किसान रैली: मंदिर वाले कहाँ गए? एक भंडारा नहीं लगाया, सुधर जाओ पंडितों

0
285

देश में किसानों के नाम पर हिन्दू और सिखों के भाईचारे में खाई खोदी जा रही हैं. राजनीती शायद इसे ही कहते हैं, जिससे मुस्लिम वोटों की तरह सिख वोट एक तरफ़ा कांग्रेस को मिलने शुरू हो जाए और पंजाब कांग्रेस का गढ़ बन जाए. यही कारण हैं की, इंदिरा गांधी की हत्या को गौरव से बताने वाले खालिस्तानी समर्थकों के साथ राहुल गांधी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं.

अब इसी कड़ी में किसान आंदोलन का ही एक वीडियो तेज़ी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा हैं. इस वीडियो में हिन्दुवों की आस्था यानी मंदिरों का मजाक उड़ाया जा रहा हैं और हिन्दुवों द्वारा लगाए जाने वाले भंडारे का भी. एक तरफ पहले यह खालिस्तानी हिन्दू माँ और बेटियों के बारे में अपशब्दों का प्रयोग करते हुए टक्के-टक्के में बिकने वाली बताते हैं. दूसरी तरह हिन्दुवों से ही यह उम्मीद कर रहें हैं की वह हमारे लिए आकर भंडारा लगाए.

यह वीडियो किसी और का नहीं बल्कि कथित तौर पर किसान नेता राकेश टिकैत का हैं जो किसान रैल्ली के दौरान भीड़ को माइक पर सम्बोधित करते हुए कहता है की, “देखो सुधर जाओ. पंडित भी सुधर जाओ, जो मंदिर में बैठे हैं. इन पर बहुत चढ़ावा है. इनसे हिसाब-किताब तो ले लो भाई. यहाँ एकाध भंडारा लगवा दो. हम कोई कृष्ण जी के ख़िलाफ़ थोड़ी हैं, लेकिन तुम भंडारा तो लगवाओ. सब हरिद्वार जा रहे हैं, मथुरा जा रहे हैं, एक भी पंडित यहाँ नहीं आ रहा. इलाज इनका सबका होगा. इनकी सबकी लिस्ट बनेगी.”

इस वीडियो को भारत के एक वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा की, “मंदिर वाले सब कहाँ चले गए? एक भी भंडारा नहीं? ज़रा सिख समुदाय से ही सीख लो. … जो बोले सो निहाल …” इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर तरह तरह के लोगों ने अपनी अपनी राय व्यक्त की, लेकिन इस तरह की मांग क्या उचित हैं?

देखा जाए तो यह मांग भी नहीं यह तो सीधी-सीधी धमकी है की ‘सबकी लिस्ट बनेगी और सबको देखा जाएगा’. क्या भारत में इस तरह से बोलने की आज़ादी दी गयी हैं? बात रही भंडारे की तो चर्च की तरफ से भी ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गयी. उनके लिए ऐसे अमर्यादित शब्दों का तो इस्तेमाल नहीं किया, यहाँ तक की जिक्र ही नहीं किया गया.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here