आरोपियों के बरी होने पर महिला कांस्टेबल ने लौटाया वीरता का पुरस्कार

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मणिपुर की एक महिला पुलिस अधिकारी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक थौनाओजम बृंदा (Thounaojam Brinda) ने अपना मुख्यमंत्री से मिला हुआ वीरता पुरस्कार वापिस लौटा दिया हैं. दरअसल यह पुरस्कार उन्हें स्टेट नारकोटिक्स एंड अफेयर्स ऑफ बाॅर्डर ब्यूरो (NAB) की पहली अधिकारी बनने के बाद एक केस में आरोपियों को पकड़ने पर मिला था.

अब कोर्ट ने उन आरोपियों को यह कहते हुए बरी कर दिया हैं की पुलिस की जांच और अभियोजन को असंतोषजनक थी. इस मामले में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया था वह सभी भारतीय जनता पार्टी के पूर्व एडीसी चेयरमैन और उनके साथी थे. ऐसे में यह मामला राजनितिक होने के साथ-साथ मीडिया में भी खूब उछला था.

इस मामले की वजह से ही थौनाओजम बृंदा को वीरता पुरस्कार मिला था और जब कोर्ट ने जांच और अभियोजन को असंतोषजनक मानते हुए सभी आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया है तो थौनाओजम बृंदा ने यह पुरस्कार अपने पास रखना ठीक नहीं समझा.

यह पूरा मामला लामफेल की एनडीपीएस कोर्ट में चलाया गया और लगभग दो साल बाद कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी के पूर्व स्वायत्त जिला परिषद एडीसी के अध्यक्ष लुखोशी जो और उसके अन्य 6 साथियों को क्लीन चिट थमा दी. यह सब तब पकडे गए थे जब थौनाओजम बृंदा NAB में ASP के पद पर थी और तब जून 2018 में इनके पास भारी मात्रा में ड्रग्स पकड़ी गयी थी.

20 जून 2018 को थौनाओजम बृंदा ने टिप मिलने के बाद भारतीय जनता पार्टी के पूर्व स्वायत्त जिला परिषद एडीसी के अध्यक्ष लुखोशी जो समेत 6 लोगों के घरों में छापा मारा था. छापे के दौरान ही इनके घरों में करोड़ों रूपए की ड्रग्स प्राप्त हुई थी. जिसके बाद सभी को गिरफ्तार करके उनपर केस चलाया गया.

अब क्योंकि सब बरी हो गए हैं तो बृंदा ने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखते हुए कहा है की, “मुझे नैतिक रूप से यह महसूस हुआ है कि, मैंने देश की आपराधिक न्याय प्रणाली के इच्छानुसार अपनी ड्यूटी नहीं निभाई है इसलिए मैं खुद को इस सम्मान के लायक नहीं समझती हूं और राज्य के गृह विभाग को मेडल लौटा रही हूं ताकि किसी अधिक योग्य और वफादार पुलिस अधिकारी को यह मेडल दिया जा सके.”

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