केरल में APMC भी लागु नहीं की बिल का भी कर रहे विरोध, किसान करे तो करे क्या?

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केरल में पहले से ही APMC एक्ट का कोई कानूनी प्रबंध नहीं हैं. यानी केरल में APMC पहले से ही लागू नहीं की हुई, ऐसे में कृषि सुधार से जुड़े हुए तीन कानूनों का फायदा केरल के किसानों का जीवन बदलने के लिए बहुत ज्यादा मिलता. लेकिन केरल की वामपंथी सरकार ने इन तीन बिलों के खिलाफ दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे जमींदारों और आढ़तियों को समर्थन देने का फैसला किया हैं.

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने मोदी सरकार को एक प्रकार की धमकी देते हुए कहा है की सरकार को दिल्ली बॉर्डर पर बैठे किसानों की मांगो पर विचार करना चाहिए. हम उन किसानों के साथ हैं और किसान आंदोलन को दिन प्रतिदिन जनसमर्थन मिल रहा हैं. इसके साथ ही उन्होंने केरल में माकपा नेतृत्व वाली एलडीएफ (LDF) ने राज्य में निर्धारित सत्र से पहले कृषि कानूनों पर चर्चा करने और उसे खारिज करने के लिए विशेष सत्र बुलाने का फैसला कर लिया हैं.

माकपा नेतृत्व वाली एलडीएफ (LDF) को इस विशेष सत्र से पहले राज्य के राज्यपाल की अनुमति लेनी थी. ऐसे में केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने माकपा नेतृत्व वाली एलडीएफ (LDF) को इस विशेष सत्र के लिए अनुमति देने से इंकार कर दिया. आपको बता दें की केरल सरकार APMC सुधारों का विरोध कर रहे किसानों का समर्थन कर रही हैं.

जबकि आपको जानकार हैरानी होगी की केरल में APMC नाम का कोई कानून या व्यवस्था है ही नहीं. फिर भी केरल के मुख्यमंत्री का कहना है की, “भले ही हमारे यहाँ पर APMC स्ट्रक्चर नहीं है, मगर वे प्रदर्शनकारी किसानों की माँगों का समर्थन करेंगे क्योंकि केरल एक उपभोक्ता राज्य है और अगर देश में खाद्यान्न की कमी होगी तो इसका सबसे ज्यादा असर केरल पर होगा.”

कृषि सुधार कानून को लाने का वादा कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान अपने मेनिफेस्टो में किया था. 2016 में आम आदमी पार्टी ने पंजाब के विधानसभा 2017 चुनावों के लिए अपने मेनिफेस्टो में भी इस कनून को राज्य में लागू करने का वादा किया था. फिर जब 2019 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद किसान संगठनों की सालों की मांगों को पूरा कर दिया गया तो इसपर राजनीती शुरू हो गयी. विपक्षी अपने मेनिफेस्टो भूलकर किसानों में भ्रम फैलाने लगे और कुछ हद तक कामयाब भी रहे.

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