श्मशान घाट हादसा: चश्मदीद की माने तो रेत झड़ रही थी, ऊपर देखते ही गिर पड़ी छत

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श्मशान घाट का यह हादसा सच में डरा कर रख देने वाला हैं, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में मुरादनगर के बंबा रोड पर स्थित श्मशान घाट का हैं. इस श्मशान घात की छत गिरने के बाद अभी तक 25 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी हैं. हादसे के दौरान एक व्यक्ति विनोद कुमार छत के निचे किनारे पर खड़ा हुआ था.

विनोद कुमार बताते हैं की मेरे ऊपर कुछ रेत गिर रही थी, मैंने कंधा झाड़ते हुए किनारे से खुले आसमान के नीचे आ गया. अभी मेरे कदम रुके भी नहीं थे की अचानक से धड़ाम करके छत निचे गिर पड़ी. उन्होंने कहा की यह हादसा तब हुआ जब एक बुजुर्ग को मुख्याग्नि दी जा रही थी, उस दौरान सभी मौन धारण करके खड़े थे.

कुछ ने मौन धारण करने के दौरान अपनी आंखे बंद कर रखी थी, ऐसे में छत गिरी तो जाहिर सी बात है उन्हें कुछ करने का मौका ही नहीं मिला. विनोद कुमार का कहना है की मुख्याग्नि दिए जाने के बाद बारिश हो रही थी. इसलिए पंडित जी ने हमने छत के निचे बुलाकर आगे की रस्मों के बारे में जानकारी दे रहे थे.

विनोद कुमार ने कहा की जो लोग किनारों पर थे उन्हें गंभीर चोटे आई हैं, कुछ लोग भागने में कामयाब भी रहे. लेकिन जो लोग छत के ठीक नीचे थे उन्हें तो मौका ही नहीं मिला. उन्होंने कहा की छत के निचे जो बीम/खम्बे थे उनमें रेत की मात्रा बहुत अधिक थी. जब लेंटर टूटा तो खम्बे ऐसे बिखरे जैसे सीमेंट का इस्तेमाल ही न हुआ हो.

उन्होंने कहा की लेंटर गिरने के बाद अचानकर से चीखें शुरू हो गयी श्मशान के बाहर से भी लोग मदद के लिए भागे आये. लेंटर का मल्बा हटाना उस समय और ज्यादा मुश्किल हो जाता है जब आपको यह पता ही न हो की निचे पड़ा इंसान जिन्दा है या मृतक. उन्होंने कहा की 19 लोग तो लेंटर के गिरने के साथ ही अपना दम तोड़ गए थे, बाकी जो गंभीर रूप से घायल थे वह हॉस्पिटल में अपना दम तोड़ दिए. कुछ लोगों को मामूली चोटें आयी हैं और एक मैं हूँ जो छत गिरने से चंद सेकंड पहले खुले आसमान की और चल पड़ा था, काश मुझे पता होता की लेंटर गिरने जा रहा है तो मैं सबको बचा पाता.

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