इन 3 वजहों के चलते महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा की वापसी

हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए सोमवार 21 अक्टूबर को मतदान हुआ। लोग अपने घरों से निकलकर वोट करने पहुंचे और दोनों ही राज्यों में मतदान 60 फीसदी के आंकड़े को पार कर गया। मुंबई में तो फिल्मी सितारों ने भी अपना समय निकालकर मतदान किया। दोनों ही राज्यों के लिए चैनलों के एग्जिट पोल के नतीजे भी सामने आ गए हैं। महाराष्ट्र की 288 सीटें हों या हरियाणा की 90 सीटें हों, दोनों ही राज्यों में एग्जिट पोल में भाजपा बाजी मारती दिख रही है। हम आपको तीन वजह बताते हैं जिन कारणों से दोनों ही राज्यों में भाजपा धमाकेदार वापसी करती दिख रही है। सर्वे में भारतीय जनता पार्टी की वापसी की पहली वजह वहां के स्थानीय मुद्दों का गौण रहना है। भाजपा ने बड़ी समझदारी से दोनों ही राज्यों में राष्ट्रवाद का मुद्दा हावी कर दिया। वहीं कांग्रेस इस मुद्दे को भुना नहीं सकी और भाजपा सर्वे में बाजी मारती दिख रही है। दोनों ही राज्यों में भारतीय जनता पार्टी ने अपना संकल्प पत्र पेश किया वो कांग्रेस पर भारी पड़ा। इसका प्रचार करने में भी भाजपा ने अपने बड़े-बड़े नेताओं को लगा दिया। दूसरी ओर कांग्रेस इस मामले में भी पिछड़ गई और राहुल हों या सोनिया गांधी, अपने घोषणापत्र का प्रचार नहीं करवा सके। भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर लोकसभा चुनाव 2019 वाला दांव दोनों ही राज्यों में चला। ये मुद्दा पाकिस्तान और कश्मीर का था जिसका प्रचार खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने किया और वोटरों को लुभाया। इस दांव के आगे कांग्रेस और एनसीपी उबर नहीं सके।
 

इन 3 वजहों के चलते महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा की वापसी

हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए सोमवार 21 अक्टूबर को मतदान हुआ। लोग अपने घरों से निकलकर वोट करने पहुंचे और दोनों ही राज्यों में मतदान 60 फीसदी के आंकड़े को पार कर गया। मुंबई में तो फिल्मी सितारों ने भी अपना समय निकालकर मतदान किया। दोनों ही राज्यों के लिए चैनलों के एग्जिट पोल के नतीजे भी सामने आ गए हैं। महाराष्ट्र की 288 सीटें हों या हरियाणा की 90 सीटें हों, दोनों ही राज्यों में एग्जिट पोल में भाजपा बाजी मारती दिख रही है। हम आपको तीन वजह बताते हैं जिन कारणों से दोनों ही राज्यों में भाजपा धमाकेदार वापसी करती दिख रही है। सर्वे में भारतीय जनता पार्टी की वापसी की पहली वजह वहां के स्थानीय मुद्दों का गौण रहना है। भाजपा ने बड़ी समझदारी से दोनों ही राज्यों में राष्ट्रवाद का मुद्दा हावी कर दिया। वहीं कांग्रेस इस मुद्दे को भुना नहीं सकी और भाजपा सर्वे में बाजी मारती दिख रही है। दोनों ही राज्यों में भारतीय जनता पार्टी ने अपना संकल्प पत्र पेश किया वो कांग्रेस पर भारी पड़ा। इसका प्रचार करने में भी भाजपा ने अपने बड़े-बड़े नेताओं को लगा दिया। दूसरी ओर कांग्रेस इस मामले में भी पिछड़ गई और राहुल हों या सोनिया गांधी, अपने घोषणापत्र का प्रचार नहीं करवा सके। भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर लोकसभा चुनाव 2019 वाला दांव दोनों ही राज्यों में चला। ये मुद्दा पाकिस्तान और कश्मीर का था जिसका प्रचार खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने किया और वोटरों को लुभाया। इस दांव के आगे कांग्रेस और एनसीपी उबर नहीं सके।