एक दिन में 6000 मरीज़ों के साथ खुल गयी केरल मॉडल की पोल, अब चुप हैं सभी विशेषज्ञ

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जब पूरा देश महामारी से जूझ रहा था तो उदारवादी और वामपंथी वर्ग का एक हिस्सा वामपंथी शासन वाले केरल (Kerala) राज्य के ‘कोरोना मॉडल’ की कथित सफलता का गुणगान करता हुआ नज़र आ रहा था. अब पुरे देश में कोरोना महामारी कम हो रही हैं वहीँ सिर्फ मंगलवार (जनवरी 19, 2021) को केरल राज्य में 6,186 लोग के संक्रमित होने साथ राज्य में कुल 8,57,80 एक्टिव केस हो गए.

नए केस की बात करें तो 5,541 लोकल ट्रांसपोर्ट (Local Transport) द्वारा संक्रमित होने के मामले सामने आए हैं जबकि 484 मामलों के संक्रमण होने कारण अभी तक राज्य की सरकार को पता नहीं चला. लेकिन इतना तय है की संक्रमित लोगों में 69 चिकित्सा या पैरामेडिकल कर्मचारी (Paramedical Staff) हैं और 92 लोग वह थे जो राज्य से बाहर किसी दूसरे राज्य से वापिस आए थे.

6186 का आंकड़ा भले ही आपको छोटा लगे लेकिन आप जानकार हैरान होंगे की 130 करोड़ की आबादी वाले देश में मंगलवार को कुल 13,821 नए संक्रमण के केस दर्ज़ किये गए हैं, जबकि अकेले केरल में ही 6186 केस दर्ज़ हुए हैं. यानी 45 प्रतिशत केस उस राज्य में दर्ज़ किये गए हैं, जिस राज्य की स्वास्थ योजनाओं का हवाला वामपंथी मीडिया कर्मियों का एक गुट देता हुआ नज़र आता था.

वहीँ दूसरा सबसे बड़ा कोरोना संक्रमित लोगों का राज्य बना महाराष्ट्र (Maharashtra) जहां मंगलवार को 2294 नए मामले सामने आए हैं. यानी केरल और महाराष्ट्र दोनों को मिला दें तो मंगलवार को सामने आने वाले एक्टिव केस में से 61 प्रतिशत इन दो राज्यों से सामने आए हैं. इसी बीच वामपंथी पत्रकारों के मुंह पर करारा त्माचा मारते हुए केरल के स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा (Health Minister KK Shailaja) ने बताया की जुलाई माह तक केरल में प्रति दिन 1000 या उससे ज्यादा संक्रमण मामलों के सामने आने की उम्मीद हैं.

स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने इन मामलों के पीछे वजह बताते हुए कहा की, यह मामले इस लिए बढ़ रहें हैं क्योंकि राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव (Local Body Elections) और त्योहार हो रहें हैं. जबकि उनका यह तर्क जायज़ नहीं लग रहा अगर ऐसा होता तो सिंघु बॉर्डर (Singhu Border) पर सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित (Corona Infected) लोग मिलते, पश्चमी बंगाल (West Bengal) के चुनावों में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित लोग होते.

खैर उन्होंने कहा है की वैक्सीन आने की खबर एक अच्छी बात हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की हम आराम से बैठ जाए. फिर भी मजहबी फैक्ट चेकर वेबसाइट ऑल्टन्यूज़ (Alt News) के संस्थापक प्रतीक सिन्हा (Prateek Sinha) 2015 से लेकर अभी तक पूछते आए हैं की, “गुजरात मॉडल क्यों? क्या हम स्वास्थ्य का केरल मॉडल अपना सकते हैं?”

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