भारत पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने राष्ट्रवाद को बताया बिमारी ….

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धामिर्क कट्टरता क्या होती हैं वह उपराष्ट्रपति पद पर पहुँचने के बाद भी मुस्लिमों में देखि जा सकती हैं. हामिद अंसारी भले ही भारत के उपराष्ट्रपति पद पर पहुँच चुके हो लेकिन इस पद की मर्यादा और गोपनीयता उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान रखी होगी या नहीं इसपर सवाल उठना लाज़मी हैं. वह भी तब, जब वह उस पद से हटने के बाद भारत में अल्पसंख्यकों के प्रति भ्रम फैलाने का काम कर रहें हो.

इससे पहले हामिद अंसारी ने कहा था की, ‘भारत में अल्पसंख्यक बहुत डरे हुए हैं’. जबकि बंगाल, दिल्ली के कुछ इलाके और केरल के मुस्लिम इलाकों में से हिन्दुवों को डराकर भगाया जा रहा हैं. इसके बाद उन्होंने बयान देते हुए कहा था की, “भारत के गणतंत्र की संस्थाएँ बहुत खतरे में हैं” और अब उन्होंने ताज़ा बयान देते हुए भारत में राष्ट्रवाद को कोरोना से बड़ी बिमारी बता दिया हैं.

हामिद अंसारी ने यह बयान तब दिया जब सांसद शशि थरूर की किताब ‘The Battle of Belonging’ के आभासी विमोचन में उन्हें बोलने का मौका मिला. हामिद अंसारी ने बयान देते हुए कहा की, “देश ऐसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष विचारधाराओं की वजह से ख़तरे में नज़र आ रहा है जो उसे ‘हम और वह’ की श्रेणी में विभाजित करने का प्रयास कर रही हैं.”

हामिद अंसारी ने आगे कहा की, “कोरोना से पहले ही हमारा देश दो बड़ी महामारियों को झेल चुका है, धार्मिक कट्टरता और आक्रामक राष्ट्रवाद. धार्मिक कट्टरता और आक्रामक राष्ट्रवाद की तुलना में देशभक्ति कहीं अधिक सकारात्मक अवधारणा है. इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि यह सांस्कृतिक और सैन्य दृष्टिकोण से रक्षात्मक है.”

हामिद अंसारी यही नहीं रुके उन्होंने अपना यह भाषण जारी रखते हुए आगे कहा की, “4 वर्षों की छोटी अवधि में भारत ने उदार राष्ट्रवाद के बुनियादी दृष्टिकोण से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की राजनीतिक छवि निर्मित करने तक एक लंबी यात्रा तय की है, जो सार्वजनिक क्षेत्र में पूर्णतः स्थापित हो चुकी है.” वैसे आपको बता दें की हामिद अंसारी को कभी भी मुस्लिम आतंकवाद, कट्टरवाद, मुस्लिम दंगों, लव जिहाद जैसी समस्याओं पर बोलते नहीं देखा गया.

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