पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने जीत का परचम फैलाने के लिए बनाया यह मास्टर स्ट्रोक | West Bengal Assembly Elections 2021

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West Bengal Assembly Elections 2021 BJP strategy: पश्चिम बंगाल (West Bengal) में साल 2021 के अप्रैल-मई महीने में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं! जिसके चलते दोनों पार्टियां चाहती हैं कि उनका दबदबा बना रहे! लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 2021 के विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections 2021) में अपनी जीत का परचम लहराने के लिए क्या रणनीति बनाई हैं? अब यह धीरे-धीरे साफ हो रहा है! दरअसल पश्चिम बंगाल में महापुरुषों के साथ हुए भेदभाव का मुद्दा हमेशा से उठाने वाली बीजेपी बंगाल चुनाव में महापुरुषों की बात कर बीजेपी बंगाली अस्मिता से खुद को जोड़ते हैं तो इसका फायदा विधानसभा चुनाव में हो सकता है!

इसी कड़ी में 24 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर शांतिनिकेतन (Shantiniketan) में विश्व भारती यूनिवर्सिटी (Visva Bharati University) के शताब्दी समारोह (Centenary Celebrations) को संबोधित करेंगे! इससे पहले, बंगाल की धरती पर जीत की गाथा लिखने के लिए भाजपा (BJP) मैदान में आ गई, इस मिट्टी के गौरव को एक-एक करके नमन कर रही है!

बंगाल की यात्रा पर, गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल की भूमि में पैदा हुए महापुरुषों को नमन किया! बंगाल चुनावों में भाजपा की रणनीति यह है कि वह यह साबित करने की कोशिश करेगी कि बंगाल के महापुरुषों को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार में उचित सम्मान नहीं मिला!

भाजपा का आरोप है कि ममता बनर्जी 2011 में सत्ता में आई थीं, लेकिन बंगाली और बाहरी लोगों के बीच अंतर करने वाले नेता ने बंगाली पहचान को नजरअंदाज कर दिया! यही वजह है कि अमित शाह की यात्रा के दौरान खुदीराम बोस के परिवार ने कहा कि पहली बार किसी पार्टी ने उन्हें सम्मान दिया है!

यह इस तथ्य से संकेत मिलता है कि जब अमित शाह 19 और 20 दिसंबर को दो दिवसीय पश्चिम बंगाल दौरे पर आए थे, तो वह शांति निकेतन जाने से पहले स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि देने के लिए रामकृष्ण मिशन भी गए थे! रामकृष्ण मिशन और स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबंध जगजाहिर है! इसके बाद, शाह ने महान स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद खुदीराम बोस के स्मारक का भी दौरा किया! भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी रामकृष्ण मिशन का दौरा किया है!

बंगाल में आने के साथ, अमित शाह ने मंदिरों से लेकर बंगाल से जुड़े महापुरुषों तक के महत्वपूर्ण स्थानों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई! यह नरम हिंदुत्व के साथ बंगाल के मतदाताओं के साथ खुद को जोड़ने की कवायद थी, यह दिखाने की कोशिश करना कि भाजपा का चरित्र पश्चिम बंगाल के चरित्र से अलग नहीं है! भाजपा की नजर पश्चिम बंगाल के हिंदू मतदाता पर है!

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