ममता बनर्जी के बुलाने के बाद भी पश्चिम बंगाल नहीं गई भारत बायोटेक, गुजरात में लगाया अपना प्लांट

भारत में वैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने पश्चिम बंगाल को नजरअंदाज कर अपनी सहायक कंपनी अंकलेश्वर (गुजरात) स्थित फैसिलिटी में ' कोवैक्सीन' की अतिरिक्त 200 मिलियन डोज का उत्पादन करने की योजना बना रही है. इस प्रयास से वैक्सीन का कुल उत्पादन 1 साल में लगभग 1 बिलियन (100 करोड़) हो जाएगा. ध्यान देने की बात यह है कि कुछ दिनों पहले ही ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा था. इस पत्र में उन्होंने कहा था कि राज्य किसी भी वैक्सीन बनाने वाली कंपनी को जमीन और अन्य सुविधाएं देने को तैयार हैं. पश्चिम बंगाल के स्वागत के बावजूद भी भारत बायोटेक ने गुजरात की ओर रुख कर लिया. यह निर्णय दिखाता है कि कोई भी कंपनी क्यों पश्चिम बंगाल को अपना मैन्युफैक्चरिंग हब नहीं बनाना चाहता है. भारत बायोटेक अपने बयान में कहा कि,' कंपनी ने GMP facilities मैं प्रतिवर्ष कोवैक्सीन की 200 मिलियन खुराक उत्पादन करने की योजना बनाई है.जो पहले से ही Inactivated vero cell platform technology पर GMP और Biosafety केकड़े तारों के तहत वैक्सीन के उत्पादन के लिए चालू हैं.' वहीं दूसरी तरफ भारत बायोटेक को पुणे में स्थित एक फैसिलिटी के लिए उधर सरकार से कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी तब जाकर वहां वैक्सीन के उत्पादन के लिए अनुमति मिली. इस अनुमति को लेने के लिए कंपनी को मुंबई हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ गया. इस स्थिति से साफ है कि कंपनी किसी भी हाल में ममता बनर्जी के पश्चिम बंगाल में जाना नहीं चाहते. इसका कारण लोगों से छुपा नहीं है. जिस तरह से ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में तानाशाही सरकार चलाती हैं उससे कोई भी कंपनी जानबूझकर अपने पैर पर कुल्हाड़ी नहीं मारना चाहेगा. इसका एक मुख्य कारण बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हो रहे हिंसा भी हैं. जिससे कि कई सारे इंडस्ट्रीज वहां अपना दुकान खोलने से पीछे हट रही हैं. वहां पर टीएमसी के गुंडों द्वारा तोड़फोड़ काफी डर हमेशा लगा रहेगा.
 

ममता बनर्जी के बुलाने के बाद भी पश्चिम बंगाल नहीं गई भारत बायोटेक, गुजरात में लगाया अपना प्लांट

भारत में वैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने पश्चिम बंगाल को नजरअंदाज कर अपनी सहायक कंपनी अंकलेश्वर (गुजरात) स्थित फैसिलिटी में ' कोवैक्सीन' की अतिरिक्त 200 मिलियन डोज का उत्पादन करने की योजना बना रही है. इस प्रयास से वैक्सीन का कुल उत्पादन 1 साल में लगभग 1 बिलियन (100 करोड़) हो जाएगा. ध्यान देने की बात यह है कि कुछ दिनों पहले ही ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा था. इस पत्र में उन्होंने कहा था कि राज्य किसी भी वैक्सीन बनाने वाली कंपनी को जमीन और अन्य सुविधाएं देने को तैयार हैं. पश्चिम बंगाल के स्वागत के बावजूद भी भारत बायोटेक ने गुजरात की ओर रुख कर लिया. यह निर्णय दिखाता है कि कोई भी कंपनी क्यों पश्चिम बंगाल को अपना मैन्युफैक्चरिंग हब नहीं बनाना चाहता है. भारत बायोटेक अपने बयान में कहा कि,' कंपनी ने GMP facilities मैं प्रतिवर्ष कोवैक्सीन की 200 मिलियन खुराक उत्पादन करने की योजना बनाई है.जो पहले से ही Inactivated vero cell platform technology पर GMP और Biosafety केकड़े तारों के तहत वैक्सीन के उत्पादन के लिए चालू हैं.' ममता बनर्जी के बुलाने के बाद भी पश्चिम बंगाल नहीं गई भारत बायोटेक, गुजरात में लगाया अपना प्लांट वहीं दूसरी तरफ भारत बायोटेक को पुणे में स्थित एक फैसिलिटी के लिए उधर सरकार से कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी तब जाकर वहां वैक्सीन के उत्पादन के लिए अनुमति मिली. इस अनुमति को लेने के लिए कंपनी को मुंबई हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ गया. इस स्थिति से साफ है कि कंपनी किसी भी हाल में ममता बनर्जी के पश्चिम बंगाल में जाना नहीं चाहते. इसका कारण लोगों से छुपा नहीं है. जिस तरह से ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में तानाशाही सरकार चलाती हैं उससे कोई भी कंपनी जानबूझकर अपने पैर पर कुल्हाड़ी नहीं मारना चाहेगा. इसका एक मुख्य कारण बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हो रहे हिंसा भी हैं. जिससे कि कई सारे इंडस्ट्रीज वहां अपना दुकान खोलने से पीछे हट रही हैं. वहां पर टीएमसी के गुंडों द्वारा तोड़फोड़ काफी डर हमेशा लगा रहेगा.