याकूब मेमन की फांसी रोकने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले प्रशांत भूषण ने लिया रोहिंग्या का पक्ष, कहा सरकार को इन्हें नागरिकता प्रदान करनी चाहिए

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याकूब मेनन के फांसी रोकने के लिए आधी रात को कोर्ट खुलवाने वाले प्रशांत भूषण एक बार फिर से सुर्खियों में आ गए हैं. इस बार उन्होंने रोहिंग्या को लेकर अपनी बात कही है. उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर जम्मू की जेल में हिरासत में रखे गए डेढ़ सौ से ज्यादा रोहिंग्या को रिहा किए जाने की बात कही.

इस ट्वीट से वह फिर से सुर्खियों में आ गए हैं और उनको जमकर भला बुरा कहा जा रहा है. इस याचिका में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से गुजारिश की है कि वह संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी (UNHCR) को इस मामले में हस्तक्षेप करने की अनुमति प्रदान करें. जिससे कि निष्पक्ष कार्रवाई हो सके.

अपील में कहा गया है कि रोहिंग्या खतरों का सामना सरकारी सर्कुलर की वजह से करना पड़ रहा है. भारत में शरणार्थियों के लिए कानून ना होना और रोहिंग्याओं को अवैध प्रवासी माना जाता है, जिन्हें फॉरेनर्स एक्ट 1946 और फॉरेनर्स ऑर्डर 1948 के अंतर्गत कभी भी अपने देश भेजा जा सकता है.

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से देश के अलग-अलग हिस्सों ऐसे रोहिंग्या मुसलमान पकड़े जा रहे हैं जो जाली दस्तावेज दिखाकर देश का नागरिक बनने की कोशिश कर रहे थे. इन लोगों के पास यात्रा करने के बाद दस्तावेज भी नहीं थे.

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