1996 में नितीश की नज़र में आये थे आरसीपी सिंह, जिनकी बेटी है मुंगेर की SP लिपी सिंह

चुनाव से ठीक पहले बिहार में मुंगेर की घटना बीजेपी के लिए गले की हड्डी साबित हो रहा है. एक तरफ जहां बीजेपी की सहयोगी पार्टी JDU इस मामले पर चुप है वहीं बीजेपी नेता भी इस मामले पर ज्यादा कुछ नहीं बोल पा रहे. उधर विपक्ष इस घटना में ज्यादा हिन्दुवाद करके अपने मुस्लिम वोट तोडना नहीं चाहता. मुंगेर की SP का नाम आप सब जानते ही होंगे लिपी सिंह, लेकिन क्या आप जानते हैं की यह आरसीपी सिंह की बेटी हैं? जी हां वही आरसीपी सिंह जिन्होंने JDU की राजनीती चमकाने के लिए नितीश कुमार का कंधे से कन्धा मिलाकर पिछले लगभग 24 सालों से साथ दिया है. आरसीपी सिंह का इतना रुतबा है की, उनके खिलाफ न तो बीजेपी कुछ बोल पा रही है न JDU और न ही NDA से जुडी हुई अन्य पार्टियां. आरसीपी सिंह कोई आम इंसान नहीं वह खुद उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अफसर रह चुके हैं. इनका संपर्क नितीश कुमार से तब हुआ जब 1996 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के निजी सेक्रेटरी के तौर पर इन्हें ड्यूटी मिली थी. दोनों जाती कुर्मी होने के चलते इन दोनों में दोस्ती हो गयी और दोनों एक दूसरे के काम करने के तरीके से काफी प्रभावित भी हुए. नितीश कुमार जब भारत के रेल मंत्री बने तो उन्होंने आर पि सिंह को अपना सचिव बनाया. इसी तरह से नितीश और आरसीपी सिंह की जोड़ी 2005 में नितीश के बिहार में मुख्यमंत्री बनने के बाद भी देखने को मिली जब उन्होंने अपने प्रमुख सचिव का पद आरसीपी सिंह को दिया. आरसीपी सिंह, मुख्यमंत्री नितीश कुमार की आवाज़ बन चुके थे, इस तरह से धीरे धीरे पार्टी में उनका कद बढ़ता चला गया. 2010 में आरसीपी सिंह ने स्वैच्छिक रिटायरमेंट लिया और नितीश ने इनका नाम राज्यसभा के लिए आगे भेज दिया गया. उसके बाद NDA से JDU के बाहर आने की वजह भी आरसीपी सिंह ही थे, क्योंकि बीजेपी अपनी कैबिनेट में JDU को एक सीट देना चाहती थी और JDU अपने लिए दो सीट आरसीपी सिंह और ललन सिंह के लिए मांग रहे थे. JDU में प्रशांत किशोर का दबदबा बढ़ने लगा तो आरसीपी सिंह के कहने पर JDU वापिस अपने साथी NDA के साथ आ गयी. ऐसे में सवाल उठता है की, क्या उस लड़के को कभी इन्साफ मिल भी पाएगा? जो मुंगेर में पुलिस द्वारा चलायी गयी गोली का शिकार हुआ और पुलिस को गोली चलाने का आर्डर देने वाली लिपी सिंह का बाप राजनीती में इतना ऊपर उठ चूका हो जिसके खिलाफ आज दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी भी कुछ नहीं बोल रही.
 

1996 में नितीश की नज़र में आये थे आरसीपी सिंह, जिनकी बेटी है मुंगेर की SP लिपी सिंह

चुनाव से ठीक पहले बिहार में मुंगेर की घटना बीजेपी के लिए गले की हड्डी साबित हो रहा है. एक तरफ जहां बीजेपी की सहयोगी पार्टी JDU इस मामले पर चुप है वहीं बीजेपी नेता भी इस मामले पर ज्यादा कुछ नहीं बोल पा रहे. उधर विपक्ष इस घटना में ज्यादा हिन्दुवाद करके अपने मुस्लिम वोट तोडना नहीं चाहता. 1996 में नितीश की नज़र में आये थे आरसीपी सिंह, जिनकी बेटी है मुंगेर की SP लिपी सिंह मुंगेर की SP का नाम आप सब जानते ही होंगे लिपी सिंह, लेकिन क्या आप जानते हैं की यह आरसीपी सिंह की बेटी हैं? जी हां वही आरसीपी सिंह जिन्होंने JDU की राजनीती चमकाने के लिए नितीश कुमार का कंधे से कन्धा मिलाकर पिछले लगभग 24 सालों से साथ दिया है. आरसीपी सिंह का इतना रुतबा है की, उनके खिलाफ न तो बीजेपी कुछ बोल पा रही है न JDU और न ही NDA से जुडी हुई अन्य पार्टियां. आरसीपी सिंह कोई आम इंसान नहीं वह खुद उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अफसर रह चुके हैं. इनका संपर्क नितीश कुमार से तब हुआ जब 1996 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के निजी सेक्रेटरी के तौर पर इन्हें ड्यूटी मिली थी. दोनों जाती कुर्मी होने के चलते इन दोनों में दोस्ती हो गयी और दोनों एक दूसरे के काम करने के तरीके से काफी प्रभावित भी हुए. नितीश कुमार जब भारत के रेल मंत्री बने तो उन्होंने आर पि सिंह को अपना सचिव बनाया. इसी तरह से नितीश और आरसीपी सिंह की जोड़ी 2005 में नितीश के बिहार में मुख्यमंत्री बनने के बाद भी देखने को मिली जब उन्होंने अपने प्रमुख सचिव का पद आरसीपी सिंह को दिया. आरसीपी सिंह, मुख्यमंत्री नितीश कुमार की आवाज़ बन चुके थे, इस तरह से धीरे धीरे पार्टी में उनका कद बढ़ता चला गया. 1996 में नितीश की नज़र में आये थे आरसीपी सिंह, जिनकी बेटी है मुंगेर की SP लिपी सिंह 2010 में आरसीपी सिंह ने स्वैच्छिक रिटायरमेंट लिया और नितीश ने इनका नाम राज्यसभा के लिए आगे भेज दिया गया. उसके बाद NDA से JDU के बाहर आने की वजह भी आरसीपी सिंह ही थे, क्योंकि बीजेपी अपनी कैबिनेट में JDU को एक सीट देना चाहती थी और JDU अपने लिए दो सीट आरसीपी सिंह और ललन सिंह के लिए मांग रहे थे. JDU में प्रशांत किशोर का दबदबा बढ़ने लगा तो आरसीपी सिंह के कहने पर JDU वापिस अपने साथी NDA के साथ आ गयी. ऐसे में सवाल उठता है की, क्या उस लड़के को कभी इन्साफ मिल भी पाएगा? जो मुंगेर में पुलिस द्वारा चलायी गयी गोली का शिकार हुआ और पुलिस को गोली चलाने का आर्डर देने वाली लिपी सिंह का बाप राजनीती में इतना ऊपर उठ चूका हो जिसके खिलाफ आज दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी भी कुछ नहीं बोल रही.