टाटा समूह वापिस खरीद सकता है एयर इंडिया, जो पहले टाटा की ही कंपनी थी

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बहुत कम लोग जानते हैं की एयर इंडिया पहले टाटा एयरलाइंस हुआ करती थी. 1946 में इसका नाम बदल कर JRD Tata ने टाटा एयरलाइंस से एयर इंडिया कर दिया और फिर 7 साल बाद इसे बेचना शुरू किया. 1977 तक टाटा समूह की हिस्सेदारी ज्यादा होने के कारण JRD Tata ही इसके अध्यक्ष पद पर कायम रहे.

2019 में नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह ने कहा था की एयर इंडिया लगातार घाटे में जा रही हैं. सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद यह घाटे से उभर नहीं पाई और सरकार अब इसके लिए और ज्यादा मुआवजा जारी नहीं कर सकती. अगर इसका निजीकरण संपन्न न हुआ तो सरकार को मजबूरन इसका संचालन बंद करना होगा जिससे इस कंपनी में काम करने वाले अधिकांश लोग बेरोज़गार हो जायेंगे.

2018 में सरकार ने इसकी बोली लगवाई थी लेकिन तब इसका कोई खरीदार नहीं मिला था. अब बताया जा रहा है की टाटा समूह के इलावा कंपनी के 200 बड़े कर्मचारियों और स्पाइस जेट के अजय सिंह ने भी मिलकर हिस्सेदारी खरीदने में रूचि दिखाई हैं.

नए मालिक को सबसे पहले एयर इंडिया पर बकाया 60,000 करोड़ के कर्ज में से 23,286 करोड़ रुपये रुपये जमा बोली जीतने के कुछ दिनों के भीतर ही करवाने होंगे. उसके बाद शेष राशि केंद्र द्वारा एक विशेष प्रयोजन वाहन एयर इंडिया एसेट्स होल्डिंग में जमा करवाने का प्रस्ताव दिया जायेगा.

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो एयर इंडिया का बड़ा हिस्सा टाटा समूह ही खरीदेगा और इसके लिए वह अपनी एयरलाइन्स कंपनी एयर एशिया इंडिया के माध्यम से इसमें निवेश करेगा. टाटा संस के ग्रुप के इलावा एयर इंडिया के बड़े पदों पर बैठे कर्मचारी भी इस कंपनी को बंद नहीं होने देना चाहते जिस वजह से लगभग 200 बड़े कर्मचारियों ने भी इसमें कुछ हिस्सेदारी खरीदने की रूचि दिखाई हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स में यह साफ़ है की अगले 15 दिनों में एयर इंडिया को नया मालिक मिल जायेगा. रविवार को केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था की, तय सीमा समय समाप्त होने बाद ही सरकार बोलियों की जांच करेगी. फिलहाल टाटा ग्रुप ने EoI पेश की है अगले 15 दिनों में वित्तीय बोलियां मंगवाई जायेंगी उसके बाद ही आगे का निर्णय होगा.

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