आओ पेड़ लगाएँ…. (बालकनी गार्डन)

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Neeloo neelpari
Neeloo neelpari

Neeloo neelpari kavi poetry tree poetry: कंक्रीट के जंगलों में रहते हुए हम हरियाली से दूर होते जा रहे हैं। अपनी बालकनी या टेरेस पर घर के पुराने प्लास्टिक, बोतलों, डिब्बों, कप, टोकरियों में पौधे, हर्ब्स, सब्ज़ी, फल, मसाले उगाकर किचन गार्डन बना सकते हैं, जैसे यह मैंने बनाया है। आध्यात्मिक अभिरूचि के लिए फाउंटेन, कलात्मकता के लिए सभी शोपीस भी घर के कबाड़ से मेरे द्वारा ही बनाया गया है। पक्षियों के पुराने पिंजरों में भी हरियाली बोई है। फाउंटेन से आते झरने सी मद्धम स्वरलहरी बिखेरती शांति में यह कविता भी मैंने ही लिखी। कैसी बन पड़ी बताएं..

Neeloo neelpari kavi poetry tree poetry

Neeloo neelpari kavi poetry tree poetry-

आँखो को तृप्त करती है
मन को हर्षाती हरियाली
हवा में झूमते पेड़ों के पत्ते
और झुकी फूलोंभरी डाली
अपनी बालकनी में हम भी
फल फूल पत्ते जड़ीबूटी लगाएं
उनको बढ़ता-पनपता देख
ताज़गी का आनंद उठाएं
प्रकृति की इस अद्भुत देन से
नाता जोड़ें तालमेल बिठाएं
ज़हरीला प्लास्टिक बने वरदान
कुछ टूटी बोतल टोकरियाँ कप
उनको करके एकत्र पौधे लगाएं
खिलौने-फव्वारे से सुर-ताल-शांति
रसोई के कूड़े से कम्पोस्ट बनाएं
कंक्रीट के जंगलों में घुटते दम को
जीवनदायिनी ऑक्सीजन दे पाएं
कबाड़ से हम भी संजीवनी उगाएं
धरती के कैनवास पर हरे चित्र बनायें
प्रदूषित पर्यावरण को फिर पवित्र बनायें
पवित्र बनायें, पवित्र बनायें, पवित्र बनायें
आओ पेड़ लगायें, पेड़ों से मित्रता बढ़ाएं
ये वादियाँ, ये फिजायें सजाएँ, आओ पेड़ लगायें…..

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