जानिए क्या है माइक्रोवेव हथियार, जिसका भारत और चीनी सीमा के तनाव में आया जिक्र

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कुछ दिन पहले मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था की चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने लद्दाख में माइक्रोवेव हथियारों का इस्तेमाल किया हैं. अब भारतीय सेना ने इसकी सफाई देते हुए भारतीय मीडिया की इन सभी बातों को खारिज कर दिया हैं.

इसके लिए बाकायदा भारतीय सेना के एडिशनल डायरेक्टरेट जनरल ऑफ पब्लिक इंफॉर्मेशन (एडीजीपीआई) ने अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा की, “पूर्वी लद्दाख में माइक्रोवेव हथियारों के इस्तेमाल पर मीडिया रिपोर्ट्स आधारहीन हैं. ये खबर फर्जी है.”

एडिशनल डायरेक्टरेट जनरल ऑफ पब्लिक इंफॉर्मेशन के साथ-साथ इंडियन डिफ़ेंस रिव्यू के एसोसिएट एडिटर कर्नल दानवीर सिंह ने भी भारतीय मीडिया और चीनी मीडिया के दावों को बेबुनियाद बताते हुए ट्विटर पर लिखा की, “इस तरह के सभी हथियार लाइन-ऑफ-साइट यानी एक सीधी रेखा में काम करते हैं. पहाड़ी इलाकों में इनका इस्तेमाल वैसे भी आसान नहीं है. ये बिलकुल लॉजिकल चीज नहीं है. ये पूरी तरह से एक चीनी प्रोपेगैंडा है.”

इन दोनों के इलावा डिफेंस और सिक्योरिटी पर लिखने वाले वरिष्ठ पत्रकार राहुल बेदी ने भी अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा की, “ये एक फेक न्यूज लगती है. ये एक चीनी प्रोपेगैंडा लगता है. इसमें कोई क्रेडिबिलिटी नहीं है.” आपको बता दें की यह एक माइक्रोवेव वेपन्स डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (डीईडब्ल्यू) का ही एक हिस्सा है जिसे माइक्रोवेव्स इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन के रूप में इस्तेमाल किया जाता हैं.

यह एक मिलीमीटर से लेकर एक मीटर जितनी मोटी वेवलेंथ जितना हो सकता हैं. अगर इसका इस्तेमाल किया जाये तो इसके सामने आने वाला इंसान मात्र 15 मिनट के अंदर ही खड़े रहने की हालत में नहीं रहेगा, उसकी त्वचा ठंड के मौसम में भी जलने लगेगी और वह उल्टियां करने लगेगा. आसपास के माहौल में हुए अचानक बदलाव के चलते उसका सर चकरा जायेगा और वह बेहोशी की हालत में पहुँच जायेगा.

डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स या डीईडब्ल्यू पर अब भारत की रक्षा शोध और विकास संस्थान (डीआरडीओ) भी काम कर रही हैं. उम्मीद है की रक्षा के मामले में जल्द ही हमें भारत के पास भी डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स या डीईडब्ल्यू देखने को मिलेगा. जिससे भारत की सीमाएं और ज्यादा सुरक्षित हो सकेगी.

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