चीन की जगह भारत में आने तैयार 200 अमेरिकी कंपनियां, मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना चाहती हैं भारत को, मिलेगी हजारो नौकरिया

200 US companies want to make India a manufacturing hub: हेलो दोस्तों पिछले 5 वर्षों से सत्ता में मोदी सरकार है! ऐसे में बड़ा मुद्दा उठा रहा था रोजगार! कि मोदी सरकार ने प्रतिवर्ष दो करोड़ रोजगार देने का वादा किया था! लेकिन इसी बीच एक बड़ी खबर आ रही है! वर्ल्ड का सबसे ताकतवर देश भारत में 200 कम्पनियां लगाने जा रहा है! जी हां अमेरिका, जो भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना चाहता है! भारत में फिलहाल लोकसभा चुनाव है! लेकिन इन चुनावो के चीन से ये कंपनियां अपने प्रोजेक्ट भारत में लाना चाहते है! इसका बयान स्वयंसेवी समूह यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक एंड पार्टनरशिप फोरम ने दिया है! जोकि भारत और अमेरिका के मजबूत संबंधो की पैरवी करता है! 200 US companies want to make India a manufacturing hub - यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक एंड पार्टनरशिप फोरम के अध्यक्ष ने कहां स्वयंसेवी समूह यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक एंड पार्टनरशिप फोरम ने चीन से ये कंपनियां एक अलग विकल्प चुनना चाहती है! कहना है की भारत से शानदार विकल्प और कोई नहीं है! समूह यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक एंड पार्टनरशिप के अध्यक्ष मुकेश अघि ने कहा कि कई कंपनियां उनसे बात कर रही हैं और पूछ रही हैं! कि भारत में निवेश कर किस तरह से चीन का विकल्प तैयार किया जा सकता है! मुकेश अघी ने कहा कि समूह सुधारों में तेजी लाने और निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए नई सरकार को सुझाव देगा! उन्होंने कहा, "मुझे लगता है! कि यह संवेदनशील है! हम सुझाव देते हैं कि प्रक्रिया में और अधिक पारदर्शिता लाई जाए! और इसे 12 से 18 महीनों में और अधिक उचित बना दिया जाए! हम देख रहे हैं कि ई-कॉमर्स, स्थानीय स्तर पर डेटा का भंडारण इत्यादि जैसे निर्णय नहीं हैं! अमेरिकी कंपनियों ने एक स्थानीय कारक के रूप में माना, "उन्होंने कहा! यह पूछे जाने पर कि नई सरकार को निवेश आकर्षित करने के लिए क्या करना चाहिए! उन्होंने कहा कि नई सरकार को सुधार की गति को तेज करना चाहिए! निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना चाहिए! और अधिक पक्षों के साथ परामर्श पर जोर देना चाहिए! उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच मुक्त व्यापार समझौते की भी पैरवी की!
 

चीन की जगह भारत में आने तैयार 200 अमेरिकी कंपनियां, मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना चाहती हैं भारत को, मिलेगी हजारो नौकरिया

200 US companies want to make India a manufacturing hub: हेलो दोस्तों पिछले 5 वर्षों से सत्ता में मोदी सरकार है! ऐसे में बड़ा मुद्दा उठा रहा था रोजगार! कि मोदी सरकार ने प्रतिवर्ष दो करोड़ रोजगार देने का वादा किया था! लेकिन इसी बीच एक बड़ी खबर आ रही है! वर्ल्ड का सबसे ताकतवर देश भारत में 200 कम्पनियां लगाने जा रहा है! जी हां अमेरिका, जो भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना चाहता है! भारत में फिलहाल लोकसभा चुनाव है! लेकिन इन चुनावो के चीन से ये कंपनियां अपने प्रोजेक्ट भारत में लाना चाहते है! इसका बयान स्वयंसेवी समूह यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक एंड पार्टनरशिप फोरम ने दिया है! जोकि भारत और अमेरिका के मजबूत संबंधो की पैरवी करता है!

200 US companies want to make India a manufacturing hub - यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक एंड पार्टनरशिप फोरम के अध्यक्ष ने कहां

स्वयंसेवी समूह यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक एंड पार्टनरशिप फोरम ने चीन से ये कंपनियां एक अलग विकल्प चुनना चाहती है! कहना है की भारत से शानदार विकल्प और कोई नहीं है! समूह यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक एंड पार्टनरशिप के अध्यक्ष चीन की जगह भारत में आने तैयार 200 अमेरिकी कंपनियां, मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना चाहती हैं भारत को, मिलेगी हजारो नौकरिया मुकेश अघि ने कहा कि कई कंपनियां उनसे बात कर रही हैं और पूछ रही हैं! कि भारत में निवेश कर किस तरह से चीन का विकल्प तैयार किया जा सकता है! मुकेश अघी ने कहा कि समूह सुधारों में तेजी लाने और निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए नई सरकार को सुझाव देगा! उन्होंने कहा, "मुझे लगता है! कि यह संवेदनशील है! हम सुझाव देते हैं कि प्रक्रिया में और अधिक चीन की जगह भारत में आने तैयार 200 अमेरिकी कंपनियां, मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना चाहती हैं भारत को, मिलेगी हजारो नौकरिया पारदर्शिता लाई जाए! और इसे 12 से 18 महीनों में और अधिक उचित बना दिया जाए! हम देख रहे हैं कि ई-कॉमर्स, स्थानीय स्तर पर डेटा का भंडारण इत्यादि जैसे निर्णय नहीं हैं! अमेरिकी कंपनियों ने एक स्थानीय कारक के रूप में माना, "उन्होंने कहा! यह पूछे जाने पर कि नई सरकार को निवेश आकर्षित करने के लिए क्या करना चाहिए! उन्होंने कहा कि नई सरकार को चीन की जगह भारत में आने तैयार 200 अमेरिकी कंपनियां, मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना चाहती हैं भारत को, मिलेगी हजारो नौकरिया सुधार की गति को तेज करना चाहिए! निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना चाहिए! और अधिक पक्षों के साथ परामर्श पर जोर देना चाहिए! उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच मुक्त व्यापार समझौते की भी पैरवी की!