सोनिया और राहुल पर उठाये थे सिब्बल-चिदंबरम ने सवाल, अब खुर्शीद ने दिया बड़ा बयान

Salman Khurshid Target Kapil Sibal: 2014 के बाद से ही कांग्रेस पार्टी का राज्यों में वोटिंग का ग्राफ बहुत निचे गिरा हैं, पंजाब और राजस्थान को छोड़कर कहीं पर भी कांग्रेस ने 2014 के बाद अच्छा प्रदर्शन नहीं किया. ऐसे में 15 सालों से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे नितीश कुमार जब बिहार में बुरी तरह से हारने की कगार पर थे. उस वक़्त कांग्रेस ने आरजेडी के साथ गठबंधन करके 90 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया. RJD ने जितनी सीटों पर चुनाव लड़े उस हिसाब से अगर कांग्रेस थोड़ा भी अच्छा प्रदर्शन करती तो बिहार में नितीश कुमार अपनी कुर्सी न बचा पाते. 15 साल से सरकार चाल्ने के बावजूद कांग्रेस के ढीले रवैये की वजह से बिहार में गैर बीजेपी सरकार बनते बनते रह गई. ऐसे में जहां आरजेडी के नेताओं ने कांग्रेस के नेर्तत्व पर सवाल खड़े किये, वहीं कांग्रेस के अपने वरिष्ठ नेताओं ने भी कांग्रेस के नेर्तत्व पर भरपूर सवाल खड़े किये. सबसे पहले कपिल सिब्बल ने सोनिया गांधी और उनके पार्टी को लेकर रवैये पर सवाल उठाये. उसके बाद पी चिदंबरम ने भी कपिल सिब्बल की बातों का समर्थन करते हुए कांग्रेस निति आयोग पर सवाल खड़े किये. कपिल सिब्बल और पी चिदंबरम के बयानों के उलट कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने भी बयान देते हुए कहा है की, "पार्टी में किसी भी तरह का नेतृत्व संकट नहीं है. जो अंधा नहीं है उसे साफ नजर आ रहा है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी को पूरा समर्थन है." बिहार चुनाव में मिली हार पर बोलते हुए खुर्शीद ने कहा की, "मैं उनकी बात से असहमत नहीं हूँ, लेकिन किसी को भी बाहर जाकर मीडिया और दुनिया से यह कहने की क्या जरूरत है कि 'हमें यह करना होगा'. एनालिसिस हर समय किया जाता है, इसे लेकर कोई झगड़ा नहीं है. यह होगी. सभी लोग जो लीडरशिप का हिस्सा हैं, वे इस बात को देखेंगे कि क्या गलत हुआ है, हम क्या सुधार कर सकते हैं और यह आमतौर पर होता है. हमें इसके बारे में सार्वजनिक रूप से बात करने की जरूरत नहीं है." आखिर में शिष्टाचार का पाठ पढ़ाते हुए सलमान खुर्शीद ने कहा की, "नेतृत्व पर सवाल उठाने वाले लोग यदि स्वयं के लोकतांत्रिक होने का दावा करते हैं, तो उन्हें नेतृत्व पर सवाल नहीं उठाने वाले हम लोगों को भी शामिल करने का शिष्टाचार दिखाना चाहिए और पार्टी के भीतर हम यह फैसला कर सकते हैं कि वे अधिक हैं या हम. हमारी आपत्ति बस यह है कि यह पार्टी के बाहर हो रहा है."
 

सोनिया और राहुल पर उठाये थे सिब्बल-चिदंबरम ने सवाल, अब खुर्शीद ने दिया बड़ा बयान

Salman Khurshid Target Kapil Sibal: 2014 के बाद से ही कांग्रेस पार्टी का राज्यों में वोटिंग का ग्राफ बहुत निचे गिरा हैं, पंजाब और राजस्थान को छोड़कर कहीं पर भी कांग्रेस ने 2014 के बाद अच्छा प्रदर्शन नहीं किया. ऐसे में 15 सालों से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे नितीश कुमार जब बिहार में बुरी तरह से हारने की कगार पर थे. सोनिया और राहुल पर उठाये थे सिब्बल-चिदंबरम ने सवाल, अब खुर्शीद ने दिया बड़ा बयान उस वक़्त कांग्रेस ने आरजेडी के साथ गठबंधन करके 90 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया. RJD ने जितनी सीटों पर चुनाव लड़े उस हिसाब से अगर कांग्रेस थोड़ा भी अच्छा प्रदर्शन करती तो बिहार में नितीश कुमार अपनी कुर्सी न बचा पाते. 15 साल से सरकार चाल्ने के बावजूद कांग्रेस के ढीले रवैये की वजह से बिहार में गैर बीजेपी सरकार बनते बनते रह गई. ऐसे में जहां आरजेडी के नेताओं ने कांग्रेस के नेर्तत्व पर सवाल खड़े किये, वहीं कांग्रेस के अपने वरिष्ठ नेताओं ने भी कांग्रेस के नेर्तत्व पर भरपूर सवाल खड़े किये. सबसे पहले कपिल सिब्बल ने सोनिया गांधी और उनके पार्टी को लेकर रवैये पर सवाल उठाये. उसके बाद पी चिदंबरम ने भी कपिल सिब्बल की बातों का समर्थन करते हुए कांग्रेस निति आयोग पर सवाल खड़े किये. कपिल सिब्बल और पी चिदंबरम के बयानों के उलट कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने भी बयान देते हुए कहा है की, "पार्टी में किसी भी तरह का नेतृत्व संकट नहीं है. जो अंधा नहीं है उसे साफ नजर आ रहा है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी को पूरा समर्थन है." बिहार चुनाव में मिली हार पर बोलते हुए खुर्शीद ने कहा की, "मैं उनकी बात से असहमत नहीं हूँ, लेकिन किसी को भी बाहर जाकर मीडिया और दुनिया से यह कहने की क्या जरूरत है कि 'हमें यह करना होगा'. एनालिसिस हर समय किया जाता है, इसे लेकर कोई झगड़ा नहीं है. यह होगी. सभी लोग जो लीडरशिप का हिस्सा हैं, वे इस बात को देखेंगे कि क्या गलत हुआ है, हम क्या सुधार कर सकते हैं और यह आमतौर पर होता है. हमें इसके बारे में सार्वजनिक रूप से बात करने की जरूरत नहीं है." सोनिया और राहुल पर उठाये थे सिब्बल-चिदंबरम ने सवाल, अब खुर्शीद ने दिया बड़ा बयान आखिर में शिष्टाचार का पाठ पढ़ाते हुए सलमान खुर्शीद ने कहा की, "नेतृत्व पर सवाल उठाने वाले लोग यदि स्वयं के लोकतांत्रिक होने का दावा करते हैं, तो उन्हें नेतृत्व पर सवाल नहीं उठाने वाले हम लोगों को भी शामिल करने का शिष्टाचार दिखाना चाहिए और पार्टी के भीतर हम यह फैसला कर सकते हैं कि वे अधिक हैं या हम. हमारी आपत्ति बस यह है कि यह पार्टी के बाहर हो रहा है."