चुनाव सर्वे में अभी भी 341 सीट जित रही NDA, अपने चैनल के सर्वे से बौखलाए राजदीप

किसान आंदोलन, महामारी के चलते हुई परेशानियां जिसके बाद मीडिया का एक वर्ग यह सोचकर बैठ गया था की अब तो मोदी सरकार (Modi Government) से लोग नफरत करने लगे हैं. अगली बार मोदी सरकार गिर जाएगी, लेकिन इंडिया टुडे (India Today) द्वारा 2021 के पहले पोल जिसे ‘मूड ऑफ द नेशन’ नाम दिया गया, उसके नतीजे देश का का मूड कुछ और ही बयान कर रहा था. इस पोल के साथ ही यह साफ़ हो गया की चीनी वायरस (Chinese Virus) के फैलने के दौरान मोदी सरकार द्वारा उठाये गए कदम और किसान मुद्दे पर भी उठाये गए क़दमों से लोग संतुष्ट हैं. जी हाँ, लोग इन क़दमों से नाराज़ नहीं बल्कि संतुष्ट हैं. इस सर्वे में एक बड़ा चैंकाने वाला आंकड़ा यह आया की 73 प्रतिशत भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में कोविड-19 (Covid-19) महामारी के दौरान उठाये गए क़दमों से खुश हैं. पिछली बार यह सर्वे अगस्त 2020 में हुआ था और तब यह आंकड़ा 78% का था. जबकि अब इसमें बहुत ही मामूली सी गिरावट देखने को मिली हैं. महामारी के दौरान आर्थिक संकट को हैंडल करने की मोदी सरकार की नीतियों से भी 67 प्रतिशत भारतीय खुश हैं. 19 प्रतिशत लोगों का कहना था की हमने महामारी के चलते अपनी नौकरी खो दी हैं, 66 प्रतिशत लोगों का कहना है की हमने महामारी के दौरान भी कमाई कम हुई हैं. इसी सर्वे में यह भी पता चला की अगर आज ही चुनाव हुए तो बीजेपी अकेले ही 291 सीटों पर जीत दर्ज़ कर लेगी और NDA को मिलकर बात करें तो 341 सीट NDA को मिल सकती हैं. अगस्त के महीने में हुए सर्वे से 8 सीटें ज्यादा हैं, गृह मंत्री अमित शाह के कामगाज़ से 39% लोग खुश हैं और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 17%, तो वहीं 10% के साथ नितिन गडकरी चौथे नंबर पर रहे. अपने ही चैनल के सर्वे को लेकर राजदीप सरदेसाई (Rajdeep Sardesai) ने कहा की, "चलो बहुत स्पष्ट तौर पर बताते है कि COVID के समय के दौरान इनकम में 66% की कमी आई, 19% लोग कहते हैं कि उन्होंने अपनी नौकरी खो दी. और फिर भी इस सर्वे से पता चलता है कि लोग जीवन बचाने के लिए सरकार की सराहना कर रहे है. एक तरह वे अपनी आजीविका के लिए चिंतित हैं, लेकिन साथ ही, वे यह कहने को तैयार नहीं हैं कि केंद्र गलत तरीके से काम कर रहा है. मेरे पास अभी भी इस मामले में तर्कसंगत व्याख्या नहीं है."
 

चुनाव सर्वे में अभी भी 341 सीट जित रही NDA, अपने चैनल के सर्वे से बौखलाए राजदीप

किसान आंदोलन, महामारी के चलते हुई परेशानियां जिसके बाद मीडिया का एक वर्ग यह सोचकर बैठ गया था की अब तो मोदी सरकार (Modi Government) से लोग नफरत करने लगे हैं. अगली बार मोदी सरकार गिर जाएगी, लेकिन इंडिया टुडे (India Today) द्वारा 2021 के पहले पोल जिसे ‘मूड ऑफ द नेशन’ नाम दिया गया, उसके नतीजे देश का का मूड कुछ और ही बयान कर रहा था. चुनाव सर्वे में अभी भी 341 सीट जित रही NDA, अपने चैनल के सर्वे से बौखलाए राजदीप इस पोल के साथ ही यह साफ़ हो गया की चीनी वायरस (Chinese Virus) के फैलने के दौरान मोदी सरकार द्वारा उठाये गए कदम और किसान मुद्दे पर भी उठाये गए क़दमों से लोग संतुष्ट हैं. जी हाँ, लोग इन क़दमों से नाराज़ नहीं बल्कि संतुष्ट हैं. इस सर्वे में एक बड़ा चैंकाने वाला आंकड़ा यह आया की 73 प्रतिशत भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में कोविड-19 (Covid-19) महामारी के दौरान उठाये गए क़दमों से खुश हैं. पिछली बार यह सर्वे अगस्त 2020 में हुआ था और तब यह आंकड़ा 78% का था. जबकि अब इसमें बहुत ही मामूली सी गिरावट देखने को मिली हैं. महामारी के दौरान आर्थिक संकट को हैंडल करने की मोदी सरकार की नीतियों से भी 67 प्रतिशत भारतीय खुश हैं. 19 प्रतिशत लोगों का कहना था की हमने महामारी के चलते अपनी नौकरी खो दी हैं, 66 प्रतिशत लोगों का कहना है की हमने महामारी के दौरान भी कमाई कम हुई हैं. इसी सर्वे में यह भी पता चला की अगर आज ही चुनाव हुए तो बीजेपी अकेले ही 291 सीटों पर जीत दर्ज़ कर लेगी और NDA को मिलकर बात करें तो 341 सीट NDA को मिल सकती हैं. अगस्त के महीने में हुए सर्वे से 8 सीटें ज्यादा हैं, गृह मंत्री अमित शाह के कामगाज़ से 39% लोग खुश हैं और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 17%, तो वहीं 10% के साथ नितिन गडकरी चौथे नंबर पर रहे. चुनाव सर्वे में अभी भी 341 सीट जित रही NDA, अपने चैनल के सर्वे से बौखलाए राजदीप अपने ही चैनल के सर्वे को लेकर राजदीप सरदेसाई (Rajdeep Sardesai) ने कहा की, "चलो बहुत स्पष्ट तौर पर बताते है कि COVID के समय के दौरान इनकम में 66% की कमी आई, 19% लोग कहते हैं कि उन्होंने अपनी नौकरी खो दी. और फिर भी इस सर्वे से पता चलता है कि लोग जीवन बचाने के लिए सरकार की सराहना कर रहे है. एक तरह वे अपनी आजीविका के लिए चिंतित हैं, लेकिन साथ ही, वे यह कहने को तैयार नहीं हैं कि केंद्र गलत तरीके से काम कर रहा है. मेरे पास अभी भी इस मामले में तर्कसंगत व्याख्या नहीं है."