हिन्दुओ की बड़ी जीत,भगवान जगन्नाथ यात्रा पर लग गई थी रोक,सुप्रीम कोर्ट ने दे दी इजाजत…

पूरी में होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा पर जो रोक लगाई गई थी उसको सुप्रीम कोर्ट ने हटा दिया है! पूरी में भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक व ऐतिहासिक रथ यात्रा 23 जून को निकलेगी। मंदिर कमिटी, राज्य व केंद्र सरकार को समन्वय बना कर सुप्रीम कोर्ट ने इस रथ यात्रा को करने की अनुमति दी है! [embed]https://twitter.com/ANI/status/1275015852505481216[/embed] 22 जून को ओडिशा के पूरी में जो जगन्नाथ यात्रा पर जो रोक लगाई थी उसपर सुनवाई की और यात्रा पर लगी रोक उठा दिया।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र की तरफ से विशेष उल्लेख किया है। जनरल तुषार मेहता ने रथयात्रा पर अनुमति देने का अनुरोध भी किया। तुषार मेहता का कहना है कि भगवान जगन्नाथ यात्रा की रीत सदियों पुराणी है और इस यात्रा को रोकना अच्छा नहीं होगा। हमे इस यात्रा को रोकना नहीं चाहिए।उनका कहना है कि कोर्ट को कुछ नियमो आदेशों के साथ यात्रा की अनुमति देनी चाहिए। [embed]https://twitter.com/LiveLawIndia/status/1275006706628669441[/embed] जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने वाले मामले में कहा कि यह कोई आम चीज नहीं लाखो करोड़ो लोगो की आस्था का मामला है! कल के दिन अगर भगवान जगन्नाथ को बाहर नहीं निकाला गया तो आगे उन्हें परम्परा के तहत 12 साल तक बाहर नहीं निकाला जाएगा।मुख्य न्यायधीश भी दोपहर बाद इस पीठ की चल रही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जुड़ गए। जनरल तुषार मेहता का कहना है, कि जगन्नाथ यात्रा में केवल उन लोगो को आने की अनुमति दी जाए जिनका कोरोना टेस्ट नेगेटिव आया हो और जो जगन्नाथ मंदिर में सेवा कर रहे है! यात्रा में ज्यादा भीड़ इकठा न हो इसलिए कर्फ्यू लगा दिया जाए। कोर्ट के द्वारा नियमो आदेशों के साथ जन भागीदारी के बिना रथ यात्रा को सम्पूर्ण किया जा सकता है! [embed]https://twitter.com/indiccollective/status/1274941550745677829[/embed] वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने भी जगन्नाथ यात्रा का समर्थन किया है! हरीश साल्वे का कहना है कि अगर याचिकाकर्ता पूरे एहतियात साथ अगर रथयात्रा को आयोजित किया जाए तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है जस्टिस मिश्रा का कहना है, कि वह सभी मामलों की सुनवाई के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श लेकर आदेश में संशोधन के मामले पर विचार करेंगे। [embed]https://twitter.com/indiccollective/status/1274942571458879489[/embed] नागपुर से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस मामले की सुनवाई में जुड़े। CJI ने ही संशोधन की माँग वाले चल रहे 18 जून वाले मामले की अध्यक्षता की जाएगी। [embed]https://twitter.com/LiveLawIndia/status/1274947486092853248[/embed] कोरोना महामारी की वजह से पहले 18 जून को 23 जून को पुरी (ओडिशा) में होने वाली जगन्नाथ यात्रा पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अगर उन्होंने यात्रा की अनुमति नहीं दी तो भगवान जगन्नाथ उन्हें कभी माफ़ नहीं करेंगे। राजा गजपति दिब्यसिंह ने भी 20 जून को मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को पत्र लिखकर कहा कि वो भी सुप्रीम कोर्ट से जगन्नाथ यात्रा का का रूख करने की अपील करे। दिब्यसिंह देब के कहने के अनुसार भाजपा ने भी जगन्नाथ यात्रा कराने की अपील की। उनका कहना है, कि ओडिशा सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए। भुवनेश्वर के ओडिशा विकास परिषद एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखा जिसमे उन्होंने कहा की इस यात्रा की वजह से कोरोना महामारी को भी बढ़ावा मिल सकता है! उनका कहना है कि अगर महामारी की वजह से दिवाली के पर्व पर पटाखे जलाने पर रोक लगाई जा सकती है तो रथ यात्रा क्यों नहीं।
 

हिन्दुओ की बड़ी जीत,भगवान जगन्नाथ यात्रा पर लग गई थी रोक,सुप्रीम कोर्ट ने दे दी इजाजत…

पूरी में होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा पर जो रोक लगाई गई थी उसको सुप्रीम कोर्ट ने हटा दिया है! पूरी में भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक व ऐतिहासिक रथ यात्रा 23 जून को निकलेगी। मंदिर कमिटी, राज्य व केंद्र सरकार को समन्वय बना कर सुप्रीम कोर्ट ने इस रथ यात्रा को करने की अनुमति दी है! [embed]https://twitter.com/ANI/status/1275015852505481216[/embed] 22 जून को ओडिशा के पूरी में जो जगन्नाथ यात्रा पर जो रोक लगाई थी उसपर सुनवाई की और यात्रा पर लगी रोक उठा दिया।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र की तरफ से विशेष उल्लेख किया है। जनरल तुषार मेहता ने रथयात्रा पर अनुमति देने का अनुरोध भी किया। तुषार मेहता का कहना है कि भगवान जगन्नाथ यात्रा की रीत सदियों पुराणी है और इस यात्रा को रोकना अच्छा नहीं होगा। हमे इस यात्रा को रोकना नहीं चाहिए।उनका कहना है कि कोर्ट को कुछ नियमो आदेशों के साथ यात्रा की अनुमति देनी चाहिए। [embed]https://twitter.com/LiveLawIndia/status/1275006706628669441[/embed] जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने वाले मामले में कहा कि यह कोई आम चीज नहीं लाखो करोड़ो लोगो की आस्था का मामला है! कल के दिन अगर भगवान जगन्नाथ को बाहर नहीं निकाला गया तो आगे उन्हें परम्परा के तहत 12 साल तक बाहर नहीं निकाला जाएगा।मुख्य न्यायधीश भी दोपहर बाद इस पीठ की चल रही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जुड़ गए। जनरल तुषार मेहता का कहना है, कि जगन्नाथ यात्रा में केवल उन लोगो को आने की अनुमति दी जाए जिनका कोरोना टेस्ट नेगेटिव आया हो और जो जगन्नाथ मंदिर में सेवा कर रहे है! यात्रा में ज्यादा भीड़ इकठा न हो इसलिए कर्फ्यू लगा दिया जाए। कोर्ट के द्वारा नियमो आदेशों के साथ जन भागीदारी के बिना रथ यात्रा को सम्पूर्ण किया जा सकता है! [embed]https://twitter.com/indiccollective/status/1274941550745677829[/embed] वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने भी जगन्नाथ यात्रा का समर्थन किया है! हरीश साल्वे का कहना है कि अगर याचिकाकर्ता पूरे एहतियात साथ अगर रथयात्रा को आयोजित किया जाए तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है जस्टिस मिश्रा का कहना है, कि वह सभी मामलों की सुनवाई के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श लेकर आदेश में संशोधन के मामले पर विचार करेंगे। [embed]https://twitter.com/indiccollective/status/1274942571458879489[/embed] नागपुर से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस मामले की सुनवाई में जुड़े। CJI ने ही संशोधन की माँग वाले चल रहे 18 जून वाले मामले की अध्यक्षता की जाएगी। [embed]https://twitter.com/LiveLawIndia/status/1274947486092853248[/embed] कोरोना महामारी की वजह से पहले 18 जून को 23 जून को पुरी (ओडिशा) में होने वाली जगन्नाथ यात्रा पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अगर उन्होंने यात्रा की अनुमति नहीं दी तो भगवान जगन्नाथ उन्हें कभी माफ़ नहीं करेंगे। राजा गजपति दिब्यसिंह ने भी 20 जून को मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को पत्र लिखकर कहा कि वो भी सुप्रीम कोर्ट से जगन्नाथ यात्रा का का रूख करने की अपील करे। दिब्यसिंह देब के कहने के अनुसार भाजपा ने भी जगन्नाथ यात्रा कराने की अपील की। उनका कहना है, कि ओडिशा सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए। भुवनेश्वर के ओडिशा विकास परिषद एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखा जिसमे उन्होंने कहा की इस यात्रा की वजह से कोरोना महामारी को भी बढ़ावा मिल सकता है! उनका कहना है कि अगर महामारी की वजह से दिवाली के पर्व पर पटाखे जलाने पर रोक लगाई जा सकती है तो रथ यात्रा क्यों नहीं।