सेना को मिली अपनी तीसरी आंख, बॉर्डर से 1500 किलोमीटर तक रहेगी पैनी नज़र

भारतीय सेना पहले से काफी मजबूत स्थिति में आ चुकी हैं. आखिर ऐसा हो भी क्यों न जब भारतीय सीमा के साथ चीन और पाकिस्तान जैसे देश जुड़े हों तब भारत की सुरक्षा के लिए सेना का मजबूत होना अनिवार्य ही बन जाता हैं. हालाँकि पहले की सरकारों ने भारतीय सेना और उसके बजट पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. अब की बात करें तो भारतीय सेना को अपनी तीसरी आंख मिल चुकी हैं, इस आंख की मदद से वह बॉर्डर से 1500 किलोमीटर तक नज़र रख सकेगा. दरअसल भारतीय सीमाएं बहुत ही दुर्गम इलाकों से होकर गुजरती हैं, कुछ जगह पर फेंसिंग हैं, लेकिन ज्यादातर जगह ऐसी हैं, जहाँ फेंसिंग करना नामुमकिन हैं. ऐसे में भारतीय सीमाओं पर नज़र रखना भी भारतीय सेना के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था. ऐसे में भारतीय सेना को दूसरे देशों के सटेलाइट की मदद चाहिए होती थी, कई बार मदद मिल जाती तो कई बार नहीं भी मिलती. जैसा की पाकिस्तान के साथ युद्ध के समय अमेरिका ने आपने सटेलाइट का एक्सेस भारतीय सेना को देने से मना कर दिया था. अब ख़ुशी की बात है की 11 नवंबर को भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (Indian Regional Navigational Satellite System) को हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बन चूका हैं. इस दौरान भारत ने कुल 7 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा हैं. 7 में 4 उपग्रह निर्गत कार्य करेंगे, बाकी के 3 उपग्रह उस डाटा को इक्क्ठा करके स्टिक बनाएंगे और धरती पर भेजेंगे. इन सातों उपग्रहों की लागत 1050 करोड़ रूपए बताई जा रही हैं और इन उपग्रहों को पीएसएलवी-एक्सएल प्रक्षेपण यान द्वारा आंतरिक में भेजा गया हैं, जिसकी लागत भी 130 करोड़ रूपए बताई जा रही हैं. यानी भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली को पूरी तरह से बनाने और अंतरिक्ष में भेजने में कुल 1180 करोड़ रूपए का खर्च आया हैं. इन सातों उपग्रहों से मिलने वाली जानकारी सेना को मत्वपूर्ण ऑपरेशन्स और घुसपैठियों को रोकने में एहम भूमिका निभाएंगे.
 

सेना को मिली अपनी तीसरी आंख, बॉर्डर से 1500 किलोमीटर तक रहेगी पैनी नज़र

भारतीय सेना पहले से काफी मजबूत स्थिति में आ चुकी हैं. आखिर ऐसा हो भी क्यों न जब भारतीय सीमा के साथ चीन और पाकिस्तान जैसे देश जुड़े हों तब भारत की सुरक्षा के लिए सेना का मजबूत होना अनिवार्य ही बन जाता हैं. हालाँकि पहले की सरकारों ने भारतीय सेना और उसके बजट पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. सेना को मिली अपनी तीसरी आंख, बॉर्डर से 1500 किलोमीटर तक रहेगी पैनी नज़र अब की बात करें तो भारतीय सेना को अपनी तीसरी आंख मिल चुकी हैं, इस आंख की मदद से वह बॉर्डर से 1500 किलोमीटर तक नज़र रख सकेगा. दरअसल भारतीय सीमाएं बहुत ही दुर्गम इलाकों से होकर गुजरती हैं, कुछ जगह पर फेंसिंग हैं, लेकिन ज्यादातर जगह ऐसी हैं, जहाँ फेंसिंग करना नामुमकिन हैं. ऐसे में भारतीय सीमाओं पर नज़र रखना भी भारतीय सेना के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था. ऐसे में भारतीय सेना को दूसरे देशों के सटेलाइट की मदद चाहिए होती थी, कई बार मदद मिल जाती तो कई बार नहीं भी मिलती. जैसा की पाकिस्तान के साथ युद्ध के समय अमेरिका ने आपने सटेलाइट का एक्सेस भारतीय सेना को देने से मना कर दिया था. अब ख़ुशी की बात है की 11 नवंबर को भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (Indian Regional Navigational Satellite System) को हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बन चूका हैं. इस दौरान भारत ने कुल 7 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा हैं. 7 में 4 उपग्रह निर्गत कार्य करेंगे, बाकी के 3 उपग्रह उस डाटा को इक्क्ठा करके स्टिक बनाएंगे और धरती पर भेजेंगे. सेना को मिली अपनी तीसरी आंख, बॉर्डर से 1500 किलोमीटर तक रहेगी पैनी नज़र इन सातों उपग्रहों की लागत 1050 करोड़ रूपए बताई जा रही हैं और इन उपग्रहों को पीएसएलवी-एक्सएल प्रक्षेपण यान द्वारा आंतरिक में भेजा गया हैं, जिसकी लागत भी 130 करोड़ रूपए बताई जा रही हैं. यानी भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली को पूरी तरह से बनाने और अंतरिक्ष में भेजने में कुल 1180 करोड़ रूपए का खर्च आया हैं. इन सातों उपग्रहों से मिलने वाली जानकारी सेना को मत्वपूर्ण ऑपरेशन्स और घुसपैठियों को रोकने में एहम भूमिका निभाएंगे.