क्या अर्नब को थी पुलवामा में हमले से पहले जानकारी? जानिए क्या है सच

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जब से अर्नब से जुडी वत्स ऐप चैट लीक हुई हैं तब से ही लोग अपने-अपने तरीके और कुछ तो बेहद ही गलत तरीके से इसका व्याख्यान कर रहें है जिसका सीधा फायदा ही पाकिस्तान को अंतराष्ट्रीय सत्र पर होगा. कुछ लोग नरेंद्र मोदी का विरोध तो करते है लेकिन इतना भी विरोध क्या हुआ की पाकिस्तान द्वारा हुए हमले को ही आप भारतीय हमला कह दें?

खैर भारत एक लोकतान्त्रिक देश है, यहाँ बोलने की सबको आज़ादी और अपने विचार अपनी समझ के हिसाब से सोशल मीडिया पर रखने की तो कुछ ज्यादा ही आज़ादी भारत में हैं. तो चलिए जानते हैं आखिर क्या है पूरा विवाद और क्यों अर्नब को लेकर बताया जा रहा है, देशद्रोही. शुरू करने से पहले बता दूँ की सारी चैट इंग्लिश में लीक हुई हैं, भारत में इंग्लिश अधिकाँश लोगों को आती नहीं जिस वजह से ज्यादातर लोग बिना पढ़े ही सुनी-सुनाई बातों पर ज्ञान दे रहें हैं.

पहला आरोप: पुलवामा में हमला होगा यह अर्नब पहले से जानता था.
वास्तविकता: यह आरोप पूरी तरह से झूठा है. पुलवामा हमला 14 फरवरी, 2019 को हुआ था और अर्नब ने इसका जिक्र 23 फरवरी 2019 को किया है, की कुछ बड़ा होने वाला हैं. क्या बड़ा होने वाला है? वही जो मोदी से लेकर ट्रम्प और फिर भारतीय सेना ने कहा था, अब पाकिस्तान को भरी किमत चुकानी पड़ेगी.

दूसरा नंबर: पुलवामा में 40 जवान शहीद होने के बाद अर्नब को खुशी हुई थी.
वास्तविकता: अगर आप Chat को ध्यान से पढ़ेंगे तो आपको पता चलेगा अर्नब हमले पर विभिन्न चैनलों के मीडिया कवरेज के विषय पर काफी समय से बात कर रहा था. फिर उसने कहा की “We won it like crazy” इस शब्द का इस्तेमाल अर्नब ने अपने Republic चैनल के कवरेज के विषय में किया है न की पुलवामा हमले के विषय में.

तीसरा आरोप: अर्नब को बालाकोट एअर स्ट्राईक जानकारी पहले से थी.
वास्तविकता: 19 फरवरी 2019 को मोदीजी ने अपने भाषण में स्पष्ट कहा था की पाकिस्तान को जल्दी ही पुलवामा हमले की कीमत चुकानी पड़ेगी. जिसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump से लेकर कई नेताओं ने साफ़ कहा था की भारत कुछ बड़ा करने जा रहा है. यहाँ तक की भारतीय सेना के प्रवक्ता ने भी कहा था बस समय और जगह हम तय करेंगे.

अब हम बात करते हैं उस विषय की जिनको लेकर कहा जा रहा है पुलवामा हमले के बाद अर्नब गोस्वामी न्यूज़ को लेकर काफी उत्तेजित था. तो सबसे पहले हमें समझना होगा, मीडिया क्या करता है? न्यूज़ दिखता हैं? तो ऐसे हमलों के बाद प्रत्येक चैनल का मालिक इसी तरह से उत्तेजित होगा.

आपको राजदीप सरदेसाई का संसद भवन में हुआ आतंकी हमले के बाद दिया गया एक इंटरव्यू याद नहीं? उसमें उन्होंने क्या कहा था… जब हमला हुआ तो हम वही थे, मैंने कैमरामैन से कहा की दरवाजे बंद कर दो किसी दूसरे न्यूज़ वाले को अंदर ना आने देना. यह हमारे जीवन का सबसे बड़ा न्यूज़ कवरेज होगा. तो क्या राजदीप सरदेसाई संसद हमले के दौरान खुश था? क्या वाह देशद्रोही था? नहीं वह मीडिया कर्मी है, उसका यही काम हैं जिसे उन्होंने संसद हमले के दौरान निभाया और अर्नब ने पुलवामा हमले के दौरान.

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