ओवैसी के गढ़ में बीजेपी ने लहराया जीत का परचम, क्या ओवैसी पर भारी पड़े योगी

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जैसा की आप सब जानते हैं बीजेपी चुनाव छोटा हो या बड़ा उसे जीतने के लिए अपने स्टार प्रचारकों को मैदान में उतारना नहीं भूलती. जिसका फायदा बीजेपी को यह मिलता है की जीत के बाद उसके कार्यकर्ताओं का हौंसला पहले से ज्यादा बुलंद हो जाता हैं. ऐसे में बीजेपी ने पहली बार ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव (जीएचएमसी) जीत कर अगले विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंक दिया हैं.

सबसे हैरानी की बात यह थी की इससे ठीक पहले बीजेपी ने उपचुनाव में भी जीत हासिल की थी. अब असदुद्दीन ओवैसी और उनके राजनीति दल एआईएमआईएम का गढ़ माने जाने वाले हैदराबाद में भी बीजेपी लगभग 75 से 80 सीटों पर आगे चल रही हैं. यह चुनाव बैलेट पेपर के साथ हुए हैं. इसलिए इस बार यह EVM को लेकर भी सवाल नहीं उठा सकते.

प्रदेश का सत्ताधारी दल तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) लगभग 30 से 35 सीटों पर आगे चल रहा है लेकिन बीजेपी से बहुत ज्यादा पीछे ही हैं. बीजेपी ने इस चुनाव को जीतने के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक को चुनाव मैदान में प्रचार के लिए उतार दिया था.

बीजेपी के रोड शो की भव्यता को देखते हुए पहले ही जीत के अनुमान लगाए जा रहे थे और इन अनुमानों पर मोहर आज के परिणामों ने लगा दी. योगी आदित्यनाथ ने जहाँ कहा था की हम हैदराबाद का नाम बदल कर भाग्यनगर कर देंगे, वहीं अमित शाह ने अपनी चुनावी रैली में कहा था की हम हैदराबाद को निज़ाम-नवाब कल्चर से आज़ादी दिलायेंगे.

अभी पिछले चुनावों की ही बात करें तो बीजेपी को 2016 के हैदराबाद निकाय चुनावों में मात्र 5 सीटें ही हासिल हुई थी. उसके बाद बीजेपी ने हार की समीक्षा की और हार के कारणों को दूर करते हुए इसबार चुनाव में उतरे. जिसका नतीजा आप सबके सामने हैं. बीजेपी का मकसद साउथ इंडिया में अपनी पकड़ मजबूत करना हैं, एक वक़्त था जब नार्थ ईस्ट में एक भी सीट बीजेपी नहीं जीत पाती थी आज लगभग सारे राज्यों में बीजेपी की सरकार हैं, इसी तर्ज़ पर अब बीजेपी साउथ इंडिया में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती हैं.

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