Mahashivratri (14 Feb)

Neeloo Neelpari Mahashivratri Poem

 

ॐ नीलकंठ धारी
ॐ कैलाश वासी
ॐ उमापति महेश्वर:
माथे अर्द्धचंद्रमा साजे
कर में डमरू डम डम बाजे
जटा में भगीरथी लहराये
कंठन नागराज विराजे
ॐ की महिमा हर कोई बांचे
गरल पिया कर सागर मंथन
जन जन दिया जीवन दान
जगत पे विपदा पड़ी है भारी
कर लो मंथन फिर इक बारी
विष पी दे दो अब के फिर से
अमृत का तुम अनुपम दान
चले आओ पुनः इक बार
ओ बाबा भोला भंडारी
मेरे शिव भोला भंडारी
‘नीलपरी’ की करुण पुकार
ओ त्रिपुरारी सुन कर बानी
तुम चले आओ इक बार….
तुम चले आओ इक बार….

ॐ नमः शिवाय

© नीलू ‘नीलपरी’

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By dp

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