आरजेडी में अंदरूनी कलह, पार्टी अध्यक्ष पर भड़के तेज प्रताप, बिहार बीजेपी ने ली चुटकी

Bihar BJP took a jibe: बिहार की प्रमुख पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) एक बार फिर अंदरूनी कलह से जूझ रही है. पार्टी के मुखिया लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के बयानों से पार्टी के भीतर नेताओं में नाराजगी बढ़ रही है. वहीं लालू यादव के दूसरे बेटे तेजस्वी यादव भी दूरियां बना रहे हैं. दोनों के बीच वर्चस्व को लेकर मनमुटाव की खबरें इस समय मीडिया में आ रही हैं. इधर, भाजपा (BJP) ने पार्टी में खटपट को लेकर राजद और तेज प्रताप (Tej Pratap) पर चुटकी ली है. बिहार भाजपा ने आरजेडी को नसीहत देते हुए कहा कि तेज प्रताप को कम से कम पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष ही बना दिया जाए. तेज प्रताप या मीसा भारती को दे राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी बिहार, भाजपा नेता के प्रमुख नेता अरविंद कुमार सिंह ने चुटकी लेते हुए कहा कि तेज प्रताप के साथ नाइंसाफी हुई और लालू यादव का बड़ा बेटा होने के नाते उन्हें ही बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष होना चाहिए था. क्योंकि तेज प्रताप बिहार की जनता को अपनी संपत्ति समझते हैं, लेकिन लालू यादव ने तेज प्रताप के साथ नाइंसाफी की है. इसलिए अब इंसाफ करते हुए उन्हें राजद का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए या फिर मीसा भारती को पार्टी की कमान दे देनी चाहिए. तेजप्रताप के बयान की निंदा की - गौरतलब है की भाजपा नेता अरविंद सिंह ने तेज प्रताप के हिटलर वाले बयान की निंदा की. अरविंद सिंह ने अपने बयान में कहा कि तेज प्रताप को ऐसा नहीं बोलना चाहिए था. जगदानंद सिंह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं, तेज प्रताप का उनके खिलाफ बयान देना उचित नहीं है. प्रदेश अध्यक्ष पर फूटा था तेज प्रताप का गुस्सा बता दें कि 8 अगस्त को राजद के एक कार्यक्रम में तेज प्रताप यादव ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह पर निशाना साधते हुए उन्हें हिटलर तक कह डाला. तेज प्रताप ने कहा कि जगदानंद सिंह सब जगह जाकर हिटलर की तरह बोलते हैं. पार्टी कार्यालय का मेन गेट अध्यक्ष की मर्जी से खुलता और बंद होता है. पिताजी के समय दरवाजा हमेशा खुला रहता था, लेकिन उनके जाने के बाद बहुत लोगों ने मनमानी शुरू कर दी है. तेज प्रताप यहीं तक नहीं रुके. उन्होंने जगदानंद सिंह को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि कुर्सी किसी की बपौती नहीं होती है . अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी के बीच अंदरूनी कलह और अध्य्क्ष के प्रति यह विरोधभास बिहार की राजनीति में क्या परिवर्तन लाता है?
 

आरजेडी में अंदरूनी कलह, पार्टी अध्यक्ष पर भड़के तेज प्रताप, बिहार बीजेपी ने ली चुटकी

Bihar BJP took a jibe: बिहार की प्रमुख पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ( RJD) एक बार फिर अंदरूनी कलह से जूझ रही है. पार्टी के मुखिया लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के बयानों से पार्टी के भीतर नेताओं में नाराजगी बढ़ रही है. वहीं लालू यादव के दूसरे बेटे तेजस्वी यादव भी दूरियां बना रहे हैं. दोनों के बीच वर्चस्व को लेकर मनमुटाव की खबरें इस समय मीडिया में आ रही हैं. इधर,  भाजपा ( BJP) ने पार्टी में  खटपट को लेकर राजद और तेज प्रताप ( Tej Pratap) पर चुटकी ली है. बिहार भाजपा ने आरजेडी को नसीहत देते हुए कहा कि तेज प्रताप को कम से कम पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष ही बना दिया जाए.

तेज प्रताप या मीसा भारती को दे राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी

बिहार, भाजपा नेता के प्रमुख नेता अरविंद कुमार सिंह ने चुटकी लेते हुए कहा कि तेज प्रताप के साथ नाइंसाफी हुई और लालू यादव का बड़ा बेटा होने के नाते उन्हें ही बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष होना चाहिए था. क्योंकि तेज प्रताप बिहार की जनता को अपनी संपत्ति समझते हैं, लेकिन लालू यादव ने तेज प्रताप के साथ नाइंसाफी की है.  इसलिए अब इंसाफ करते हुए उन्हें राजद का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए या फिर मीसा भारती को पार्टी की कमान दे देनी चाहिए.

तेजप्रताप के बयान की निंदा की -

गौरतलब है की भाजपा नेता अरविंद सिंह ने तेज प्रताप के हिटलर वाले बयान की निंदा की. अरविंद सिंह ने अपने बयान में कहा कि तेज प्रताप को ऐसा नहीं बोलना चाहिए था. जगदानंद सिंह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं, तेज प्रताप का उनके खिलाफ बयान देना उचित नहीं है.

प्रदेश अध्यक्ष पर फूटा था तेज प्रताप का गुस्सा

बता दें कि 8 अगस्त को राजद के एक कार्यक्रम में तेज प्रताप यादव ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह पर निशाना साधते हुए उन्हें हिटलर तक कह डाला. तेज प्रताप ने कहा कि जगदानंद सिंह सब जगह जाकर हिटलर की तरह बोलते हैं.  पार्टी कार्यालय का मेन गेट अध्यक्ष की मर्जी से खुलता और बंद होता है. पिताजी के समय दरवाजा हमेशा खुला रहता था, लेकिन उनके जाने के बाद बहुत लोगों ने मनमानी शुरू कर दी है. तेज प्रताप यहीं तक नहीं रुके. उन्होंने जगदानंद सिंह को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि कुर्सी किसी की बपौती नहीं होती है . अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी के बीच अंदरूनी कलह और अध्य्क्ष के प्रति यह विरोधभास बिहार की राजनीति में क्या परिवर्तन लाता है?