गुजरात में कमजोर हुई कांग्रेस अब प्रदेशाध्यक्ष और नेता विपक्ष ने भी दिया इस्तीफा

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कांग्रेस के जो हालात चल रहें हैं, उससे लगता है की ऐसा ही चलता रहा तो कांग्रेस आने वाले एक दशक में राष्ट्रीय पार्टी होने का तबगा खो देगी. दरअसल अब गुजरात में कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता परेश धानाणी ने भी पार्टी को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया हैं.

गौरतलब है की उन्होंने कांग्रेस को इस्तीफ़ा सौंपा है न की राजनीती छोड़ी हैं. यानी वह जल्द ही बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. माना जाता है की पार्टी और मीडिया चाहे जो भी दावा करे लेकिन स्थानीय नेता को एहसास होता है की राज्य में दुबारा सरकार किसकी बन सकती हैं. ऐसे में वह वक़्त रहते पहले ही पार्टी बदल लेता हैं, कुछ नेता उस समय पार्टी बदलते हैं जब उन्हें पार्टी टिकट नहीं देती.

दरअसल यह सब शुरू उस समय हुआ जब गुजरात में कांग्रेस 8 उपचुनाव हार गयी, यह उपचुनाव अब्दसा, कर्जन, मोरबी, गढ़ा, धारी, लिंबडी, कपराडा और डांग में हुए थे. हैरानी की बात यह थी की यह आठों सीटें पहले कांग्रेस के पास थी लेकिन कांग्रेस के विधायकों के इस्तीफ़ा पेश करने और 5 विधायकों के बीजेपी में शामिल होने के बाद यहां हुए उपचुनाव में कांग्रेस सभी आठ सीटें हार गयी.

इस तरह के बिखराव में कांग्रेस को अपनी राज्यसभा सीट से भी हाथ धोना पड़ा था. दरअसल कांग्रेस के ही एक नेता ने ट्वीट करते हुए कहा था की सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का नाम अडानी हवाई अड्डों से बदल दिया गया हैं. यह ट्वीट देश भर में फैले हुए कांग्रेस समर्थकों को उल्लू बनाने के लिहाज़ से भले ही ठीक था लेकिन गुजरात में जो नागरिक रहते हैं आप उनको तो उल्लू नहीं बना सकते थे.

ऐसे में गुजरात के कांग्रेस नेताओं को जनता के बीच भारी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. इससे पहले भी महामारी के समय पर कांग्रेस के भरतसिंह सोलंकी और शक्तिसिंह गोहिल जैसे प्रभावशाली नेताओं ने भी जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं किया. गुजरात में कांग्रेस को एकजुट करके रखने वाले दिग्गज नेता अहमद पटेल की मौत के बाद यह बिखराव बढ़ता ही चला जा रहा हैं. कुछ वरिष्ठ नेता इस बात से भी नाखुश हैं की गुजरात में कांग्रेस पार्टी ने उनसे ज्यादा हार्दिक पटेल को अहमियत दी हैं.

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