इस वजह से मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने शिवराज को बताया नारियल तोडू

Kamalnath launches Congress Manifesto in MP: मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में राजनीतिक उथल पुथल फिर से शुरू हो चुकी हैं. ऐसे में अगर बीजेपी (BJP) फिर चुनाव हारती है तो मध्यप्रदेश में बीजेपी की सरकार गिर सकती हैं. इसलिए बीजेपी कांग्रेस 28 सीटों पर होने वाले उपचुनावों को लेकर पुरे दमखम के साथ मैदान में उतर चुकी हैं. पिछले काफी समय से लॉकडाउन था. ऐसे में जहां पूरी दुनिया के विकास की रफ़्तार रुकी हुई थी, वहीं मध्यप्रदेश भी कोई अछूता नहीं था. इसका का फायदा उठाते हुए कांग्रेस दावा कर रही हैं की, शिवराज सिंह चौहान ने नारियल तोड़ने या उद्घाटन करने के इलावा पिछले छह महीने में कुछ काम नहीं किया. मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मीडिया को कहा की, "शिवराज कहते थे कि किसानों का कर्ज माफ नहीं किया गया था, लेकिन सदन के पटल पर उनके ही मंत्री ने खुद बताया कि कर्ज माफ किया गया था." कृषि क़र्ज़ माफ़ी के मुद्दे को कमलनाथ ने फिर एक बार उछालते हुए मध्यप्रदेश में घोषणा पत्र जारी किया हैं. इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, विधायक जीतू पटवारी समेत पार्टी के अन्य नेता भी कार्यक्रम में मजूद थे. 15 अक्टूबर को जारी हुए इस घोषणा पत्र में 10 दिन में कर्ज़ा माफ़ करने वाला दावा करने वाले राहुल गाँधी के फोटो को इसबार घोषणा पत्र में कही जगह नहीं मिली. जबकि कमलनाथ, सोनिया गांधी और इंदिरा गांधी का फोटो इस बार घोषणा पत्र में दिखलाया गया था. आपको बता दें की मध्यप्रदेश में 28 सीटें पर 3 नवंबर को उपचुनावों में वोटिंग होगी और 10 नवंबर को वोटों की गिनती होगी. यह सियासी संकट सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद बना था. जिसमे सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद 22 सीटें खाली हो गई थी, इसके इलावा फिर कांग्रेस के तीन विधायकों ने भी बीजेपी का दामन थाम लिया था और इसके बाद दो कांग्रेस और एक बीजेपी के विधायक की मृत्यु के बाद कुल 28 सीटों पर अब जाकर वोटिंग होगी. 28 में से 20 सीटों पर फिलहाल बीजेपी की पकड़ मजबूत बताई जा रही है और बची आठ सीटों पर भी कांटे की टक्कर बताई जा रही हैं. ऐसे में फिलहाल राज्य में बीजेपी की स्थिति कांग्रेस की स्थिति कहीं ज्यादा मजबूत हैं. शायद यही कारण है की, कांग्रेस किसी नए मुद्दे को न पकड़ कर पहले जैसे किसानो के क़र्ज़ माफ़ी वाले झुनझुने के साथ चुनावी मैदान में उतरती हुई नज़र आ रही हैं.
 

इस वजह से मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने शिवराज को बताया नारियल तोडू

Kamalnath launches Congress Manifesto in MP: मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में राजनीतिक उथल पुथल फिर से शुरू हो चुकी हैं. ऐसे में अगर बीजेपी (BJP) फिर चुनाव हारती है तो मध्यप्रदेश में बीजेपी की सरकार गिर सकती हैं. इसलिए बीजेपी कांग्रेस 28 सीटों पर होने वाले उपचुनावों को लेकर पुरे दमखम के साथ मैदान में उतर चुकी हैं. इस वजह से मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने शिवराज को बताया नारियल तोडू पिछले काफी समय से लॉकडाउन था. ऐसे में जहां पूरी दुनिया के विकास की रफ़्तार रुकी हुई थी, वहीं मध्यप्रदेश भी कोई अछूता नहीं था. इसका का फायदा उठाते हुए कांग्रेस दावा कर रही हैं की, शिवराज सिंह चौहान ने नारियल तोड़ने या उद्घाटन करने के इलावा पिछले छह महीने में कुछ काम नहीं किया. मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मीडिया को कहा की, "शिवराज कहते थे कि किसानों का कर्ज माफ नहीं किया गया था, लेकिन सदन के पटल पर उनके ही मंत्री ने खुद बताया कि कर्ज माफ किया गया था." कृषि क़र्ज़ माफ़ी के मुद्दे को कमलनाथ ने फिर एक बार उछालते हुए मध्यप्रदेश में घोषणा पत्र जारी किया हैं. इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, विधायक जीतू पटवारी समेत पार्टी के अन्य नेता भी कार्यक्रम में मजूद थे. 15 अक्टूबर को जारी हुए इस घोषणा पत्र में 10 दिन में कर्ज़ा माफ़ करने वाला दावा करने वाले राहुल गाँधी के फोटो को इसबार घोषणा पत्र में कही जगह नहीं मिली. जबकि कमलनाथ, सोनिया गांधी और इंदिरा गांधी का फोटो इस बार घोषणा पत्र में दिखलाया गया था. आपको बता दें की मध्यप्रदेश में 28 सीटें पर 3 नवंबर को उपचुनावों में वोटिंग होगी और 10 नवंबर को वोटों की गिनती होगी. इस वजह से मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने शिवराज को बताया नारियल तोडू यह सियासी संकट सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद बना था. जिसमे सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद 22 सीटें खाली हो गई थी, इसके इलावा फिर कांग्रेस के तीन विधायकों ने भी बीजेपी का दामन थाम लिया था और इसके बाद दो कांग्रेस और एक बीजेपी के विधायक की मृत्यु के बाद कुल 28 सीटों पर अब जाकर वोटिंग होगी. 28 में से 20 सीटों पर फिलहाल बीजेपी की पकड़ मजबूत बताई जा रही है और बची आठ सीटों पर भी कांटे की टक्कर बताई जा रही हैं. ऐसे में फिलहाल राज्य में बीजेपी की स्थिति कांग्रेस की स्थिति कहीं ज्यादा मजबूत हैं. शायद यही कारण है की, कांग्रेस किसी नए मुद्दे को न पकड़ कर पहले जैसे किसानो के क़र्ज़ माफ़ी वाले झुनझुने के साथ चुनावी मैदान में उतरती हुई नज़र आ रही हैं.