दिल्ली में केजरीवाल ने लागू किया केंद्र का कृषि कानून, दूसरी तरफ कर रहें विरोध

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पंजाब में चुनाव लड़ने के लिए आम आदमी पार्टी को सबसे ज्यादा फंडिंग कनाडा से खालिस्तानियों द्वारा मिलती हैं. यही कारण है की एक तरफ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में नए तीनो कृषि कानून लागू कर दिए हैं. लेकिन हैरानी की बात यह है की जिस पंजाब में यह कानून लागु नहीं हुए वहां के किसानों के इन कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन का समर्थन भी कर रहें हैं.

दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मनोज तिवारी ने ‘दिल्ली राजपत्र’ के दस्तावेज की तस्वीरें सबूत के तौर पर दिखाते हुए बताया की, दिल्ली सरकार ने सोमवार (नवंबर 23, 2020) को ही कानून अपने राज्य में पारित कर दिए थे. इस राजपत्र में साफ़ साफ़ लिखा है की, “राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली की विधानसभा ने ‘दिल्ली कृषि उपज विपणन अधिनियम, 1998’ (1999 का दिल्ली अधिनियम, संख्या-7) को अधिनियमित किया है, जो जून 2, 1999 से लागू है.”

वहीं अपना दोहरा चरित्र दिखाते हुए केजरीवाल केंद्र सरकार द्वारा लाये गए इस कानून को किसान विरोधी बता रहें हैं. साथ ही उनका कहना है की केंद्र सरकार को यह सभी कानून वापिस ले लेने चाहिए. लेकिन दूसरी तरफ केजरीवाल के राजपत्र में साफ़ कहा गया है की दिल्ली के किसान अब मंडी से बाहर उत्पाद बेचने पर कोई शुल्क या टैक्स नहीं भरना पड़ेगा.

वह जब चाहें, जिसे चाहें, जितने की मर्जी चाहें उस हिसाब से जाकर अपनी फसल दिल्ली मंडी से बाहर या फिर दिल्ली से ही बाहर जाकर बेच सकते हैं. इसी को लेकर मनोज तिवारी का कहना है की जब आपको कानून के फायदे समझ आ चुके हैं, जब आपने अपने राज्य में कानून पारित कर दिया है तो आप अपने विधायकों को किसानों को भड़काने के लिए क्यों भेज रहें हैं?

उन्होंने कहा की आम आदमी पार्टी की मांग है की फसलों पर MSP ख़त्म न हो और न ही मंडियों को ख़त्म किया जाये. मनोज तिवारी ने कहा की हम यह पहले ही साफ़ कर चुके हैं की न तो मंडियां ख़त्म होंगी और न ही MSP फिर आपको किस बात की शिकायत हैं? और अगर कोई शिकायत है तो आपने अपने राज्य में यह कानून लागू ही क्यों किये.

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