असम का दौरा रद्द करके पहुंचे दिल्ली अमित शाह, हो सकती है नक्सलियों पर बड़ी कार्यवाही

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कल भारत में एक बार फिर से नक्सली हमला हुआ है और इसी हमले के साथ भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता अमित शाह ने चुनावी रैलियों को रद्द करते हुए दिल्ली में हाइ लेवल की मीटिंग बुलाई थी. अमित शाह के तेवरों से अब साफ़ है की भारतीय सरकार इन नक्सलियों के साथ अब आर-पार की लड़ाई करने का प्रयास करेगी.

हालाँकि यह इतना आसान भी नहीं होगा भारत में वामपंथी मीडिया, लेखक, नेता और ह्यूमन राइट्स के चलते भारतीय सरकार को फूंक-फूंक कर कदम रखने की जरूरत पड़ेगी. इस मीटिंग के हवाले से एक बड़ी खबर तो यह सामने निकल कर आयी है की, भारतीय सरकार इन नक्सलियों को होने वाली फंडिंग का पता लगाएगी.

इसके साथ ही इन नक्सलियों को हथ्यार मुहिया करवाने वाले लोगों के खिलाफ भी अब सख्त कार्यवाही करने के निर्देश दिए जा चुके हैं. इस नक्सली हमले के बाद जहाँ एक तरफ पूरा देश और देश की सरकार गहरे शौक में है, वहीं विपक्षी दल इस हमले के बाद नक्सलियों के खिलाफ कोई बड़ा ब्यान या फिर कार्यवाही की मांग नहीं कर रहे.

छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के दौरान नक्सली लगभग ख़त्म हो चुके थे. अब वहां जब से कांग्रेस की सरकार बनी है नक्सलियों ने एक बार फिर से अपना सर उठाना शुरू कर दिया हैं. ऐसे में सवाल यह भी है अगर आज के समय में वहां कांग्रेस की सरकार न होकर बीजेपी की सरकार होती तो भी क्या विपक्षी दल इसी तरह चुप रहते?

वहीं बात करें वामपंथी मीडिया की तो वह इन नक्सलियों को क्रांतिकारी बताती आ रही हैं. कन्हैया कुमार के साथ रविश कुमार का एक इंटरव्यू भी वायरल हो रहा है, जिसमें कन्हैया कुमार नक्सलियों को क्रन्तिकारी बताते है और रविश कुमार भी उनकी बात का समर्थन करते हुए नज़र आते हैं.

खैर देश के गृह मंत्री अमित शाह ने इस हमले के बाद मीडिया को ब्यान देते हुए कहा है की, “मैं शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देता हूं और उनके परिवार और देश को विश्वास दिलाता हूं कि जवानों ने देश के लिए अपना जो खून बहाया है वो व्यर्थ नहीं जाएगा. नक्सलियों के खिलाफ मजबूती के सा​थ हमारी लड़ाई चलती रहेगी और हम इसे परिणाम तक ले जाएंगे.”

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