जल्द ही रूस की तरह भारत के भी टुकड़े-टुकड़े हो जायेंगे: शिवसेना

भारत में लोकतंत्र है, भारत में बोलने की आज़ादी हैं, भारत में सरकारों के खिलाफ विरोध करने की भी आज़ादी हैं लेकिन क्या इसका मतलब यह है की आप खुलेआम भारत के टुकड़े करने की बात कहें? यह सवाल पिछले काफी समय से उठ रहा है की बोलने की आज़ादी भारतीय सरकार के खिलाफ हो सकती है लेकिन पुरे भारत के ही खिलाफ नहीं. इन सबसे के बावजूद आज टुकड़े-टुकड़े गैंग में शिवसेना ने भी अपना नाम लिखवा लिया हैं. क्योंकि शिवसेना ने आज अपने मुख्य पत्र सामना में लिखा है की जिस प्रकार से केंद्र सरकार के राज्यों से सम्बन्ध खराब हो रहें हैं, उससे लगता है की रूस की तरह भारत के भी टुकड़े होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा. 27 दिसंबर रविवार को सामना में केंद्र सरकार को लेकर लिखा गया है की, "अगर केंद्र सरकार को यह एहसास नहीं है कि वे राजनीतिक लाभ के लिए लोगों को नुकसान पहुँचा रहे हैं, तो हमारे देश में राज्यों को सोवियत संघ की तरह टूटने में ज्यादा समय नहीं लगेगा. वर्ष 2020 को देखा जाना चाहिए. यह केंद्र सरकार की क्षमता और विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाता है." इसके साथ ही भारतीय उच्च न्यायलय पर सवाल उठाते हुए शिवसेना ने लिखा है की, "सुप्रीम कोर्ट कई मामलों में अपने दायित्व को भूल गया है." आपको बता दें की शिवसेना ने रूस की बात इसलिए की क्योंकि दिसंबर 26, 1991 को शीत युद्ध के परिणामस्वरूप सोवियत संघ (Union of Soviet Socialist Republics/USSR) टूटकर 15 देशों में बिखर गया था. सामना एक एक और कॉलम में लिखा गया है की, "क्या होगा यदि हमारे प्रधानमंत्री राज्य सरकारों को अस्थिर करने में विशेष रुचि ले रहे हैं? प्रधानमंत्री देश का होता है. देश एक महासंघ के रूप में खड़ा है. यहाँ तक कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें नहीं हैं, उन राज्यों में भी राष्ट्रीय हित की बात होती है. इस भावना को ख़त्म किया जा रहा है." यह टिप्पणी शिवसेना ने भाजपा नेता विजयवर्गीय ने एक सनसनीखेज खुलासे को लेकर की हैं. जिसमे उन्होंने कहा था की मध्यप्रदेश में कमलनाथ की सरकार को गिराने के लिए खुद नरेंद्र मोदी ने रूचि ली थी. दूसरी तरफ राजस्थान में भी सरकार लगातार दबाव में चल रही है, अशोक गहलोत को खुद नहीं पता की वह सरकार को पांच साल पुरे चला पाएंगे या नहीं.
 

जल्द ही रूस की तरह भारत के भी टुकड़े-टुकड़े हो जायेंगे: शिवसेना

भारत में लोकतंत्र है, भारत में बोलने की आज़ादी हैं, भारत में सरकारों के खिलाफ विरोध करने की भी आज़ादी हैं लेकिन क्या इसका मतलब यह है की आप खुलेआम भारत के टुकड़े करने की बात कहें? यह सवाल पिछले काफी समय से उठ रहा है की बोलने की आज़ादी भारतीय सरकार के खिलाफ हो सकती है लेकिन पुरे भारत के ही खिलाफ नहीं. जल्द ही रूस की तरह भारत के भी टुकड़े-टुकड़े हो जायेंगे: शिवसेना इन सबसे के बावजूद आज टुकड़े-टुकड़े गैंग में शिवसेना ने भी अपना नाम लिखवा लिया हैं. क्योंकि शिवसेना ने आज अपने मुख्य पत्र सामना में लिखा है की जिस प्रकार से केंद्र सरकार के राज्यों से सम्बन्ध खराब हो रहें हैं, उससे लगता है की रूस की तरह भारत के भी टुकड़े होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा. 27 दिसंबर रविवार को सामना में केंद्र सरकार को लेकर लिखा गया है की, "अगर केंद्र सरकार को यह एहसास नहीं है कि वे राजनीतिक लाभ के लिए लोगों को नुकसान पहुँचा रहे हैं, तो हमारे देश में राज्यों को सोवियत संघ की तरह टूटने में ज्यादा समय नहीं लगेगा. वर्ष 2020 को देखा जाना चाहिए. यह केंद्र सरकार की क्षमता और विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाता है." इसके साथ ही भारतीय उच्च न्यायलय पर सवाल उठाते हुए शिवसेना ने लिखा है की, "सुप्रीम कोर्ट कई मामलों में अपने दायित्व को भूल गया है." आपको बता दें की शिवसेना ने रूस की बात इसलिए की क्योंकि दिसंबर 26, 1991 को शीत युद्ध के परिणामस्वरूप सोवियत संघ (Union of Soviet Socialist Republics/USSR) टूटकर 15 देशों में बिखर गया था. सामना एक एक और कॉलम में लिखा गया है की, "क्या होगा यदि हमारे प्रधानमंत्री राज्य सरकारों को अस्थिर करने में विशेष रुचि ले रहे हैं? प्रधानमंत्री देश का होता है. देश एक महासंघ के रूप में खड़ा है. यहाँ तक ​​कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें नहीं हैं, उन राज्यों में भी राष्ट्रीय हित की बात होती है. इस भावना को ख़त्म किया जा रहा है." जल्द ही रूस की तरह भारत के भी टुकड़े-टुकड़े हो जायेंगे: शिवसेना यह टिप्पणी शिवसेना ने भाजपा नेता विजयवर्गीय ने एक सनसनीखेज खुलासे को लेकर की हैं. जिसमे उन्होंने कहा था की मध्यप्रदेश में कमलनाथ की सरकार को गिराने के लिए खुद नरेंद्र मोदी ने रूचि ली थी. दूसरी तरफ राजस्थान में भी सरकार लगातार दबाव में चल रही है, अशोक गहलोत को खुद नहीं पता की वह सरकार को पांच साल पुरे चला पाएंगे या नहीं.