मोदी सरकार का बड़ा फैसला: मार्का इस्लामी संस्थाओं के सर्टिफिकेट का खेल बंद

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पिछले काफी समय से हरिंदर एस सिक्का ने सोशल मीडिया पर हलाल सर्टिफिकेट को लेकर एक अभियान चला रहे थे. अब उन्हें सफलता मिलती हुई दिखाई दे रही हैं, बताया जा रहा है की भारत सरकार द्वारा अब कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority)’ या APEDA की तरफ से इस हलाल सर्टिफिकेट को अमान्य कर दिया हैं.

हरिंदर एस सिक्का ने इस कार्य के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल का धन्यवाद भी किया. हरिंदर एस सिक्का ने कहा की अब दुकानदारों और उद्योगपतियों को हलाल सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी, सरकार ने इसे अमान्य कर दिया है. यह ‘एक देश, एक नियम’ के तहत बहुत बड़ी उपलब्धि हैं.

इसके लिए सरकार को महज़ यह काम करना पड़ा की APEDA के अपने ‘फूड सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम’ के स्टैंडर्ड्स और क्वालिटी मैनेजमेंट के एक डॉक्यूमेंट में कुछ बदलाव करने पड़े. इन बदलावों में पहले लिखा था की, “जानवरों को ‘हलाल’ प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करते हुए जबह किया जाता है, जिसमें इस्लामी मुल्कों की ज़रूरतों को ध्यान में रखा जाता है.” अब इस लाइन में बदलाव करते हुए लिखा गया है की, “मीट को जहाँ आयात किया जाना है, उन मुल्कों की ज़रूरतों के हिसाब से जानवरों का जबह किया गया है.”

दरअसल लगभग छह महीने पहले इस हलाल शब्द पर एक बवाल हुआ था, उस बवाल में सरकार को आकर सफाई देनी पड़ी थी. इस बवाल को लेकर सरकार को साफ़ करना पड़ा था की हमने हलाल शब्द का इस्तेमाल जबरन नहीं किया हैं. बल्कि जिन देशों में मांस निर्यात होता हैं उनमे से ज्यादातर देश मुस्लिम हैं, इसलिए उन देशों के लिए हमने हलाल सर्टिफिकेट का प्रावधान दिया हैं.

हलाल शब्द का इस्तेमाल कुछ इस तरीके से किया गया था झटका मीट परोसने वाले रेस्ट्रोरेंट और होटल भी सक्ते में आ गए थे. इसलिए सरकार ने इस भ्रम को दूर करने के लिए इस लाइन में बदलाव किया. जिससे अब रेस्ट्रोरेंट, होटल आदि हलाल मीट के लिए बाध्य नहीं रहे, अब वह चाहे तो ग्राहक की मर्जी पर झटका भी परोस सकते हैं. परोस वह पहले भी सकते थे, लेकिन APEDA की उस लाइन ने उन्हें भ्रमित कर दिया था.

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