पिछले एक साल में 76 लापता हुए बच्चों को ढूँढ चुकी हैं, यह महिला हेड कॉन्स्टेबल

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पुलिस को लेकर लोगों के मन में यही धारणा रहती हैं की यह कोई काम नहीं करते. जबकि यह धारणा सभी पुलिस वालों के लिए सही साबित नहीं होती. इसी का एक उदाहरण दिल्ली पुलिस की एक महिला कांस्टेबल ने दिया, जिसने अभी तक 76 लापता बच्चों को ढूंढ़कर उनके माँ बाप तक पहुँचाया.

इस महिला कांस्टेबल की मेहनत, जनून और ईमानदारी देखते हुए दिल्ली पुलिस ने इसे आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन (बिना बारी की तरक्की) देने का फैसला किया हैं. इस महिला हेड कांस्टेबल का नाम सीमा ढाका बताया जा रहा हैं, उन्होंने इस पुरूस्कार मिलने की खबर सुनकर अपनी ख़ुशी भी व्यक्त की.

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता का कहना है की अगर कोई पुलिस कांस्टेबल एक वर्ष में 50 ऐसे बच्चों को खोज निकलता है जिनकी आयु 14 वर्ष से कम हो तो उस पुलिस कांस्टेबल को हम आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन (बिना बारी की तरक्की) देते हैं. इसके इलावा या इन 50 बच्चों के बीच अगर आप एक साल में 15 ऐसे गुमशुदा बच्चों की तलाश करते है जिनकी उम्र 8 साल से कम थी तो आपको ‘असाधारण कार्य पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया जायेगा.

सीमा ढाका की बात करें तो यह दिल्ली के समयपुर बादली पुलिस थाने में तैनात महिला हेड कॉन्स्टेबल हैं. इन्होने एक साल में 76 बच्चों का पता लगाया जबकि कुछ बच्चे तो दिल्ली से दूसरे राज्यों में पहुँच चुके थे. बताया जा रहा है की इन 76 बच्चों में से 56 बच्चे ऐसे थे जिनकी आयु अभी 14 वर्ष से भी कम थी. सीमा ढाका ने दिल्ली के साथ साथ बिहार, बंगाल एवं देश के अन्य राज्यों में भी इन बच्चो को खोजकर इनके माँ-बाप के हवाले कर दिया.

बच्चों को ढूंढ़कर उनके माँ-बाप तक पहुँचाना इसलिए भी आसान हो चूका है क्योंकि भारत में ज्यादातर लोगों के आधार कार्ड बने हुए हैं. ऐसे में अगर कोई बच्चा जिसे अपने घर का एड्रेस नहीं पता या फिर वह बताने की हालत में ना हो तो पुलिस उसके फिंगर प्रिंट की मदद से उसका आधार कार्ड में जमा जानकारी को निकाल लेती है.

जिससे उसके माँ बाप का नाम और घर का एड्रेस पुलिस के सामने आ जाता है और बच्चा उसके घर तक सुरक्षित पहुंचा दिया जाता हैं. इससे पहले ऐसे बच्चों के लिए एक से दो बार अखबार में इश्तिहार निकलवाया जाता था अगर कोई यह दावा नहीं करता था की यह बच्चा उसका है तो उसे पास के किसी अनाथालय में भेज दिया जाता था.

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