शुभेन्दु 2014 से थे अमित शाह के संपर्क में, बस थी सही मौके की तलाश

ममता बनर्जी का दाहिना हाथ कहे जाने वाले शुभेन्दु अधिकारी बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. लेकिन अब यह सनसनी खुलासा हुआ है की, सिद्धार्थ नाथ सिंह ने 2016 पश्चमी बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले ही अमित शाह से शुभेन्दु अधिकारी की मुलाकात करवा दी थी. यह मुलाकात 2014 में करवाई गयी थी, जिसके बाद 2015 में बीजेपी ने शुभेन्दु अधिकारी को TMC से BJP में आने का न्योता भी दिया था. मिदनापुर के एक कार्यक्रम में शुभेन्दु अधिकारी ने इस मुलाकात को याद करते हुए कहा की, 2014 लोकसभा चुनावों के दौरान मेरी मुलाकात अमित शाह से सिद्धार्थ नाथ सिंह ने करवाई थी. उसके बाद मुझे उन्होंने बीजेपी में आने का न्योता दिया था, मुझे पहले किसी भी पार्टी की तरफ से ऐसा न्योता नहीं मिला था. उन्होंने कहा तब मैंने TMC को छोड़ना सही नहीं समझा, लेकिन जब मुझे कोरोना संक्रमण हुआ तो तृणमूल कांग्रेस ने मुझे फ़ोन तक करना सही नहीं समझा. जबकि देश के गृह मंत्री अमित शाह जी मुझे फ़ोन करके मेरा हालचाल पूछा करते थे. शुभेन्दु अधिकारी का मानना है की ममता बनर्जी अपने भतीजे के मोह में खो चुकी हैं. ऐसे में शुभेन्दु अधिकारी ने नारा देते हुए कहा की 'तोलाबाज़ भाईपो हटाओ, बंगाल बचाओ.' बंगाली में 'तोलाबाज़ भाईपो' का मतलब 'लुटेरा भतीजा' होता हैं. शुभेन्दु अधिकारी ने कहा की तृणमूल कांग्रेस पार्टी में अब लोकतंत्र बिलकुल ख़त्म हो चूका है. भतीजावाद की राजनीती लोकतंत्र में नहीं चल सकती, आज हालात यह है की तृणमूल कांग्रेस में आत्मसम्मान वाला कोई भी व्यक्ति पार्टी का हिस्सा बना नहीं रहना चाहता. शुभेन्दु अधिकारी के पिता शिशिर अधिकारी तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और अब वह बंगाल के कांथी लोकसभा सीट पर सांसद हैं. मंत्री बनने से पहले शुभेन्दु अधिकारी तामलुक लोकसभा सीट से सांसद हुआ करते थे बाद में उनका भाई दिव्येंदु अधिकारी इस सीट पर सांसद बना. अभी शुभेन्दु नंदीग्राम विधानसभा सीट से विधायक हैं और वह पश्चमी बंगाल की 40 विधानसभा सीटों पर अपनी पकड़ रखते हैं. इसी लिए राजनीतिक पंडितों का कहना है की, बीजेपी के हाथ तृणमूल कांग्रेस की मछली नहीं बल्कि पूरा तालाब ही लग गया हैं. जिस वजह से कयास यह भी लगाए जा रहें हैं की, विधानसभा चुनाव से पहले ही तृणमूल कांग्रेस अल्पमत में आ सकती हैं.
 

शुभेन्दु 2014 से थे अमित शाह के संपर्क में, बस थी सही मौके की तलाश

ममता बनर्जी का दाहिना हाथ कहे जाने वाले शुभेन्दु अधिकारी बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. लेकिन अब यह सनसनी खुलासा हुआ है की, सिद्धार्थ नाथ सिंह ने 2016 पश्चमी बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले ही अमित शाह से शुभेन्दु अधिकारी की मुलाकात करवा दी थी. शुभेन्दु 2014 से थे अमित शाह के संपर्क में, बस थी सही मौके की तलाश यह मुलाकात 2014 में करवाई गयी थी, जिसके बाद 2015 में बीजेपी ने शुभेन्दु अधिकारी को TMC से BJP में आने का न्योता भी दिया था. मिदनापुर के एक कार्यक्रम में शुभेन्दु अधिकारी ने इस मुलाकात को याद करते हुए कहा की, 2014 लोकसभा चुनावों के दौरान मेरी मुलाकात अमित शाह से सिद्धार्थ नाथ सिंह ने करवाई थी. उसके बाद मुझे उन्होंने बीजेपी में आने का न्योता दिया था, मुझे पहले किसी भी पार्टी की तरफ से ऐसा न्योता नहीं मिला था. उन्होंने कहा तब मैंने TMC को छोड़ना सही नहीं समझा, लेकिन जब मुझे कोरोना संक्रमण हुआ तो तृणमूल कांग्रेस ने मुझे फ़ोन तक करना सही नहीं समझा. जबकि देश के गृह मंत्री अमित शाह जी मुझे फ़ोन करके मेरा हालचाल पूछा करते थे. शुभेन्दु अधिकारी का मानना है की ममता बनर्जी अपने भतीजे के मोह में खो चुकी हैं. ऐसे में शुभेन्दु अधिकारी ने नारा देते हुए कहा की 'तोलाबाज़ भाईपो हटाओ, बंगाल बचाओ.' बंगाली में 'तोलाबाज़ भाईपो' का मतलब 'लुटेरा भतीजा' होता हैं. शुभेन्दु अधिकारी ने कहा की तृणमूल कांग्रेस पार्टी में अब लोकतंत्र बिलकुल ख़त्म हो चूका है. भतीजावाद की राजनीती लोकतंत्र में नहीं चल सकती, आज हालात यह है की तृणमूल कांग्रेस में आत्मसम्मान वाला कोई भी व्यक्ति पार्टी का हिस्सा बना नहीं रहना चाहता. शुभेन्दु अधिकारी के पिता शिशिर अधिकारी तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और अब वह बंगाल के कांथी लोकसभा सीट पर सांसद हैं. मंत्री बनने से पहले शुभेन्दु अधिकारी तामलुक लोकसभा सीट से सांसद हुआ करते थे बाद में उनका भाई दिव्येंदु अधिकारी इस सीट पर सांसद बना. शुभेन्दु 2014 से थे अमित शाह के संपर्क में, बस थी सही मौके की तलाश अभी शुभेन्दु नंदीग्राम विधानसभा सीट से विधायक हैं और वह पश्चमी बंगाल की 40 विधानसभा सीटों पर अपनी पकड़ रखते हैं. इसी लिए राजनीतिक पंडितों का कहना है की, बीजेपी के हाथ तृणमूल कांग्रेस की मछली नहीं बल्कि पूरा तालाब ही लग गया हैं. जिस वजह से कयास यह भी लगाए जा रहें हैं की, विधानसभा चुनाव से पहले ही तृणमूल कांग्रेस अल्पमत में आ सकती हैं.