समाज ने बहिष्कार किया उसके बाद भी कासमी ने नही छोड़ा BJP का साथ,अब मिला इनाम

भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के नव मनोनीत राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुफ्ती अब्दुल वहाब कासमी का पार्टी और समाज के बीच का सफर कांटे दार राहों जैसा रहा है. वर्ष 1999 में पार्टी में शामिल होने के साथ, कासमी को समाज और रिश्तेदारों के विरोध का सामना करना पड़ा। राजद के मजबूत मुस्लिम चेहरे सीमांचल में पूर्व केंद्रीय मंत्री तस्लीमुद्दीन का वोट बैंक खींच लिया गया और बीजेपी को ऊंचाइयों पर ले जाने का काम किया. हालांकि इसका खामियाजा कासमी को भी भुगतना पड़ा। उन्हें लंबे समय तक सामाजिक बहिष्कार के साथ-साथ कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। तमाम मुश्किलों से निकलकर पार्टी में उन्हें यह मुकाम हासिल हुआ है। अररिया जिले के जोकीहाट थाना क्षेत्र के दूबा गांव निवासी वहाब खंटी से लेकर अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष तक भाजपा कार्यकर्ता रह चुके हैं. अररिया के भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप झा ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दी थी, जिसके लिए वे आभार व्यक्त करते रहे हैं. कासमी के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और बिहार के उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन से प्रभावित होकर वह बीजेपी में शामिल हुए. अब एक ही लक्ष्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ-सबका विकास के माध्यम से पार्टी को सौंपी गई जिम्मेदारी का निर्वहन करना। वह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल, विधान परिषद में पार्टी के उप मुख्य सचेतक दिलीप जायसवाल के प्रशंसक हैं। पार्टी की जीत के लिए अल्पसंख्यकों के बीच काम करने का मौका: कासमी का कहना है कि बीजेपी ही एक ऐसी पार्टी है जिसमें शीर्ष पद की जिम्मेदारी एक सामान्य कार्यकर्ता को सौंपी जाती है. कार्यकर्ताओं की मेहनत रंग ला रही है। वह खुद को इसका उदाहरण मानते हैं। कहा जाता है कि जब उन्होंने बीजेपी के लिए काम करने का फैसला किया तो समाज में काफी विरोध हुआ. दावत और निकाह जैसे आयोजनों में भी उन्हें मना किया गया था, लेकिन वह अपनी प्रतिबद्धता पर कायम रहे। अब सब कुछ सामान्य हो गया है। पार्टी में एक मील का पत्थर भी हासिल किया है। इस बीच बिहार से लेकर राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक के विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए बड़ी भूमिका निभाने का मौका मिला. बिहार में लोकसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, नित्यानंद राय, अश्विनी चौबे, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधा मोहन सिंह और अररिया के सांसद प्रदीप सिंह जैसे कई सांसदों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पार्टी ने उन्हें अल्पसंख्यक समाज के बीच काम करने को कहा- इसके लिए वह पार्टी के आभारी हैं। प्रोफ़ाइल कासमी उत्तर प्रदेश भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के सह प्रभारी होने के अलावा बिहार भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष और उपाध्यक्ष रह चुके हैं। वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय वक्फ परिषद के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के दारुल उलूम देवबंद से मुफ्ती और फाजिल की उपाधि प्राप्त की। वह एक समय बिहार हज कमेटी के सदस्य भी थे।
 

समाज ने बहिष्कार किया उसके बाद भी कासमी ने नही छोड़ा BJP का साथ,अब मिला इनाम

भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के नव मनोनीत राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुफ्ती अब्दुल वहाब कासमी का पार्टी और समाज के बीच का सफर कांटे दार राहों जैसा रहा है. वर्ष 1999 में पार्टी में शामिल होने के साथ, कासमी को समाज और रिश्तेदारों के विरोध का सामना करना पड़ा। राजद के मजबूत मुस्लिम चेहरे सीमांचल में पूर्व केंद्रीय मंत्री तस्लीमुद्दीन का वोट बैंक खींच लिया गया और बीजेपी को ऊंचाइयों पर ले जाने का काम किया. हालांकि इसका खामियाजा कासमी को भी भुगतना पड़ा। उन्हें लंबे समय तक सामाजिक बहिष्कार के साथ-साथ कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। तमाम मुश्किलों से निकलकर पार्टी में उन्हें यह मुकाम हासिल हुआ है। अररिया जिले के जोकीहाट थाना क्षेत्र के दूबा गांव निवासी वहाब खंटी से लेकर अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष तक भाजपा कार्यकर्ता रह चुके हैं. अररिया के भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप झा ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दी थी, जिसके लिए वे आभार व्यक्त करते रहे हैं. कासमी के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और बिहार के उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन से प्रभावित होकर वह बीजेपी में शामिल हुए. अब एक ही लक्ष्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ-सबका विकास के माध्यम से पार्टी को सौंपी गई जिम्मेदारी का निर्वहन करना। वह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल, विधान परिषद में पार्टी के उप मुख्य सचेतक दिलीप जायसवाल के प्रशंसक हैं।

पार्टी की जीत के लिए अल्पसंख्यकों के बीच काम करने का मौका:

कासमी का कहना है कि बीजेपी ही एक ऐसी पार्टी है जिसमें शीर्ष पद की जिम्मेदारी एक सामान्य कार्यकर्ता को सौंपी जाती है. कार्यकर्ताओं की मेहनत रंग ला रही है। वह खुद को इसका उदाहरण मानते हैं। कहा जाता है कि जब उन्होंने बीजेपी के लिए काम करने का फैसला किया तो समाज में काफी विरोध हुआ. दावत और निकाह जैसे आयोजनों में भी उन्हें मना किया गया था, लेकिन वह अपनी प्रतिबद्धता पर कायम रहे। अब सब कुछ सामान्य हो गया है। पार्टी में एक मील का पत्थर भी हासिल किया है। इस बीच बिहार से लेकर राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक के विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए बड़ी भूमिका निभाने का मौका मिला. बिहार में लोकसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, नित्यानंद राय, अश्विनी चौबे, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधा मोहन सिंह और अररिया के सांसद प्रदीप सिंह जैसे कई सांसदों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पार्टी ने उन्हें अल्पसंख्यक समाज के बीच काम करने को कहा- इसके लिए वह पार्टी के आभारी हैं।

प्रोफ़ाइल

कासमी उत्तर प्रदेश भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के सह प्रभारी होने के अलावा बिहार भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष और उपाध्यक्ष रह चुके हैं। वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय वक्फ परिषद के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के दारुल उलूम देवबंद से मुफ्ती और फाजिल की उपाधि प्राप्त की। वह एक समय बिहार हज कमेटी के सदस्य भी थे।