष्टाचार: फडणवीस

केंद्र सरकार की योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संविदा कर्मचारियों को स्थायी करने के लिए महा अघाड़ी गठबंधन की सरकार पर लगभग 300-400 करोड़ रिश्वत लेने का आरोप महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस द्वारा लगाया गया हैं. देवेंद्र फडणवीस ने इस ट्वीट में एक पत्र को जारी किया हैं और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को टैग भी किया हैं. यह पत्र और ट्वीट दोनों ही मराठी भाषा में लिखे हुए हैं. हम आपके लिए इस ट्वीट और पत्र को निचे हिंदी में ट्रांसलेट कर रहें हैं. जिससे आपको इस भ्रष्टाचार से जुड़ा पूरा मामला समझने में आसानी होगी. देवेंद्र फडणवीस द्वारा पत्र को ट्वीट करते हुए लिखा गया है की, "एनएचएम कर्मचारियों को स्थायी करने के लिए किया जा रहा यह भ्रष्टाचार 300-400 करोड़ रुपये तक का है. कुछ राज्य मंत्रियों ने पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत संविदा कर्मियों को स्थायी करने का आश्वासन दिया था." इस पत्र में देवेंद्र फडणवीस लिखते हैं की, "इस तरह की टिप्पणियों के बाद कुछ ऑडियो क्लिप सामने आए हैं, जिनमें कुछ लोग कर्मचारी को स्थायी करने के लिए एक लाख से 2.5 लाख रुपये तक की मांग कर रहे हैं. यह घोटाला 300 करोड़ रुपये से 400 करोड़ रुपये तक का है. राज्य में करीब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्य में लगभग 20,000 संविदा कर्मी हैं. कई लोगों ने रिश्वत चुकाने के लिए कर्ज तक लिया है ताकि उन्हें स्थायी नौकरी मिल सके." इस पत्र में वह आगे लिखते हैं की, "मैं अपने पत्र के साथ तीन ऑडियो क्लिप भेज रहा हूं जिनमें रिश्वत को लेकर हुई कथित बातचीत रिकॉर्ड की गई है. इस मामले में सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और इसमें शामिल किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाना चाहिए. अगर इस एक मिशन में इतना भ्रष्टाचार है तो कल्पना करिए की राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अन्य क्षेत्रों में कितना भ्रष्टाचार हो सकता है." विपक्षी नेता होने के नाते अपने कर्तव्य का पालन करते हुए देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को इस भ्रस्टाचार से अवगत तो करवा दिया हैं. लेकिन देखना यह होगा की क्या उद्धव ठाकरे इसकी जांच करवा कर इस कथित भ्रस्टाचार के असल दोषियों तक पहुँचना चाहेंगे या फिर वह अपनी सरकार बचाने के लिए इसे राजनितिक आरोप बताते हुए मामले को रफा-दफा कर देंगे.
 

NHM के नाम पर महाराष्ट्र में 400 करोड़ रुपये का हुआ भ्रष्टाचार: फडणवीस

केंद्र सरकार की योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संविदा कर्मचारियों को स्थायी करने के लिए महा अघाड़ी गठबंधन की सरकार पर लगभग 300-400 करोड़ रिश्वत लेने का आरोप महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस द्वारा लगाया गया हैं. NHM के नाम पर महाराष्ट्र में 400 करोड़ रुपये का हुआ भ्रष्टाचार: फडणवीस देवेंद्र फडणवीस ने इस ट्वीट में एक पत्र को जारी किया हैं और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को टैग भी किया हैं. यह पत्र और ट्वीट दोनों ही मराठी भाषा में लिखे हुए हैं. हम आपके लिए इस ट्वीट और पत्र को निचे हिंदी में ट्रांसलेट कर रहें हैं. जिससे आपको इस भ्रष्टाचार से जुड़ा पूरा मामला समझने में आसानी होगी. देवेंद्र फडणवीस द्वारा पत्र को ट्वीट करते हुए लिखा गया है की, "एनएचएम कर्मचारियों को स्थायी करने के लिए किया जा रहा यह भ्रष्टाचार 300-400 करोड़ रुपये तक का है. कुछ राज्य मंत्रियों ने पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत संविदा कर्मियों को स्थायी करने का आश्वासन दिया था." इस पत्र में देवेंद्र फडणवीस लिखते हैं की, "इस तरह की टिप्पणियों के बाद कुछ ऑडियो क्लिप सामने आए हैं, जिनमें कुछ लोग कर्मचारी को स्थायी करने के लिए एक लाख से 2.5 लाख रुपये तक की मांग कर रहे हैं. यह घोटाला 300 करोड़ रुपये से 400 करोड़ रुपये तक का है. राज्य में करीब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्य में लगभग 20,000 संविदा कर्मी हैं. कई लोगों ने रिश्वत चुकाने के लिए कर्ज तक लिया है ताकि उन्हें स्थायी नौकरी मिल सके." इस पत्र में वह आगे लिखते हैं की, "मैं अपने पत्र के साथ तीन ऑडियो क्लिप भेज रहा हूं जिनमें रिश्वत को लेकर हुई कथित बातचीत रिकॉर्ड की गई है. इस मामले में सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और इसमें शामिल किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाना चाहिए. अगर इस एक मिशन में इतना भ्रष्टाचार है तो कल्पना करिए की राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अन्य क्षेत्रों में कितना भ्रष्टाचार हो सकता है." NHM के नाम पर महाराष्ट्र में 400 करोड़ रुपये का हुआ भ्रष्टाचार: फडणवीस विपक्षी नेता होने के नाते अपने कर्तव्य का पालन करते हुए देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को इस भ्रस्टाचार से अवगत तो करवा दिया हैं. लेकिन देखना यह होगा की क्या उद्धव ठाकरे इसकी जांच करवा कर इस कथित भ्रस्टाचार के असल दोषियों तक पहुँचना चाहेंगे या फिर वह अपनी सरकार बचाने के लिए इसे राजनितिक आरोप बताते हुए मामले को रफा-दफा कर देंगे.