राजनीति

मोदी की जगह नितिन गडकरी को प्रधानमंत्री बनने की चर्चा में गडकरी ने दिया यह जवाब,बीजेपी के भीतर पार्टी को 220 सीटों पर रोकने जैसी कोई ताकत काम कर रही है?

Nitin Gadkari Interview English newspaper

Nitin Gadkari Interview English newspaper: हेलो दोस्तों स्वागत है आपका हमारी वेब पोर्टल इंडिया वायरल पर! प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए नितिन गडकरी को ऐसा माना जाता है! लेकिन नितिन गडकरी ने यह साफ कर दिया है कि मैं प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं हूं! नितिन गडकरी ने आगे कहा यह सिर्फ मीडिया की जालसाजी है! अंग्रेजी एजेंसी को इंटरव्यू देते हुए ऐसी कोई पार्टी नहीं है जो बीजेपी के भीतर 220 सीटों पर रोकने का काम कर रही है!

Nitin Gadkari Interview English newspaper –

हाल ही में लोकसभा चुनाव की बदलती परिस्थितियों को देखते हुए कहा कि मैं खुद को पीएम पद की दावेदारी होने से खारिज करता हूं! और आगे कहा की पार्टी में 220 क्लब नाम की कोई चीज है ही नहीं! यह सब मीडिया की मनगढ़ंत कहानी है!

मीडिया से फैलाई जा रही जानकारी अगर बीजेपी पूर्ण बहुमत से नहीं आती तो नितिन गडकरी को प्रधानमंत्री पद के लिए सोच विचार किया जाएगा! परंतु वही नितिन गडकरी ने यह साफ कर दिया है कि मोदी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत से सरकार बनेगी! इतना ही नहीं बल्कि नितिन गडकरी से पूछा गया कि आपके सहयोगी दल और संघ आपको चाहता नेता मानती है तो नितिन गडकरी ने कहा की ऐसा कुछ भी नहीं है!

उन्होंने कहा यह तो मीडिया है जिसको जो लिखना है वह लिखे! नितिन गडकरी ने कहा उनकी ऐसी कोई मंशा नहीं है और ना ही ऐसा कोई गुणा भाग है! आगे बात को बढ़ाते हुए नितिन गडकरी ने कहा मैं पार्टी का कार्यकर्ता हूं और मैं इस बात से आश्वस्त हूं! प्रधानमंत्री मोदी के शासनकाल में हुए काम का फल उनको मिलेगा और पूर्ण बहुमत सीट दोबारा एनडीए की सरकार बनेगी! उन्होंने कहा कि जैसा आप सोच रहे ऐसी कोई स्थिति पैदा कि नहीं होगी!

इससे आगे कांग्रेस पर जमकर हमला किया! उन्होंने कहा का मंदिर और स्ट्राइक एक जैसे मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए! इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा जो लोग भारतीय सेना की वीरता का सबूत मांग रहे हैं! आज पूरा देश उन लोगों पर हंस रहा है! जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया है प्रधानमंत्री मोदी जी के लिए! यह देश की सबसे निम्न स्तर की राजनीति है! प्रधानमंत्री पद सम्मान के लिए होता है हमारे देश का अस्तित्व उस पद पर निर्भर करता है! और जिस तरह के शब्दों का का मंत्री जी के लिए इस्तेमाल किए गए हैं वह बड़ा ही दुर्भाग्यपूर्ण है!

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