असम की लेखिका ने किया नस्क्सली में शहीद जवानो का अपमान

छत्तीसगढ़ के अंदर हमारे जवानों के साथ क्या कुछ हुआ है वह तो पूरे देश ने देखा है लेकिन उसके बाद असम की एक लेखिका को उनके फेसबुक पोस्ट के चलते गुवाहाटी में हिरासत में लिया गया! 48 वर्ष की शिखा शर्मा नाम की लेखिका गुवाहाटी पुलिस ने उनको हिरासत में लिया! पुलिस का कहना है कि उनको कल कोर्ट में पेश किया जाएगा! इस मामले को लेकर गुवाहाटी पुलिस कमिश्नर मुन्ना प्रसाद गुप्ता का कहना है कि गुवाहाटी की शिखा शिखा शर्मा के विरूद्ध आईपीसी की धारा 124 ए समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया! वही जानकारी के लिए बता दें कि शेखा सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं और कथित तौर पर उन्होंने सोमवार को जवानों के बलिदानों के बारे में लिखा कि वेतन भोगी पेशेवर जो अपनी ड्यूटी के दौरान ma-रे उन्हें शहीद नहीं कहा जा सकता इस तरफ से तो अगर विद्युत विभाग में कोई करंट लगने से ma-र जाता है तो उसे भी शहीद कहा जाना चाहिए, मीडिया इसे लोगों की भावना मत बनाओ! [embed]https://twitter.com/IndianExpress/status/1379602323261956097[/embed] हालांकि असम की लेखिका की इस पोस्ट का ऑनलाइन काफी विरोध किया गया! सोमवार को गुवाहाटी हाई कोर्ट के दो वकील उमी डेका बरुआ और कंगकना गोस्वामी ने उनके विरुद्ध डिसपुर थाने में एफआइआर भी दर्ज करवाई है! इसमें कहा गया, “यह हमारे सैनिकों के सम्मान में पूरी तरह से अपमानजनक है और इस तरह की भद्दी टिप्पणी न केवल हमारे जवानों के बलिदान को कम करती है बल्कि राष्ट्र भावना और पवित्रता पर मौखिक हमला भी है।”
 

असम की लेखिका ने किया नस्क्सली में शहीद जवानो का अपमान

छत्तीसगढ़ के अंदर हमारे जवानों के साथ क्या कुछ हुआ है वह तो पूरे देश ने देखा है लेकिन उसके बाद असम की एक लेखिका को उनके फेसबुक पोस्ट के चलते गुवाहाटी में हिरासत में लिया गया! 48 वर्ष की शिखा शर्मा नाम की लेखिका गुवाहाटी पुलिस ने उनको हिरासत में लिया! पुलिस का कहना है कि उनको कल कोर्ट में पेश किया जाएगा! इस मामले को लेकर गुवाहाटी पुलिस कमिश्नर मुन्ना प्रसाद गुप्ता का कहना है कि गुवाहाटी की शिखा शिखा शर्मा के विरूद्ध आईपीसी की धारा 124 ए समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया! वही जानकारी के लिए बता दें कि शेखा सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं और कथित तौर पर उन्होंने सोमवार को जवानों के बलिदानों के बारे में लिखा कि वेतन भोगी पेशेवर जो अपनी ड्यूटी के दौरान ma-रे उन्हें शहीद नहीं कहा जा सकता इस तरफ से तो अगर विद्युत विभाग में कोई करंट लगने से ma-र जाता है तो उसे भी शहीद कहा जाना चाहिए, मीडिया इसे लोगों की भावना मत बनाओ! [embed]https://twitter.com/IndianExpress/status/1379602323261956097[/embed] हालांकि असम की लेखिका की इस पोस्ट का ऑनलाइन काफी विरोध किया गया! सोमवार को गुवाहाटी हाई कोर्ट के दो वकील उमी डेका बरुआ और कंगकना गोस्वामी ने उनके विरुद्ध डिसपुर थाने में एफआइआर भी दर्ज करवाई है! इसमें कहा गया, “यह हमारे सैनिकों के सम्मान में पूरी तरह से अपमानजनक है और इस तरह की भद्दी टिप्पणी न केवल हमारे जवानों के बलिदान को कम करती है बल्कि राष्ट्र भावना और पवित्रता पर मौखिक हमला भी है।”