इसी के साथ ख़त्म हुआ मुख्तार अंसारी का डॉन बनने सफर

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एक वक़्त था जब मुख्तार अंसारी के एक इशारे पर मऊ में दंगे हो जाया करते थे. दबदबा इतना था की पुलिस दंगाइयों पर गोली तो छोड़िए एक लाठी भी मारने की हिम्मत नहीं रखती थी. कभी समाजवादी पार्टी तो कभी बहुजन समाजवादी पार्टी के संरक्षण में मुख्तार अंसारी के नाम का इतना भय पैदा हो गया था की, लोग उसका नाम सुनकर ही अपनी जेब खाली कर देते थे.

सरकार बदली तो मुख्तार अंसारी ने पंजाब जेल में शरण ले ली, पंजाब में कांग्रेस की सरकार थी. ऐसे में मुख्तार अंसारी को खूब संरक्षण भी मिला, उत्तर प्रदेश की पुलिस नजाने कितनी बार पंजाब के रोपड़ जिले से मुख्तार अंसारी को गिरफ्तार करने गयी लेकिन जेलर हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर उसे उत्तर प्रदेश पुलिस के हवाले करने से मना कर देता.

आखिरकार यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मुख्तार अंसारी आखिरकार उत्तर प्रदेश पुलिस को सौंप दिया गया. लेकिन इस दौरान यह तो साफ़ हो गया की जिस मुख्तार अंसारी के नाम से उत्तर प्रदेश का बच्चा-बच्चा डरता था आज वो मुख्तार अंसारी उत्तर प्रदेश की पुलिस से डर रहा था.

मुख्तार अंसारी की पत्नी से लेकर उसके छोटे भाई तक ने कहा की उत्तर प्रदेश की पुलिस मुख्तार अंसारी को फ़र्ज़ी एनकाउंटर में मार सकती हैं. शायद यही कारन था की मुख्तार अंसारी को व्हील चेयर का सुझाव दिया गया था और एम्बुलेंस से बाँदा जेल के लिए रवाना किया गया.

इसके इलावा पुरे रास्ते में मीडिया कर्मियों द्वारा एम्बुलेंस का पीछा भी किया गया जिसकी तस्वीरें कईं मीडिया चैनल देर रात तक सोशल मीडिया पर डाल रहे थे. खैर इससे यह तो साफ़ हो गया की वो डॉन जिसके नाम भर से आम इंसान से लेकर पुलिस तक काँप जाया करती थी वो आज खुद डरा हुआ था, उसका परिवार डरा हुआ था.

फिलहाल आपको बता दें की 14 घंटे के सफर के बाद मुख्तार अंसारी को सुबह 4 बजकर 26 मिनट पर बाँदा जेल में पहुंचा दिया गया था. भारी सुरक्षा के साथ-साथ मीडिया का काफिला भी मुख्तार अंसारी की एम्बुलेंस के साथ-साथ था. बताया जा रहा है 10 बजे उसका कोरोना टेस्ट होगा उसके बाद उसे 16 नंबर बैरेक में रखा जाएगा और फिलहाल उससे किसी को भी मिलने की इजाज़त नहीं होगी.

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