तो क्या अमेठी के बाद अब रायबरेली भी हारेगी कांग्रेस, लगी इस्तीफों की झड़ी

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अमेठी के बाद अब सोनिया गाँधी की सीट रायबरेली से भी कांग्रेस के लिए बुरी खबर सामने आ रही हैं. आपको बता दें की पिछले लोकसभा चुनाव में राहुल गाँधी को स्मृति ईरानी ने हरा दिया था और अब सोनिया गाँधी की भी सीट खतरे में नज़र आ रही हैं. सोनिया गाँधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली से हैं और खबर है की पूर्व कांग्रेस के प्रदेश सचिव और मौजूदा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के सदस्य शिव कुमार पाण्डेय समेत 35 अन्य पदाधिकारियों ने इस्तीफ़ा दे दिया हैं.

प्रदेश सचिव शिव कुमार ने इस इस्तीफे के पीछे कारण बताते हुए कहा है की, “हमारे निष्ठावान कांग्रेसी वर्षों से निरंतर पार्टी की सेवा करते चले आ रहे हैं. पार्टी को कमजोर करने के लिए जिलाध्यक्ष और अन्य जिलास्तरीय पदाधिकारी कार्य कर रहे है. हाल ही में गठित ब्लॉक की नई कार्यकारिणी में पुराने कार्यकर्ताओं को तवज्जो न देकर अन्य पार्टी से आए लोगों को महत्वपूर्ण पद पर बैठा दिया गया है.”

आपको बता दें की कुछ दिन पहले यानी 26 दिसंबर को ही केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अमेठी के गौरीगंज स्थित नवोदय विद्यालय में ब्यान देते हुए कहा था की, “2024 में रायबरेली में भी बीजेपी का कमल खिलेगा” और इस ब्यान के ठीक 13 दिन बाद जिस प्रकार से रायबरेली में इस्तीफों की झड़ी लगी है. उस हिसाब से राजनैतिक पंडित इसमें बीजेपी का हाथ होने की सम्भावना जता रहें हैं.

कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या यह है की वह पार्टी के अंदरूनी मसलों को ही हल नहीं कर पाती. ऐसे में दूसरी पार्टियां इसका भरपूर फायदा उठाती हैं, जबकि आप गुजरात में देख सकते हैं की बीजेपी से कई बार नेता नाराज़ होते है फिर उन्हें मना लिया जाता हैं. जबकि कांग्रेस में ऐसा नहीं होता जिस वजह से पार्टी का आंतरिक कलह बढ़ता चला जाता है और पार्टी टूटनी शुरू हो जाती हैं.

इस इस्तीफे को लेकर कांग्रेस ने बड़े नेता ने ब्यान देते हुए कहा है की, “जैसे अमेठी में सांसद की कुर्सी कांग्रेस से छिन गई है, वैसी ही दशा इस जिले में होती जा रही है. आलाकमान की ओर से ध्यान नहीं दिया गया तो इस्तीफा देनेवाले कार्यकर्ताओं का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा” ऐसे में यह कहना मुश्किल नहीं की कांग्रेस का हाल भी एक दिन TMC जैसा हो जायेगा. इसके पीछे की मुख्य वजह यह है की कांग्रेस में प्रदेश सचिव ही नहीं बल्कि बड़े नेता भी नाराज़ है लेकिन पार्टी उनकी नाराज़गी दूर करने की बजाए उन्हें पार्टी का गद्दार बता रही हैं. जैसे कपिल सिब्बल को बताया गया था, राहुल गाँधी के द्वारा.

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