Hug Day (12 Feb)

Neeloo Neelpari Hug Day Poem
Neeloo Neelpari Hug Day Poem

रोज़ रोज़ और ज़्यादा
प्यार होता जाता है तुमसे
बताओ न क्यों

कहीं भी मुड़ जाऊँ
हर रास्ता,
तुम तक ही जाता पाऊँ
बताओ न क्यों

तुमको पाकर खुद पर इतराऊँ
सारा जहां मैं भूल जाऊँ
बताओ न क्यों

रोज़ रूठूँ, झट मान जाऊँ
ओ मेरे शोना,
इतना है प्यार तुमसे
बताओ न क्यों

पेड़ पर लिपटी बेल देख, शरमाऊँ
तुमसे लिपटने को तरसती जाऊँ
बताओ न क्यों

मेरे स्कार्फ़ में लिपटी कुछ यादें पड़ी हैं
महफूज़ है तेरी महक जिसमें
छू कर उसे तुझे करीब पाऊँ
बताओ न क्यों..

सब तो हैं साथ यहाँ,
फिर भी तुझे ढूँढती जाऊँ
आ डाल दे गले बहियाँ
हग टाइट हग…
हो जा मुझ पे फिर निसार
ओ मेरे जानां ?

© नीलू ‘नीलपरी’

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By dp

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