सरकार ने किसानों के धरने में आखिर क्यों उतारी रैपिड एक्शन फाॅर्स?

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पिछले कुछ दिनों से सुरक्षा एजेंसियां सरकार को चेतावनी दे रही हैं की सिंघु और टिकरी सीमाओं पर हिंसा भड़काने की साजिश रची जा रही हैं. यह पूरा आंदोलन खालिस्तानियों और वामपंथियों के इशारे पर चल रहा हैं. यही कारण है की हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों ने इस आंदोलन से खुद को अलग कर लिया हैं.

इसके बावज़ूद पंजाब जहां यह कानून लागु ही नहीं हुआ, वहां के किसान सिंघु और टिकरी सीमाओं पर धरना दे रहें हैं. सरकार कानून में संशोधन करने को तैयार हैं लेकिन किसान नेताओं ने शर्त ऐसी रखी हैं जिससे किसानों और सरकार के बीच समझौता हो ही न. किसान नेताओं ने यह तीनों बिल खारिज करने की मांग की हैं, उधर सरकार का कहना है की तीनों बिल खारिज करना कोई विकल्प नहीं हैं.

ऐसे में अब सरकार ने आगे भी शांति बनी रहे इसलिए सिंघु और टिकरी सीमाओं पर अब रैपिड एक्शन फाॅर्स यानी RAF को उतार दिया हैं. 14 दिसंबर को किसानों ने भूख हरताल भी की और इस भूख हरताल में आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भी खूब साथ दिया. किसान नेताओं का कहना है की जब तक कानून पूरी तरह से रद्द नहीं होते हम पीछे नहीं हटेंगे.

उधर हरियाणा और उत्तरा प्रदेश समेत 29 किसान संगठनों का कहना है की अगर यह कानून रद्द हुए तो हम देश भर में आंदोलन शुरू कर देंगे. यानी सरकार दो अलग-अलग विचारधारा वाले किसान संगठनों के बीच में फस गयी हैं. एक जो बिल के समर्थन में हैं और दूसरे वह जो बिल के समर्थन में नहीं हैं.

अब बीजेपी के केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने किसानों को सन्देश देते हुए कहा है की, “लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सिर्फ संवाद से ही मसलों का समाधान किया जा सकता है. सरकार कृषि कानूनों से जुड़े किसानों के हर मुद्दे पर बात करने को तैयार है, पर पूरा कानून खत्म कर देना विकल्प नहीं हो सकता है.”

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